{"_id":"6207fba1264a51171a20db08","slug":"got-bail-on-the-basis-of-dna-report-aligarh-news-ali2850435187","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ : तो दुष्कर्म में निर्दोष ने काटी जेल... डीएनए रिपोर्ट के आधार पर मिली बेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ : तो दुष्कर्म में निर्दोष ने काटी जेल... डीएनए रिपोर्ट के आधार पर मिली बेल
विज्ञापन
लोधा क्षेत्र में किशोरी से दुष्कर्म कर गर्भवती करने के आरोप में जेल भेजा गया विवाहित भट्ठा मजदूर को डीएनए रिपोर्ट के आधार पर राहत मिल गई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया और रिपोर्ट में यह पाया गया कि गर्भवती किशोरी ने जिस बच्चे को जन्म दिया, उसका आरोपी से कोई नाता नहीं। इस आधार पर उसे जमानत दे दी गई है। फिलहाल आरोपी बाहर आ गया है और परिवार संग एसएसपी से मुलाकात कर मामले में ट्रायल में मदद कराने का अनुरोध किया है। एसएसपी ने पूरे मामले में सीओ गभाना को मॉनीटर करने के निर्देश दिए हैं।
शनिवार को एसएसपी से मुलाकात कर दिए गए पत्र में पीड़ित गजेंद्र (47 वर्ष) ने बताया कि वह भट्ठा मजदूर है। तीन बच्चों का पिता है। सबसे बड़े बच्चे की उम्र 11 और सबसे छोटी बेटी की दो वर्ष है। वह मथुरा के एक भट्ठे पर मजदूरी करता था। उसकी गांव के एक परिवार से पुस्तैनी रंजिश चल रही है। इसी बीच इस परिवार के कुछ लोग फरवरी 2021 में भट्ठे पर पहुंच गए और धमकी देते हुए रुपये मांगे। न देने पर दुष्कर्म में जेल भिजवाने की धमकी दी। वहां उस समय झगड़े की खबर पर मथुरा पुलिस आई और बाद में थाने में समझौता हुआ। इसके बाद 3 फरवरी को यहां लोधा में गजेंद्र के खिलाफ दूसरे पक्ष ने अपने परिवार की किशोरी से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसमें पुलिस ने उसे उसकी बिना सुने जेल भेज दिया।
पीड़ित के अनुसार मौखिक व तहरीर में उसे साढ़े तीन माह की गर्भवती बताया गया। मगर जांच में वह 5 माह की गर्भवती निकली। बाद में किशोरी ने बच्चे को भी जन्म दिया। गजेंद्र पक्ष ने इस मामले में हाईकोर्ट में अपना व बच्चे का डीएनए कराने का अनुरोध किया। उस अनुरोध पर अक्तूबर माह में हाईकोर्ट के निर्देश पर लोधा पुलिस ने डीएनए सैंपलिंग कराई और जांच को भेजा। पिछले दिनों उसकी जांच रिपोर्ट गजेंद्र के पक्ष में आ गई, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस वर्ष जनवरी के अंतिम सप्ताह में गजेंद्र रिहा होकर बाहर आ गया है। अब उसका अनुरोध है कि जब हाईकोर्ट में उसकी डीएनए रिपोर्ट उसके पक्ष में है तो उसका जल्द से जल्द ट्रायल कराकर इस मामले से बरी कराया जाए। एसएसपी ने मामले में सीओ को गंभीरता से देखने और मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में गजेंद्र के अधिवक्ता सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि पत्रावली न्यायालय में कमिट हो गई है। आगे की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी।
विज्ञापन
भैंस बिकी, पत्नी को करनी पड़ी मजदूरी
गजेंद्र व उसके चाचा ने अपना दुख बयां करते हुए बताया कि वह भट्ठे पर मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहा था। मगर इन लोगों ने साजिश रचके जो कुचक्र रचा। उससे उसका रोजगार गया। वह खुद जेल गया। उसकी पत्नी को मजदूरी करनी पड़ी। इस दौरान बच्चे बीमार हुए और उसकी भैंस तक बिक गई। ऐसे में अब उसके सामने रोजगार और बच्चों के लालन-पालन का संकट है।
फिर किसका था बच्चा, नहीं मालूम
इस विषय पर गजेंद्र व उसके चाचा ने बातचीत में बताया कि वह बच्चा किसका था, यह तो किशोरी ही बता सकती है। पिछले कुछ समय से किशोरी को लेकर उसका परिवार कहीं बाहर जाकर बस गया है। न्यायालय में समय-समय पर पैरोकारी के लिए आते हैं। उन्होंने यह सब साजिश में रंजिश के तहत किया और सही आरोपी को फंसाने के बजाय हमारा जीवन बर्बाद कर दिया।
