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गोवंश के ठाठ-बाट बढ़ाएगा गोबर से बना गोकाष्ठ

Fri, 06 Nov 2020 12:57 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 06 Nov 2020 12:57 AM IST
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Gokastha News
गोशाला में लगाई गई गोकाष्ठ मशीन। - फोटो : amar ujala

गोवंश के दूध, दही, घी और मठ्ठा के साथ गोबर की कीमत भी बढ़ गई है। गोबर की औसत कीमत दस रुपये किलो तक पहुंच गई हैै। जी हां, बाजार में इसका लगभग यही भाव है। इसीलिए गोबर से गोकाष्ठ को दस रुपये किलो के भाव में खरीदा जा रहा है, जो अंतिम संस्कार में सर्वाधिक प्रयोग हो रहा है।

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राज्य सरकार निराश्रित गोवंश को पालने के लिए गोशालाओं को रोजना प्रति गोवंश 30 रुपये दे रही है। इसके अलावा गोकाष्ठ से उनका खर्च निकालने के प्रयोग शुरू हो गए हैं। पशुपालन विभाग भी इसको प्रोत्साहित कर रहा है। जिले में पशुपालन विभाग के प्रयास के बाद तीन गोशालाओं में गोकाष्ठ की मशीन स्थापित की गई हैं। गोकाष्ठ का मतलब गोबर से बनाई गई लकड़ी। रामसन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इगलास के मोहनपुर, गोंडा के कैमथल और अकराबाद के धमर्पुर में स्वामी रामतीर्थ गोधाम के नाम से गोशाला है। तीनों गोशालाओं में वर्तमान में 800 गोवंश हैं। संचालक राकेश कुमार रामसन ने बताया कि तीन मशीनों में तकरीबन दो लाख रुपये खर्च हुए हैं। ये पंजाब के पटियाला से मंगवाई गई हैं। रोजाना एक टन गोकाष्ठ तैयार हो रहा है। इससे क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिला है। अभी तक दस टन माल तैयार कर लिया है। जल्द ही इसकी बिक्री शुरू करेंगे।
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राकेश ने बताया कि एक गोवंश रोजाना औसतन 10 से 15 किलो गोबर देता है। मशीन से पांच-पांच किलो के तीन गोकाष्ठ बनते हैं। सूखने के बाद प्रति गोकाष्ठ में डेढ़ किलो वजन रहता है। दस रुपये किलो के भाव में इसकी बिक्री होती है। लेबर और भाड़ा आदि काटकर एक किलो पर पांच रुपये बचत होती है। प्रतिदिन प्रति गोवंश लगभग 15 रुपये मिलते हैं। इससे सरकार से मिलने वाले 30 रुपये के अनुदान को मिला दें तो 45 रुपये में गोवंश को भरपेट चारा दिया जा सकता है।
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वायुमंडल को शुद्ध करेगा गोकाष्ठ
राकेश कुमार रामसन ने बताया कि गोकाष्ठ के प्रयोग से पेड़ों का कटान कम होगा, क्योंकि दाह संस्कार में इसको बहुत पसंद किया जाता है। गोकाष्ठ पविर्त्र इंधन है। इसके धुएं से विषाणु और रोगाणु खत्म होते हैं। वहीं वायुमंडल में हानिकारक गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है। गोमूत्र से कीटनाशक बन सकता है। जिसके प्रयोग से जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। हर गोशाला में गोकाष्ठ मशीन होनी चाहिए।

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