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बच्चों के ‘तमंचों’ को लगी जीएसटी की जंग
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:30 AM IST
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बच्चों के ‘तमंचों’ को लगी जीएसटी की जंग
- फोटो : Rupesh
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बच्चों के खिलौने पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की जबर्दस्त मार पड़ी है। टॉय पिस्टल का मौसमी कारोबार औंधे मुंह गिर पड़ा है। कारखाना संचालक एवं सप्लायरों का कलेजा पूंजी डूबने के डर से कांप रहा है। इस साल कारोबार में 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट की आशंका है।
दुनिया की सबसे सस्ती टॉय पिस्टल बनती है यहां
ताला एवं हार्डवेयर की तरह अलीगढ़ की टॉय पिस्टल पूरे देश में मशहूर है। दीपावली के दिनों में देश भर के बच्चे अलीगढ़ की टॉय पिस्टल लहराते हैं। चीन को कड़ी टक्कर देकर यहां के उद्यमी बाजार में अपनी उपस्थिति बनाए रहे। जानकार कहते हैं कि दुनिया की सबसे सस्ती पिस्टल अलीगढ़ में बनती है। आज भी यहां के थोक बाजार में 20-22 रुपये में एक दर्जन रोल गन मिल जाएंगी। दीपावली के समय करोड़ों का काम होता है।
तबाही की ओर कारोबार
यहां के उद्यमियों एवं सप्लायरों की मानें तो जीएसटी के अव्यवहारिक प्रावधानों के कारण कारोबार तबाही की ओर है। नीति बनाने वालों ने यह नहीं सोचा कि यह मौसमी कारोबार है। पहले यूपी में कारोबार करने पर 5 प्रतिशत एवं दूसरे प्रदेश में कारोबार करने पर 2 प्रतिशत वैट लगता था। जबकि टॉय पिस्टल पर 12 प्रतिशत जीएसटी थोप दिया। जीएसटी लागू होने के पहले दूसरे प्रदेश के अपंजीकृत व्यापारियों को वैट देकर माल खरीदने की छूट थी। जीएसटी लागू होने के बाद दूसरे प्रदेश के किसी भी व्यापारी को बिना जीएसटी नंबर के माल नहीं दे सकते। यही परेशानी का सबसे बड़ा कारण है। इसकी बिक्री सामान्यत: शोरूम में नहीं होती। छोटे दुकानदार फुटपाथ पर या ढकेल पर इसकी बिक्री करते हैं। अब सवाल उठता है कि फुटपाथ वाले जीएसटी नंबर कहां से लाएं।
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कंपोजिशन स्कीम की मार
एक दूसरी बड़ी परेशानी यह है कि करीब 70 प्रतिशत व्यापारी कंपोजिशन स्कीम (सालाना एक करोड़ से कम कारोबार वाले) के अंतर्गत आते हैं। उनको कुल जीएसटी के अतिरिक्त दो प्रतिशत (12 प्रतिशत प्लस दो प्रतिशत विनिर्माण यानी 14 प्रतिशत) पर माल डालना होता है। उन्हें कोई रिफंड भी नहीं मिलता है। जबकि कंपोजिशन वाले व्यापारी आईटीसी क्लेम कर लेंगे। इसका मतलब यह होगा कि कंपोजिशन स्कीम के बाहर के व्यापारी 100 रुपये के माल को 105 रुपये में बेचकर भी फायदे में रहेंगे, जबकि कंपोजिशन वाले व्यापारियों को उसी माल को करीब 120 रुपये में बेचना मजबूरी है। इसकी वजह से कंपोजिशन वाले व्यापारी माल खरीदने से हाथ खींच रहे हैं।
वर्जन
जीएसटी के अव्यवहारिक प्रावधानों एवं कंपोजिशन स्कीम की विसंगतियों के कारण कारोबार में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है। नीति बनाते समय यह ध्यान भी नहीं रखा गया कि यह मौसमी कारोबार है। देश भर में दीपावली के मौके पर टॉय पिस्टल की बिक्री फुटपाथ पर होती है। सप्लायरों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पूंजी का 12 प्रतिशत एडवांस में देना पड़ रहा है। जबकि व्यापारियों से पैसे की वापसी दीपावली बाद होती है।
- सुनील वार्ष्णेय, सप्लायर
