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दाउद खां में बन रहा ट्रेनों का हाई स्पीड ट्रैक जंक्शन
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:57 AM IST
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रेलवे के डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के ट्रैक बिछाने के लिए रखी गई रेल पटरियां।
- फोटो : अमर उजाला
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आशीष निगम
दिल्ली से हावड़ा तक बुलेट ट्रेन चलाने के प्रोजेक्ट की रिपोर्ट हाल ही में रेलवे बोर्ड के पास पहुंची तो हाईस्पीड ट्रेनों पर फिर से बहस छिड़ गई है। इधर, रेलवे के हाईस्पीड डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) का काम फुल स्पीड में चल रहा है। अलीगढ़ से कानपुर की ओर दाउद खां रेलवे स्टेशन के पास डीएफसी का जंक्शन बन रहा है। जिसमें पांच रेलवे ट्रैक का जंक्शन यार्ड बनाया जा रहा है। यहां मालगाड़ियों में लोडिंग-अनलोडिंग का काम होगा। जरूरत पड़ने पर मुसाफिर ट्रेनों को भी यहां से संचालित किया जा सकता है।
अमृतसर से हावड़ा के बीच बनाए जा रहे इस स्पेशल ट्रैक की औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटा है, जिसे बाद में 140 से 150 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाया जा सकेगा। खुर्जा से हावड़ा तक ये डबल रेल लाइन ट्रैक है। अमृतसर से खुर्जा तक सिंगल ट्रैक है। खुर्जा से अलीगढ़ होते हुए ये ट्रैक टूंडला के पास चमरौला तक निर्माणाधीन है। आगे टूंडला कानपुर और कानपुर से हावड़ा के बीच भी काम जारी है। अलीगढ़ से आगे दाउद खां रेलवे स्टेशन पर इसका विशाल यार्ड वर्तमान में निर्माणाधीन है। टाटा के साथ स्पेन की कंपनी एलडिशा इस काम को पूरा कर रहे हैं। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अलीगढ़ परियोजना प्रबंधक जेके सिंह ने बताया कि 2019 तक इसको पूरा करने का लक्ष्य है।
आएगी अत्याधुनिक मशीन
अलीगढ़। न्यू ट्रैक कंस्ट्रक्शन मशीन स्पेन की एक अत्याधुनिक मशीन है, जो एक दिन में एक से डेढ़ किमी लंबा ट्रैक बिछा देती है। ये ट्रैक पूरी तरह कंप्लीट होता है। इसमें सिग्नल और ओएचई का काम ही रह जाता है, जो बाद में पूरा होता है। ये मशीन अलीगढ़ में भी ट्रैक बिछाने का काम करेगी। इससे पहले हाथरस में 40 किमी लंबे ट्रैक के निर्माण में इसका बीच-बीच में इस्तेमाल हो चुका है।
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दस खास बातें
1. 103 किमी लंबा ट्रैक : खुर्जा से अलीगढ़, हाथरस होते हुए टूंडला के पास चमरौला स्टेशन तक 103 किमी तक ट्रैक बिछ रहा है।
2. किमी नंबर 1369 से किमी संख्या 1266 तक : ये ट्रैक अलीगढ़ परियोजना प्रबंधक कार्यालय से बनवाया जा रहा है।
3. 34 किमी के दो बाईपास : दो बाईपास बन रहे हैं, जिनमें अलीगढ़ में 24 किमी और हाथरस में 10 किमी का बाईपास बनाया जा रहा है।
4. 1500 मीटर लंबाई के प्लेटफार्म : इसमें 58 कोच की मालगाड़ी को खड़ा कर माल उतारा जा सकेगा। माल उतारने में दिक्कत नहीं होगी।
5. डबल लाइन का ट्रैक : इस पर डबल डेकर मालगाड़ी चलाने की तैयारी अभी तक नहीं है। भविष्य में मोडिफिकेशन के बाद संभव हो सकेगा।
6. हाईस्पीड ट्रैक : इस ट्रैक पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी दौड़ेगी। वर्तमान में मालगाड़ी की स्पीड 80 किमी प्रति घंटा तक होती है।
7. पांच लाइन का यार्ड : दाउदखां में पांच रेलवे लाइन का यार्ड बन रहा है, जिसमें मालगाड़ियाें को रोका जा सकेगा। माल उतारा जा सकेगा।
8. 2019 तक होगा पूरा : डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का अलीगढ़ का काम पूरा होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। काम की रफ्तार संतोषजनक है।
9. खुर्जा तक सिंगल और वहां से डबल : अमृतसर से खुर्जा तक रेलवे लाइन सिंगल है। खुर्जा से हावड़ा तक ये रेलवे ट्रैक डबल बन रहा है।
