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सफाई कर्मियों के लिए ग्रेजुएट की कतार चिंताजनक : जावड़ेकर
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Tue, 10 Jan 2017 02:31 AM IST
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सरकारी स्कूलों का गिरता स्तर अफसोसजनक है और इसके लिए जरूरी है कि शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाए। हालात इतने खराब हो गए हैं कि स्नातक उत्तीर्ण युवा सफाई कर्मियों के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिसपर हमें गहन चिंतन करना चाहिए। प्राथमिक शिक्षा को सुधारने के लिए राइट टू एजूकेशन एक्ट में संशोधन किया जाएगा।
ये बातें सोमवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने यहां बुद्धिजीवियों के साथ एक होटल में संवाद कार्यक्रम के दौरान कहीं। जावड़ेकर ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार की प्राथमिकता की सूची में शिक्षा शीर्ष पर है। उन्होंने मुसलमानों की दुखती रग पर भी हाथ रखा, कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट देखकर सबको दुख हुआ।
उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने मुसलमानों का नाम लिए बगैर कहा कि जब राज्यवार अध्ययन किया तो पता चला कि केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ समेत दस राज्यों में रिजल्ट एक समान है, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, असोम, मध्य प्रदेश आदि कुछ राज्यों में फर्क है और यहीं प्रॉब्लम है।
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उन्होंने कहा कि इसमें सुधार लाने में सबकी सहभागिता चाहिए। जावडे़कर ने कहा कि यह देखकर दुख होता है, जब ग्रेजुएट स्वीपर के लिए आवेदन करते हैं। ऐसा लगता है कि हमने उन्हें कुछ नहीं सिखाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का जोर सबको गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर है।
मैं स्वयं परिषदीय स्कूल में पढ़ा हूं। आज वह कैसे खराब हो गए, इस पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार राइट टू एजूकेशन एक्ट में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। 25 राज्यों ने उनसे मांग की है, जो राज्य चाहेंगे उन्हें कक्षा 5 एवं 8 में परीक्षा लेने एवं फेल करने का अधिकार दिया जाएगा। पहली बार फेल होने पर तीन महीने बाद दोबारा परीक्षा देनी होगी। उसमें फेल होने पर उसे अगली कक्षा में जाने से रोकने का अधिकार राज्यों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले साल से सीबीएसई स्कूलों में 10 वीं की बोर्ड परीक्षा शुरू कर दी जाएगी।
उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण दिलाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेट देने वाली दुकानें नहीं चलने दी जाएंगी। नोटबंदी पर कहा कि हमने जनता पर भरोसा किया है। हम तमाम कार्यों में पारदर्शिता लाना चाहते हैं। इसमें हमें आप सबको नैतिक, आर्थिक एवं सब्र का समर्थन चाहिए।
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ये बातें सोमवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने यहां बुद्धिजीवियों के साथ एक होटल में संवाद कार्यक्रम के दौरान कहीं। जावड़ेकर ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार की प्राथमिकता की सूची में शिक्षा शीर्ष पर है। उन्होंने मुसलमानों की दुखती रग पर भी हाथ रखा, कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट देखकर सबको दुख हुआ।
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उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने मुसलमानों का नाम लिए बगैर कहा कि जब राज्यवार अध्ययन किया तो पता चला कि केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ समेत दस राज्यों में रिजल्ट एक समान है, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, असोम, मध्य प्रदेश आदि कुछ राज्यों में फर्क है और यहीं प्रॉब्लम है।
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उन्होंने कहा कि इसमें सुधार लाने में सबकी सहभागिता चाहिए। जावडे़कर ने कहा कि यह देखकर दुख होता है, जब ग्रेजुएट स्वीपर के लिए आवेदन करते हैं। ऐसा लगता है कि हमने उन्हें कुछ नहीं सिखाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का जोर सबको गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर है।
मैं स्वयं परिषदीय स्कूल में पढ़ा हूं। आज वह कैसे खराब हो गए, इस पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार राइट टू एजूकेशन एक्ट में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। 25 राज्यों ने उनसे मांग की है, जो राज्य चाहेंगे उन्हें कक्षा 5 एवं 8 में परीक्षा लेने एवं फेल करने का अधिकार दिया जाएगा। पहली बार फेल होने पर तीन महीने बाद दोबारा परीक्षा देनी होगी। उसमें फेल होने पर उसे अगली कक्षा में जाने से रोकने का अधिकार राज्यों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले साल से सीबीएसई स्कूलों में 10 वीं की बोर्ड परीक्षा शुरू कर दी जाएगी।
उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण दिलाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेट देने वाली दुकानें नहीं चलने दी जाएंगी। नोटबंदी पर कहा कि हमने जनता पर भरोसा किया है। हम तमाम कार्यों में पारदर्शिता लाना चाहते हैं। इसमें हमें आप सबको नैतिक, आर्थिक एवं सब्र का समर्थन चाहिए।