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आयुष्मान कार्ड का लाभ मिला होता तो आकाश का पैर न कटता : जमीरउल्लाह
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सपा के पूर्व विधायक जमीरउल्ला खान ने कहा कि आयुष्मान कार्ड का लाभ आकाश लोधी को मिला होता, तो उसका पैर नहीं कटता। ताउम्र वह किसी पर बोझ बनने से बच जाता। उन्होंने आकाश के दुर्घटना में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
पूर्व विधायक ने आकाश के परिवार को मदद करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जीवन ज्योति हॉस्पिटल में आकाश लोधी का ऑपरेशन लगभग चार घंटे तक चला। चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन के बाद उन्हें बताया कि आकाश के शरीर में सेप्टिक फैल रही थी। इसलिए ऑपरेशन करना पड़ा।
अगर यह ऑपरेशन न होता तो आकाश की जिंदगी नहीं बच पाती। आकाश की जिंदगी बचाने के लिए हमें घुटने से ऊपर तक का पैर काटना पड़ा। चिकित्सक की बात पर पूर्व विधायक भावुक हो गए। उन्होंने परिवार की महिलाओं से कहा कि उन्हें बड़ा अफसोस है कि आकाश का पैर नहीं बचा सका।
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जमीर उल्लाह खान ने कहा कि अगर दुर्घटना हुई थी तो पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज करके जिसने घटना करने वाले से हर्जाना दिलाना चाहिए था। इस गरीब परिवार के लिए अगर पैसा मिल गया होता तो समय से इलाज हो जाता तो आज यह नौबत नहीं आती।
स्वास्थ्य विभाग भी इस हालात के लिए जिम्मेदार है, क्योंकि आयुष्मान कार्ड का लाभ अगर इस पीड़ित परिवार को मिल गया होता या सरकारी अस्पतालों में आकाश को भर्ती कर लिया गया होता या समय से इलाज मिल जाता है तो यह नौबत नहीं आती कि जिंदगी बचाने के लिए आकाश का पैर काटना पड़ता।
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पूर्व विधायक ने आकाश के परिवार को मदद करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जीवन ज्योति हॉस्पिटल में आकाश लोधी का ऑपरेशन लगभग चार घंटे तक चला। चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन के बाद उन्हें बताया कि आकाश के शरीर में सेप्टिक फैल रही थी। इसलिए ऑपरेशन करना पड़ा।
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अगर यह ऑपरेशन न होता तो आकाश की जिंदगी नहीं बच पाती। आकाश की जिंदगी बचाने के लिए हमें घुटने से ऊपर तक का पैर काटना पड़ा। चिकित्सक की बात पर पूर्व विधायक भावुक हो गए। उन्होंने परिवार की महिलाओं से कहा कि उन्हें बड़ा अफसोस है कि आकाश का पैर नहीं बचा सका।
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जमीर उल्लाह खान ने कहा कि अगर दुर्घटना हुई थी तो पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज करके जिसने घटना करने वाले से हर्जाना दिलाना चाहिए था। इस गरीब परिवार के लिए अगर पैसा मिल गया होता तो समय से इलाज हो जाता तो आज यह नौबत नहीं आती।
स्वास्थ्य विभाग भी इस हालात के लिए जिम्मेदार है, क्योंकि आयुष्मान कार्ड का लाभ अगर इस पीड़ित परिवार को मिल गया होता या सरकारी अस्पतालों में आकाश को भर्ती कर लिया गया होता या समय से इलाज मिल जाता है तो यह नौबत नहीं आती कि जिंदगी बचाने के लिए आकाश का पैर काटना पड़ता।