10. खुर्जा से कानपुर तक 3200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है, जिसमें 1500 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिकल्स और सिग्नल के काम में खर्च करने का बजट है।
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दिल्ली से हावड़ा तक बुलेट ट्रेन चलाने के प्रोजेक्ट की रिपोर्ट हाल ही में रेलवे बोर्ड के पास पहुंची तो हाईस्पीड ट्रेनों पर फिर से बहस छिड़ गई है। इधर, रेलवे के हाईस्पीड डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) का काम फुल स्पीड में चल रहा है। अलीगढ़ से कानपुर की ओर दाउद खां रेलवे स्टेशन के पास डीएफसी का जंक्शन बन रहा है। जिसमें पांच रेलवे ट्रैक का जंक्शन यार्ड बनाया जा रहा है। यहां मालगाड़ियों में लोडिंग-अनलोडिंग का काम होगा। जरूरत पड़ने पर मुसाफिर ट्रेनों को भी यहां से संचालित किया जा सकता है।
अमृतसर से हावड़ा के बीच बनाए जा रहे इस स्पेशल ट्रैक की औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटा है, जिसे बाद में 140 से 150 किमी प्रति घंटा तक बढ़ाया जा सकेगा। खुर्जा से हावड़ा तक ये डबल रेल लाइन ट्रैक है। अमृतसर से खुर्जा तक सिंगल ट्रैक है। खुर्जा से अलीगढ़ होते हुए ये ट्रैक टूंडला के पास चमरौला तक निर्माणाधीन है। आगे टूंडला कानपुर और कानपुर से हावड़ा के बीच भी काम जारी है। अलीगढ़ से आगे दाउद खां रेलवे स्टेशन पर इसका विशाल यार्ड वर्तमान में निर्माणाधीन है। टाटा के साथ स्पेन की कंपनी एलडिशा इस काम को पूरा कर रहे हैं। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अलीगढ़ परियोजना प्रबंधक जेके सिंह ने बताया कि 2019 तक इसको पूरा करने का लक्ष्य है।
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आएगी अत्याधुनिक मशीन
अलीगढ़। न्यू ट्रैक कंस्ट्रक्शन मशीन स्पेन की एक अत्याधुनिक मशीन है, जो एक दिन में एक से डेढ़ किमी लंबा ट्रैक बिछा देती है। ये ट्रैक पूरी तरह कंप्लीट होता है। इसमें सिग्नल और ओएचई का काम ही रह जाता है, जो बाद में पूरा होता है। ये मशीन अलीगढ़ में भी ट्रैक बिछाने का काम करेगी। इससे पहले हाथरस में 40 किमी लंबे ट्रैक के निर्माण में इसका बीच-बीच में इस्तेमाल हो चुका है।
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दस खास बातें
1. 103 किमी लंबा ट्रैक : खुर्जा से अलीगढ़, हाथरस होते हुए टूंडला के पास चमरौला स्टेशन तक 103 किमी तक ट्रैक बिछ रहा है।
2. किमी नंबर 1369 से किमी संख्या 1266 तक : ये ट्रैक अलीगढ़ परियोजना प्रबंधक कार्यालय से बनवाया जा रहा है।
3. 34 किमी के दो बाईपास : दो बाईपास बन रहे हैं, जिनमें अलीगढ़ में 24 किमी और हाथरस में 10 किमी का बाईपास बनाया जा रहा है।
4. 1500 मीटर लंबाई के प्लेटफार्म : इसमें 58 कोच की मालगाड़ी को खड़ा कर माल उतारा जा सकेगा। माल उतारने में दिक्कत नहीं होगी।
5. डबल लाइन का ट्रैक : इस पर डबल डेकर मालगाड़ी चलाने की तैयारी अभी तक नहीं है। भविष्य में मोडिफिकेशन के बाद संभव हो सकेगा।
6. हाईस्पीड ट्रैक : इस ट्रैक पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी दौड़ेगी। वर्तमान में मालगाड़ी की स्पीड 80 किमी प्रति घंटा तक होती है।
7. पांच लाइन का यार्ड : दाउदखां में पांच रेलवे लाइन का यार्ड बन रहा है, जिसमें मालगाड़ियाें को रोका जा सकेगा। माल उतारा जा सकेगा।
8. 2019 तक होगा पूरा : डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का अलीगढ़ का काम पूरा होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। काम की रफ्तार संतोषजनक है।
9. खुर्जा तक सिंगल और वहां से डबल : अमृतसर से खुर्जा तक रेलवे लाइन सिंगल है। खुर्जा से हावड़ा तक ये रेलवे ट्रैक डबल बन रहा है।
10. खुर्जा से कानपुर तक 3200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है, जिसमें 1500 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिकल्स और सिग्नल के काम में खर्च करने का बजट है।