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मौलाना आजाद और गांधी को गलत प्रस्तुत कर रहे थे राज्यपालः प्रो. इरफान हबीब
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प्रो. इरफान हबीब।
- फोटो : CITY OFFICE
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केरल के कन्नूर में इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस के अधिवेशन में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब की हुई वाद विवाद की घटना पर प्रो. इरफान हबीब ने कहा है कि आरिफ मो. खान गांधी और मौलाना आजाद के कथनों को तोड़ मरोड़ कर अपने अनुसार प्रस्तुत कर रहे थे। इस पर उन्होंने हस्तक्षेप किया था, लेकिन उनके सुरक्षा कर्मियों का रवैया बेहद खेदजनक था।
प्रो. हबीब ने बताया कि इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस ने उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित ही नहीं किया था। वहां की स्टेट यूनिवर्सिटी ने उनको विश्वविद्यालय चांसलर होने के नाते स्वागत संबोधन के लिए आमंत्रित किया था। यही स्टेट यूनिवर्सिटी कार्यक्रम की मेजबान भी थी। हिस्ट्री कांग्रेस 1935 में स्थापित हुई पुरानी संस्था है। उसके अपने कायदे हैं। किस प्रकार सत्र होना चाहिए। पहले संस्था का निवर्तमान अध्यक्ष संबोधन करता है। उसके बाद अध्यक्ष का संबोधन होता है। उसके बाद जो मेजबान होता है उसकी ओर से संबोधन होता है। इस कार्यक्रम से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि क्रम में बदलाव हुआ हो। जब राज्यपाल कार्यक्रम में आए तो किसी भी संस्था के पदाधिकारी को मंच पर नहीं बैठने दिया। सुरक्षा कर्मियों ने बीच में कठघरे लगा दिए। जो नीचे बैठा रह गया वह नीचे ही रह गया।
पहले भी गवर्नर कार्यक्रम में आए, लेकिन इस प्रकार का व्यवधान ही हुआ। यह हिस्ट्री कांग्रेस के नियमों के विपरीत थी। इसके अलावा उन्होंने खुद ही तय कर लिया कि उन्हें कब बोलना है। जब बोलना शुरू किया तो हिस्ट्री कांग्रेस के संबंध में बोलने के बजाय गांधी जी और मौलाना आजाद के हवाले से वह बातें कहनी शुरू कर दीं जो उन लोगों ने कभी कहीं नहीं। इस पर मैंने कहा कि आप उस पर बात करें जो बात यहां से संबंधित है। इस पर सुरक्षाकर्मी आ गए और दखलंदाजी करने लगे। वहां करीब डेढ़ हजार प्रतिनिधि थे सभी खड़े हो गए। मैं वहां पर सरकार का बेहद आभारी हूं जब पुलिस ने ऐसी स्थिति में दखल देने की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया।
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प्रो. हबीब ने बताया कि इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस ने उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित ही नहीं किया था। वहां की स्टेट यूनिवर्सिटी ने उनको विश्वविद्यालय चांसलर होने के नाते स्वागत संबोधन के लिए आमंत्रित किया था। यही स्टेट यूनिवर्सिटी कार्यक्रम की मेजबान भी थी। हिस्ट्री कांग्रेस 1935 में स्थापित हुई पुरानी संस्था है। उसके अपने कायदे हैं। किस प्रकार सत्र होना चाहिए। पहले संस्था का निवर्तमान अध्यक्ष संबोधन करता है। उसके बाद अध्यक्ष का संबोधन होता है। उसके बाद जो मेजबान होता है उसकी ओर से संबोधन होता है। इस कार्यक्रम से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि क्रम में बदलाव हुआ हो। जब राज्यपाल कार्यक्रम में आए तो किसी भी संस्था के पदाधिकारी को मंच पर नहीं बैठने दिया। सुरक्षा कर्मियों ने बीच में कठघरे लगा दिए। जो नीचे बैठा रह गया वह नीचे ही रह गया।
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पहले भी गवर्नर कार्यक्रम में आए, लेकिन इस प्रकार का व्यवधान ही हुआ। यह हिस्ट्री कांग्रेस के नियमों के विपरीत थी। इसके अलावा उन्होंने खुद ही तय कर लिया कि उन्हें कब बोलना है। जब बोलना शुरू किया तो हिस्ट्री कांग्रेस के संबंध में बोलने के बजाय गांधी जी और मौलाना आजाद के हवाले से वह बातें कहनी शुरू कर दीं जो उन लोगों ने कभी कहीं नहीं। इस पर मैंने कहा कि आप उस पर बात करें जो बात यहां से संबंधित है। इस पर सुरक्षाकर्मी आ गए और दखलंदाजी करने लगे। वहां करीब डेढ़ हजार प्रतिनिधि थे सभी खड़े हो गए। मैं वहां पर सरकार का बेहद आभारी हूं जब पुलिस ने ऐसी स्थिति में दखल देने की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया।
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