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तीन दिन में जमीन की पैमाइश नहीं की तो डीएम आवास पर धरना दूंगा
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अधिकारियों के साथ बैठक करते सदस्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग ओमप्रकाश नायक ।
- फोटो : CITY OFFICE
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उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य ओम प्रकाश नायक का दर्द मीडिया के सामने फूट पड़ा। राजस्व विभाग से नाराज ओम प्रकाश नायक ने यह भी एलान कर दिया कि तीन दिन में उनकी जमीन की पैमाइश कर नहीं दी तो डीएम आवास पर धरना शुरू कर देेंगे।
आयोग के सदस्य ओम प्रकाश नायक अलीगढ़ के अकराबाद के गांव चितरौली के निवासी हैं। विभागीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनका दर्द फूट पड़ा। उनका कहना है कि 2008 में उन्होंने जमीन खरीदी थी। क्या जमीन खरीदना गुनाह है। 2012 से कई बार टीम गठित की गई, लेकिन उन्हें आज तक जमीन नहीं दी गई। अब फिर टीम गठित की गई है। अगर तीन दिन में जमीन नहीं मिली तो वह जिलाधिकारी आवास पर धरना शुरू कर देंगे। ओम प्रकाश नायक ने कहा कि जब वह बार-बार विभागों का चक्कर लगाते हैं तो उनकी यह हालत है।
आम आदमी को कितनी परेशानी हो रही होगी। अधिकारियों, तहसीलदार, कानूनगो एवं लेखपालों की गलती है। ये लोग सीएम पोर्टल की रिपोर्ट को हवा में उड़ा देते हैं। सरकार अधिकारियों के बूते योजनाएं लाती है। ऐसा रहा है तो हम कैसे कह पाएंगे कि हमारे यहां रामराज है। निचले स्तर पर खामियां हैं, जिसे दूर करने की जरूरत है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान नायब तहसीलदार मनीष कुमार ओम प्रकाश नायक की शिकायतों को नोट कर रहे थे।
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ठाकुरों या ब्राह्मणों की सरकार नहीं, सत्ता सबके साथ
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य ओम प्रकाश नायक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता सबके साथ है। ठाकुरों या ब्राह्मणों की सरकार नहीं है। यह सबकी सरकार है। जमीन से संबंधित अपनी शिकायत के बारे में स्पष्ट किया कि वह जिलाधिकारी से नहीं, बल्कि लेखपाल और कानूनगो से व्यथित हैं। वह सिर्फ उच्चाधिकारियों का विषय की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, ताकि जमीनी स्तर की समस्याएं दूर हों और जनता को परेशानी न हो। दो अधिकारियों के ऑडियो टेप के बारे में उन्होंने अनभिज्ञता जताई और कहा कि यहां के जिलाधिकारी सुलझे हुए आदमी है।
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आयोग के सदस्य ओम प्रकाश नायक अलीगढ़ के अकराबाद के गांव चितरौली के निवासी हैं। विभागीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनका दर्द फूट पड़ा। उनका कहना है कि 2008 में उन्होंने जमीन खरीदी थी। क्या जमीन खरीदना गुनाह है। 2012 से कई बार टीम गठित की गई, लेकिन उन्हें आज तक जमीन नहीं दी गई। अब फिर टीम गठित की गई है। अगर तीन दिन में जमीन नहीं मिली तो वह जिलाधिकारी आवास पर धरना शुरू कर देंगे। ओम प्रकाश नायक ने कहा कि जब वह बार-बार विभागों का चक्कर लगाते हैं तो उनकी यह हालत है।
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आम आदमी को कितनी परेशानी हो रही होगी। अधिकारियों, तहसीलदार, कानूनगो एवं लेखपालों की गलती है। ये लोग सीएम पोर्टल की रिपोर्ट को हवा में उड़ा देते हैं। सरकार अधिकारियों के बूते योजनाएं लाती है। ऐसा रहा है तो हम कैसे कह पाएंगे कि हमारे यहां रामराज है। निचले स्तर पर खामियां हैं, जिसे दूर करने की जरूरत है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान नायब तहसीलदार मनीष कुमार ओम प्रकाश नायक की शिकायतों को नोट कर रहे थे।
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ठाकुरों या ब्राह्मणों की सरकार नहीं, सत्ता सबके साथ
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य ओम प्रकाश नायक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता सबके साथ है। ठाकुरों या ब्राह्मणों की सरकार नहीं है। यह सबकी सरकार है। जमीन से संबंधित अपनी शिकायत के बारे में स्पष्ट किया कि वह जिलाधिकारी से नहीं, बल्कि लेखपाल और कानूनगो से व्यथित हैं। वह सिर्फ उच्चाधिकारियों का विषय की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, ताकि जमीनी स्तर की समस्याएं दूर हों और जनता को परेशानी न हो। दो अधिकारियों के ऑडियो टेप के बारे में उन्होंने अनभिज्ञता जताई और कहा कि यहां के जिलाधिकारी सुलझे हुए आदमी है।