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अलीगढ़ : राज्यमंत्री व डीएम के सामने युवती ने आत्महत्या की कोशिश की

Sun, 08 May 2022 01:18 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 01:18 AM IST
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Girl tried to commit suicide in front of Minister and DM
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह व डीएम के समक्ष आत्महत्या का प्रयास करने युवती को ले जाती पु? - फोटो : ATHROLI
शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, डीएम सेल्वा कुमारी जे व एसएसपी कलानिधि नैथानी के समक्ष एक युवती ने अपनी चुनरी से गले में फंदा कसकर आत्महत्या करने की कोशिश की। इससे एनेक्सी परिसर में हड़कंप मच गया। महिला पुलिस कर्मियों ने तत्काल युवती को पकड़कर उसके गले में लिपटी चुनरी हटाई। वे युवती को थाने ले गईं जहां उसे समझा बुझाकर घर भेज दिया।
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राज्यमंत्री संदीप सिंह और जिले के अधिकारी समाधान दिवस में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। तभी बुलंदशहर के गांव दीवलाखेड़ा निवासी मोनिया वहां पहुंचीं। उसने बताया कि पालीमुकीमपुर थाना क्षेत्र के गांव तरैंची में उसकी ननिहाल है। 21 जनवरी 2020 को जमीन के लालच में उसके इकलौते ममेरे भाई मुनेश (14 वर्ष) की परिवार के कुछ लोगों ने पेड़ से बांधकर हत्या कर दी। उन लोगों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। मुनेश के पिता की पूर्व में ही मौत हो चुकी है। इससे पैरवी करने वाला कोई नहीं है। मुनेश की जमीन भी परिवार के अन्य लोगों के नाम पर दर्ज हो गई।
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मोनिया के अनुसार दो साल से वह अपनी मां चंद्रवती देवी के साथ मुनेश की मौत की जांच कराने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही है। उसकी मांग है कि मृत भाई की जमीन गलत तरीके से अपने नाम दर्ज कराने वाले लोगों के नाम भी दस्तावेजों से हटाए जाएं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। शनिवार को संपूर्ण समाधान में उसने बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह के समक्ष जब यह बात रखी तो उन्होंने जांच कराकर कार्रवाई का भरोसा दिया। इससे मोनिया संतुष्ट नहीं हुई और उसने हंगामा खड़ा कर दिया। इसी बीच उसने चुनरी से फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। महिला पुलिस ने युवती को हिरासत में ले लिया। बाद में उसे थाने ले जाकर समझाते हुए घर भेज दिया गया।
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- यह मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय करता है। न्यायालय के निर्णय के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। शिकायतकर्ता को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए। - रविशंकर सिंह, एसडीएम, अतरौली
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