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Aligarh News: सीएमओ की डांट से क्षुब्ध स्वास्थ्य कर्मियों ने खाईं नींद की गोलियां

Thu, 03 Aug 2023 12:43 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Aug 2023 12:43 AM IST
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Hurt by CMO's scolding, health worker ate sleeping pills
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में तैनात हेल्थ वर्कर (टीकाकरण प्रभारी) गीता डे ने बुधवार सुबह अस्पताल में ही अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियां खा लीं, जिससे वह बेहोश हो गईं। इससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पता चला कि गीता खुद के तबादले और निरीक्षण के दौरान सबके सामने सीएमओ द्वारा डांटे जाने से आहत हो गई थीं। इसी के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। आईसीयू में भर्ती गीता डे की हालत में सुधार है।
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बताया गया है कि राजीव नगर, क्वार्सी बाईपास निवासी 58 वर्षीय गीता डे स्वास्थ्य विभाग में हेल्थ वर्कर के पद पर तैनात हैं। उनकी मूल तैनाती बिजौली सीएचसी पर है और कोविड के दौर से उनकी संबद्धता दीनदयाल अस्पताल में चल रही है। यहां वह अस्पताल में टीकाकरण प्रभारी का जिम्मा संभाल रही हैं। बताया गया है कि 29 जुलाई को सीएमओ स्तर से उनकी संबद्धता यहां से खत्म कर दी गई है और मूल तैनाती पर जाने का आदेश जारी किया गया है। मगर वह यहां से नहीं गईं।
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बुधवार सुबह आठ बजे अपर निदेशक स्वास्थ्य (एडी हेल्थ) डाॅ. साधना राठौर, सीएमओ डाॅ. नीरज त्यागी अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे। सीएमओ जब टीकाकरण कक्ष में पहुंचे तो गीता डे लेबर रूम में टीका लगाने गई थीं। कुछ देर बाद वापस आने पर सीएमओ का गीता डे से आमना-सामना हो गया। उन्होंने गीता डे से यहां का प्रभार न छोड़ने के बारे में पूछा। इस पर गीता ने तर्क दिया कि सीएमएस ने अभी कार्यमुक्त नहीं किया है।
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सीएमओ ने उन्हें डांटते हुए कहा कि तुम यहां से जाना नहीं चाहती हो, तुम्हारे खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। अभी कार्रवाई संबंधी आदेश जारी किया जाएगा। इतना कहकर सीएमओ वहां से चले गए। बताते हैं कि इसके बाद गीता डे ने अपने कक्ष में नींद की आठ-दस गोलियां खा लीं और कुछ ही पल में वह बेहोश हो गईं। इस पर उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कराया गया। एडी हेल्थ, सीएमओ व सीएमएस भी पहुंच गए। होश में आने पर उन्हें समझाया गया। सीएमएस डाॅ. राजेश्वर अतेंद्र कहना है कि उनका तबादला आदेश आया है। इसके अलावा कोई और बात नहीं। मसला उनके व सीएमओ के बीच का है।






अस्पताल में भ्रष्टाचार व स्वाभिमान को ठेस लगने पर हुई थी आहत : गीता

आईसीयू में भर्ती गीता डे से हालांकि किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा था। मगर गीता डे से मोबाइल पर बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें जानबूझकर परेशान करने के लिए इस उम्र में तबादला किया गया है। वह आठ वर्ष से यहां हैं। उन्हें जब प्रमोशन मिला, तब बाबू लोगों ने 25 हजार रुपये लिए। अब यहां रुकने के लिए भी बाबू लोग छमाही 25-50 हजार की इच्छा रखते हैं। इतनी रकम कहां से दूं। तबादला आदेश आने पर सीएमएस ने मुझे कार्यमुक्त नहीं किया। कह दिया कि कोई दूसरा स्टाफ आए, तब कार्यमुक्त करेंगे। आज सीएमओ ने उन्हें सबके सामने बेइज्जत किया। इस उम्र में जो सुनने योग्य न था। इसी से आहत होकर यह कदम उठाया है।






- शासनादेश के क्रम में उनकी यहां से संबद्धता समाप्त की गई है। आज यही बात उनसे कही गई। मूल तैनाती स्थल पर जाना होगा। बाकी और कोई बात नहीं। -डाॅ. नीरज त्यागी, सीएमओ।






- हेल्थ वर्कर के अपने तर्क व आरोप हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने लिखित में कुछ नहीं दिया है। बातचीत के दौरान उनसे कहा गया कि वह लिखित में दें तो उसकी जांच कराई जाएगी। उसी आधार पर आगे कार्रवाई तय की जाएगी। - डाॅ. साधना राठौर, अपर निदेशक स्वास्थ्य।









एसएनसीयू में काम करने से इन्कार, डॉक्टर ने दिया इस्तीफा
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय के एसएनसीयू में तैनात डॉक्टर अलका गर्ग ने यहां काम करने से इन्कार करते हुए इस्तीफा दे दिया है।
अस्पताल के एसएनसीयू में पिछले एक वर्ष से ताला लगा है, जबकि मरीज रिकार्ड में भर्ती दिखाकर मोहनलाल गौतम अस्पताल में भर्ती किए जाते हैं। मामला शासन तक पहुंचा तो पता चला कि यहां स्टाफ की कमी है। शासन के निर्देश के बाद यहां पर दो बाल रोग विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ तैनात कर दिया गया। इसी क्रम में अपर निदेशक स्वास्थ्य और सीएमओ यहां निरीक्षण करने पहुंचे थे। लेकिन यहां तैनात डॉ. अलका गर्ग नहीं मिलीं तो उनको बुलाया गया। अधिकारियों ने इस संबंध में सवाल किया तो डाॅ. अलका गर्ग ने यहां काम करने से इन्कार कर दिया। कहा कि इस जगह काम करने के लिए वह अभी खुद को सक्षम महसूस नहीं कर रहीं और उन्होंने इस्तीफा देने की बात कह दी। इस पर दोनों अधिकारी वहां से सीएमएस को यह निर्देश देकर चले गए कि कैसे भी एसएनसीयू शुरू कराया जाए। अपर निदेशक स्वास्थ्य का कहना है कि अगर वह इस्तीफा देती हैं तो दूसरे डॉक्टर की व्यवस्था की जाएगी। वह संविदा पर तैनात हैं। वहीं, डॉ. अलका गर्ग का कहना है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। निजी कारणों की वजह से वह यहां पर काम नहीं करना चाहती हैं।
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