पिछले वर्ष बरला में हुआ था ऐसा ही प्रकरण
- अपने जिले में यह नया मामला नहीं है। इससे पहले बरला क्षेत्र में एक किशोरी से दुष्कर्म व उसे गर्भवती करने के आरोपी युवक को निर्दोष पाया गया था। उस मामले में भी डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया है। उस मामले में भी ट्रायल में आरोपी को बरी कराए जाने की प्रक्रिया अधिवक्ता द्वारा शुरू करा दी गई है। बता दें कि उस मामले में भी किशोरी गर्भवती हुई थी।
विज्ञापन
शनिवार को एसएसपी से मुलाकात कर दिए गए पत्र में पीड़ित गजेंद्र (47 वर्ष) ने बताया कि वह भट्ठा मजदूर है। तीन बच्चों का पिता है। सबसे बड़े बच्चे की उम्र 11 और सबसे छोटी बेटी की दो वर्ष है। वह मथुरा के एक भट्ठे पर मजदूरी करता था। उसकी गांव के एक परिवार से पुस्तैनी रंजिश चल रही है। इसी बीच इस परिवार के कुछ लोग फरवरी 2021 में भट्ठे पर पहुंच गए और धमकी देते हुए रुपये मांगे। न देने पर दुष्कर्म में जेल भिजवाने की धमकी दी। वहां उस समय झगड़े की खबर पर मथुरा पुलिस आई और बाद में थाने में समझौता हुआ। इसके बाद 3 फरवरी को यहां लोधा में गजेंद्र के खिलाफ दूसरे पक्ष ने अपने परिवार की किशोरी से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसमें पुलिस ने उसे उसकी बिना सुने जेल भेज दिया।
विज्ञापन
पीड़ित के अनुसार मौखिक व तहरीर में उसे साढ़े तीन माह की गर्भवती बताया गया। मगर जांच में वह 5 माह की गर्भवती निकली। बाद में किशोरी ने बच्चे को भी जन्म दिया। गजेंद्र पक्ष ने इस मामले में हाईकोर्ट में अपना व बच्चे का डीएनए कराने का अनुरोध किया। उस अनुरोध पर अक्तूबर माह में हाईकोर्ट के निर्देश पर लोधा पुलिस ने डीएनए सैंपलिंग कराई और जांच को भेजा। पिछले दिनों उसकी जांच रिपोर्ट गजेंद्र के पक्ष में आ गई, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस वर्ष जनवरी के अंतिम सप्ताह में गजेंद्र रिहा होकर बाहर आ गया है। अब उसका अनुरोध है कि जब हाईकोर्ट में उसकी डीएनए रिपोर्ट उसके पक्ष में है तो उसका जल्द से जल्द ट्रायल कराकर इस मामले से बरी कराया जाए। एसएसपी ने मामले में सीओ को गंभीरता से देखने और मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में गजेंद्र के अधिवक्ता सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि पत्रावली न्यायालय में कमिट हो गई है। आगे की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी।
विज्ञापन
भैंस बिकी, पत्नी को करनी पड़ी मजदूरी
गजेंद्र व उसके चाचा ने अपना दुख बयां करते हुए बताया कि वह भट्ठे पर मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पाल रहा था। मगर इन लोगों ने साजिश रचके जो कुचक्र रचा। उससे उसका रोजगार गया। वह खुद जेल गया। उसकी पत्नी को मजदूरी करनी पड़ी। इस दौरान बच्चे बीमार हुए और उसकी भैंस तक बिक गई। ऐसे में अब उसके सामने रोजगार और बच्चों के लालन-पालन का संकट है।
फिर किसका था बच्चा, नहीं मालूम
इस विषय पर गजेंद्र व उसके चाचा ने बातचीत में बताया कि वह बच्चा किसका था, यह तो किशोरी ही बता सकती है। पिछले कुछ समय से किशोरी को लेकर उसका परिवार कहीं बाहर जाकर बस गया है। न्यायालय में समय-समय पर पैरोकारी के लिए आते हैं। उन्होंने यह सब साजिश में रंजिश के तहत किया और सही आरोपी को फंसाने के बजाय हमारा जीवन बर्बाद कर दिया।
पिछले वर्ष बरला में हुआ था ऐसा ही प्रकरण
- अपने जिले में यह नया मामला नहीं है। इससे पहले बरला क्षेत्र में एक किशोरी से दुष्कर्म व उसे गर्भवती करने के आरोपी युवक को निर्दोष पाया गया था। उस मामले में भी डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया है। उस मामले में भी ट्रायल में आरोपी को बरी कराए जाने की प्रक्रिया अधिवक्ता द्वारा शुरू करा दी गई है। बता दें कि उस मामले में भी किशोरी गर्भवती हुई थी।