अलीगढ़: लड़की बताकर खिलवा दी गोली, बाद में पता चला भ्रूण था लड़का, डॉक्टर-आश कार्यकर्ता पर रिपोर्ट दर्ज
रामघाट रोड स्थित केसी सिंघल हॉस्पिटल भ्रूण लिंग निर्धारण में 10 साल पहले भी सील हुआ था। तत्कालीन सीएमओ रूपेंद्र गोयल, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ के साथ स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ हरियाणा से आई टीम ने छापा मारकर भ्रूण का लिंग निर्धारण करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
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अलीगढ़ के महुआखेड़ा थाना क्षेत्र में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण और जबरन गर्भपात कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि आशा कार्यकर्ता और एक महिला डॉक्टर ने गर्भ में लड़की होने की बात कहते हुए चार माह की गर्भवती को एक दवा दी। दवा खाने के बाद गर्भपात हुआ तो पता चला कि पेट में वास्तव में लड़का था।
पुलिस ने पति की तहरीर के आधार पर आशा कार्यकर्ता कमलेश शर्मा और डॉ. सविता सिंघल के खिलाफ केस दर्ज किया। बृहस्पतिवार को आशा कार्यकर्ता कमलेश को गर्भपात की चार गोलियों सहित गिरफ्तार कर लिया। हाथरस जिले के सासनी थाना क्षेत्र के गांव निनामई निवासी मनोज कुमार ने तहरीर में बताया कि उसकी पत्नी गर्भवती थी। आरोप है कि धनीपुर मंडी की रहने वाली आशा कार्यकर्ता कमलेश शर्मा उनके संपर्क में आई और उसने दावा किया कि वह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच करवा सकती है। कमलेश 26 अगस्त 2026 को पत्नी को रामघाट रोड स्थित केसी सिंघल हॉस्पिटल लेकर गई।
आरोप है कि वहां डॉ. सविता सिंघल ने अल्ट्रासाउंड किया और जानकारी दी कि गर्भ में लड़की पल रही है। इसके बाद आशा कार्यकर्ता ने प्रभाव डालकर एक दवा के रूप में गोली खाने के लिए दे दी। पीड़ित पति का कहना है कि 2 सितंबर 2026 को आशा कार्यकर्ता की गोली खाने के बाद पत्नी की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई। गंभीर परेशानी के चलते लगभग चार महीने का गर्भ गिर गया। मनोज के अनुसार भ्रूण देखने पर पता चला कि वह वास्तव में लड़का था।
पीड़ित पति की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। अस्पताल के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है।-सर्वम सिंह, सीओ
केसी सिंघल हॉस्पिटल में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने जाएगी। पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी। इसके बाद विभागीय नियमों के अनुसार हॉस्पिटल पर कार्रवाई भी की जाएगी।- डॉ. आरएन सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
10 साल पहले भी सील हुआ था हॉस्पिटल
रामघाट रोड स्थित केसी सिंघल हॉस्पिटल भ्रूण लिंग निर्धारण में 10 साल पहले भी सील हुआ था। तत्कालीन सीएमओ रूपेंद्र गोयल, पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ के साथ स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ हरियाणा से आई टीम ने छापा मारकर भ्रूण का लिंग निर्धारण करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। हॉस्पिटल भी सील किया गया था। हॉस्पिटल संचालक के पिता जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पूर्व चिकित्सक रह चुके हैं जबकि उनके एक रिश्तेदार आगरा में हॉस्पिटल संचालित करते हैं। सीलिंग की कार्रवाई होने के बाद आठ वर्ष पहले हाईकोर्ट से राहत मिलने पर हॉस्पिटल का सील खुल सका।