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पाकिस्तानी टिड्डियों के हमले की आशंका से अलीगढ़ में हाई अलर्ट 

Sun, 09 Feb 2020 03:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा आशीष श्रीवास्तव, अलीगढ़
आशीष श्रीवास्तव, अलीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 09 Feb 2020 03:00 AM IST
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High alert due to fear of attack of Pakistani locusts in Aligarh
टि़ड्डी दल - फोटो : Social Media

पाकिस्तान और भारत के पंजाब प्रांत से राजस्थान होकर टिड्डियों का प्रकोप राजस्थान से सटे राज्यों की ओर बढ़ रहा है। जिले में पाकिस्तान से आई इन टिड्डियों के हमले की आशंका पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। कृषि विभाग की टीमें सक्रिय हो गई हैं तो डीएम ने एडवाइजरी जारी कर किसानों को हमले से बचाव के इंतजामों की जानकारी दी है। 

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क्या है टिड्डी 
टिड्डी ऐक्रिडाइइडी परिवार के आर्थोप्टोरा गण का कीट है। जो हेमिप्टेरा वंश का है। इसे लघु शृंगीय टिड्डा भी कहते हैं। संसार में इनकी केवल छह प्रजातियां पायी जाती हैं। इनकी उड़ान दो हजार मील तक होती है। मादा टिड्डी मिट्टी में कोष्ठ बनाकर रहती है। प्रत्येक कोष्ठ में 20 से 100 अंडे रखती है। गरम जलवायु में दस से बीस अंडे रोज फूट जाते हैं। इसका भोजन वनस्पति है। यह चार से छह सप्ताह में वयस्क होती है। इस अवधि में यह चार से छह बार इसकी त्वचा बदलती है। वयस्क टिड्डियों में 10 से 30 दिन में प्रौढ़ता आ जाती है, तभी यह अंडे देती हैं। 
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अफ्रीका से भारत आती हैं टिड्डी 
ग्रीष्म मानसून के समय टिड्डी अफ्रीका से भारत आती हैं और पतझड़ के समय ईरान और अरब देशों की ओर चली जाती हैं। इसके बाद सोवियत, मिस्र व इजराइल में फैल जाती हैं। कुछ भारत एवं अफ्रीका लौट आती हैं। 
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लक्षण 
-पेड़ों के पत्ते रातो रात कम होना
-पत्तों का रंग बदलना 
-पत्ते पीले पड़ जाना 

अंग्रेजी काल में एयरक्राफ्ट के इस्तेमाल पर विचार 
अंग्रेजों के शासन में वर्ष 1902 में टिड्डियों ने आफत मचाई थी। उस समय बांबे के पास ट्रांबे में आम के बगीचे एवं सब्जी की फसल नष्ट कर दी थी। 1929 में टिड्डियों के हमले को नियंत्रित करने के लिए अंग्रेज हुक्मरानों ने एयरक्राफ्ट के इस्तेमाल पर विचार किया। लेकिन टिड्डियों के इंजन में घुसकर उसे ब्लाक कर देने एवं पायलट की जान के जोखिम को देखते हुए ऐसा नहीं किया गया। 

किसानों को सुझाव 
- हमले से पूर्व ही विषैली औषधियों का छिड़काव
- बेंजीन हेक्साक्लोराइड मिश्रण से भीगी गेहूं की भूसी का फैलाव 
- शाम के समय खेतों में ध्वनि उत्पन्न कर इन्हें बैठने न देना 
- फसल के चारों ओर मशाल जलाकर प्रकाश करना 
- प्रकोप होने पर मिथाइल पैराथियान की 25-30 किग्रा प्रति हेक्टेयर में छिड़काव 

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