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लाल किले को निजी हाथों में सौंपना अन्याय : हबीब
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Thu, 07 Jun 2018 01:15 AM IST
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Irfan Habib
- फोटो : Amar Ujala
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प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब का कहना है कि दिल्ली के लाल किले को डालमिया समूह और हुमायूं के मकबरे को आगा खां ट्रस्ट के हवाले करना ऐतिहासिक धरोहरों के साथ अन्याय है। यह अन्याय सांप्रदायिक सोच के तहत किया जा रहा है या फिर बड़े घरानों को व्यवसायिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
वह एएमयू के सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी इतिहास विभाग की ओर से ‘हमारी विरासत को खतरा : राष्ट्रीय स्मारकों के प्रबंधन की समस्या’ पर सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण के प्रति और हमारे प्रयासों में ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव से संबंधित मामलों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। प्रो. इरफान ने कहा कि असुरक्षा की नीति चाहे फतेहपुर सीकरी में वाटर वर्क्स का मामला हो या चाहे प्रचार, टिप्टिंग के प्रभुत्व के द्वारा ऐतिहासिक इमारतों के गलत प्रतिनिधित्व की समस्या हो। यह एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण किया जाना चाहिए और आधुनिकीकरण के नाम पर इनसे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
इतिहासकार प्रो. शीरीं मूसवीं ने कहा कि हुमायूं मकबरे की वास्तविक पहचान से छेड़छाड़ की र्गई है। इस संबंध में भारतीय सर्वेक्षण पुरातत्व विभाग के सलाहकार बोर्ड से भी राय नहीं ली गई। भारतीय सर्वेक्षण पुरातत्व विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. जमाल हसन ने कहा कि निजी संस्थाएं मरम्मत के नाम पर प्राचीन इमारतों की ऐतिहासिक चरित्र से छेड़छाड़ कर रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. शमा मित्रा चिनोय ने कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक और मुख्य इमारतों का अस्तित्व बहुत संकट में है। इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. अली नदीम रेजावी ने कहा कि एएसआई के ही अधिकारियों ने अनेक प्राचीन इमारतों का आधुनिकीकरण करके उनका स्वरूप ही बदल दिया है।
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वह एएमयू के सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी इतिहास विभाग की ओर से ‘हमारी विरासत को खतरा : राष्ट्रीय स्मारकों के प्रबंधन की समस्या’ पर सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण के प्रति और हमारे प्रयासों में ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव से संबंधित मामलों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। प्रो. इरफान ने कहा कि असुरक्षा की नीति चाहे फतेहपुर सीकरी में वाटर वर्क्स का मामला हो या चाहे प्रचार, टिप्टिंग के प्रभुत्व के द्वारा ऐतिहासिक इमारतों के गलत प्रतिनिधित्व की समस्या हो। यह एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण किया जाना चाहिए और आधुनिकीकरण के नाम पर इनसे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
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इतिहासकार प्रो. शीरीं मूसवीं ने कहा कि हुमायूं मकबरे की वास्तविक पहचान से छेड़छाड़ की र्गई है। इस संबंध में भारतीय सर्वेक्षण पुरातत्व विभाग के सलाहकार बोर्ड से भी राय नहीं ली गई। भारतीय सर्वेक्षण पुरातत्व विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. जमाल हसन ने कहा कि निजी संस्थाएं मरम्मत के नाम पर प्राचीन इमारतों की ऐतिहासिक चरित्र से छेड़छाड़ कर रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. शमा मित्रा चिनोय ने कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक और मुख्य इमारतों का अस्तित्व बहुत संकट में है। इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. अली नदीम रेजावी ने कहा कि एएसआई के ही अधिकारियों ने अनेक प्राचीन इमारतों का आधुनिकीकरण करके उनका स्वरूप ही बदल दिया है।
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