मांग की कमी के कारण काफी माल बचा पड़ा है। ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। नोटबंदी एवं जीएसटी लागू होने के बाद से ही स्थिति खराब है। जीएसटी नंबर नहीं होने के कारण दूसरे प्रदेश के छोटे व्यापारी माल नहीं खरीद पा रहे। कंपोजिशन स्कीम के कारण छोटे व्यापारी भी खरीद से हाथ खींचने लगे हैं।
- महेंद्र सिंह, टॉय पिस्टल निर्माता
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दुनिया की सबसे सस्ती टॉय पिस्टल बनती है यहां
ताला एवं हार्डवेयर की तरह अलीगढ़ की टॉय पिस्टल पूरे देश में मशहूर है। दीपावली के दिनों में देश भर के बच्चे अलीगढ़ की टॉय पिस्टल लहराते हैं। चीन को कड़ी टक्कर देकर यहां के उद्यमी बाजार में अपनी उपस्थिति बनाए रहे। जानकार कहते हैं कि दुनिया की सबसे सस्ती पिस्टल अलीगढ़ में बनती है। आज भी यहां के थोक बाजार में 20-22 रुपये में एक दर्जन रोल गन मिल जाएंगी। दीपावली के समय करोड़ों का काम होता है।
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तबाही की ओर कारोबार
यहां के उद्यमियों एवं सप्लायरों की मानें तो जीएसटी के अव्यवहारिक प्रावधानों के कारण कारोबार तबाही की ओर है। नीति बनाने वालों ने यह नहीं सोचा कि यह मौसमी कारोबार है। पहले यूपी में कारोबार करने पर 5 प्रतिशत एवं दूसरे प्रदेश में कारोबार करने पर 2 प्रतिशत वैट लगता था। जबकि टॉय पिस्टल पर 12 प्रतिशत जीएसटी थोप दिया। जीएसटी लागू होने के पहले दूसरे प्रदेश के अपंजीकृत व्यापारियों को वैट देकर माल खरीदने की छूट थी। जीएसटी लागू होने के बाद दूसरे प्रदेश के किसी भी व्यापारी को बिना जीएसटी नंबर के माल नहीं दे सकते। यही परेशानी का सबसे बड़ा कारण है। इसकी बिक्री सामान्यत: शोरूम में नहीं होती। छोटे दुकानदार फुटपाथ पर या ढकेल पर इसकी बिक्री करते हैं। अब सवाल उठता है कि फुटपाथ वाले जीएसटी नंबर कहां से लाएं।
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कंपोजिशन स्कीम की मार
एक दूसरी बड़ी परेशानी यह है कि करीब 70 प्रतिशत व्यापारी कंपोजिशन स्कीम (सालाना एक करोड़ से कम कारोबार वाले) के अंतर्गत आते हैं। उनको कुल जीएसटी के अतिरिक्त दो प्रतिशत (12 प्रतिशत प्लस दो प्रतिशत विनिर्माण यानी 14 प्रतिशत) पर माल डालना होता है। उन्हें कोई रिफंड भी नहीं मिलता है। जबकि कंपोजिशन वाले व्यापारी आईटीसी क्लेम कर लेंगे। इसका मतलब यह होगा कि कंपोजिशन स्कीम के बाहर के व्यापारी 100 रुपये के माल को 105 रुपये में बेचकर भी फायदे में रहेंगे, जबकि कंपोजिशन वाले व्यापारियों को उसी माल को करीब 120 रुपये में बेचना मजबूरी है। इसकी वजह से कंपोजिशन वाले व्यापारी माल खरीदने से हाथ खींच रहे हैं।
वर्जन
जीएसटी के अव्यवहारिक प्रावधानों एवं कंपोजिशन स्कीम की विसंगतियों के कारण कारोबार में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है। नीति बनाते समय यह ध्यान भी नहीं रखा गया कि यह मौसमी कारोबार है। देश भर में दीपावली के मौके पर टॉय पिस्टल की बिक्री फुटपाथ पर होती है। सप्लायरों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पूंजी का 12 प्रतिशत एडवांस में देना पड़ रहा है। जबकि व्यापारियों से पैसे की वापसी दीपावली बाद होती है।
- सुनील वार्ष्णेय, सप्लायर
मांग की कमी के कारण काफी माल बचा पड़ा है। ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। नोटबंदी एवं जीएसटी लागू होने के बाद से ही स्थिति खराब है। जीएसटी नंबर नहीं होने के कारण दूसरे प्रदेश के छोटे व्यापारी माल नहीं खरीद पा रहे। कंपोजिशन स्कीम के कारण छोटे व्यापारी भी खरीद से हाथ खींचने लगे हैं।
- महेंद्र सिंह, टॉय पिस्टल निर्माता