निर्यातक पीयूष गुप्ता हत्याकांड: 11 वर्ष पुराने मुकदमे में आया फैसला, आरोपी गौरव चौधरी दोषमुक्त
बचाव पक्ष के अनुसार ये घटना 4/5 जुलाई 2012 की देर रात की है। वादी मुकदमा बन्नादेवी मसूदाबाद निवासी निर्यातक विपिन बिहारी गुप्ता के अनुसार उनके मोबाइल पर रात करीब पौने दो बजे मेडिकल कॉलेज से किसी रिश्तेदार का फोन आया कि उनके भतीजे निर्यातक पीयूष गुप्ता को गोली लगी है। यह गोली गौरव चौधरी ने मारी है।
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अलीगढ़ महानगर के एक दशक पुराने बहुचर्चित निर्यातक पीयूष गुप्ता हत्याकांड में 15 दिसंबर को अदालत ने फैसला सुना दिया है। अदालत ने कमजोर साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे के आरोपी सिक्योरिटी एजेंसी संचालक गौरव चौधरी को बरी कर दिया है। यह फैसला एडीजे प्रथम की अदालत से सुनाया गया है। बता दें कि इस मुकदमे में एक अन्य आरोपी पूर्व मंत्री के करीबी शशि चौहान की पूर्व में मौत हो चुकी है।
बचाव पक्ष के अनुसार ये घटना 4/5 जुलाई 2012 की देर रात की है। वादी मुकदमा बन्नादेवी मसूदाबाद निवासी निर्यातक विपिन बिहारी गुप्ता के अनुसार उनके मोबाइल पर रात करीब पौने दो बजे मेडिकल कॉलेज से किसी रिश्तेदार का फोन आया कि उनके भतीजे निर्यातक पीयूष गुप्ता को गोली लगी है। यह गोली गौरव चौधरी ने मारी है।
इस सूचना पर विपिन बिहारी ने अपनी भाई यानि पीयूष की मां सुधा गुप्ता से पीयूष के विषय में पूछा तो बताया कि वह गौरव चौधरी व शशि चौहान के साथ गया है। वे उसे आईटीआई रोड की एक फैक्टरी में लेकर गए हैं। इस पर वे भाभी को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां पीयूष का उपचार चल रहा था। इस दौरान वहां मौजूद रिश्तेदार गगन ने बताया कि सेंटर प्वाइंट वैष्णोधाम मूल रूप से बुलंदशहर निवासी सिक्योरिटी एजेंसी संचालक गौरव चौधरी व मंत्री के करीबी जीटी रोड निवासी शशि चौहान के साथ आईटीआई रोड स्थित औद्योगिक आस्थान में पीयूष एक फैक्टरी पर आए। जहां वे दोनों पीयूष से दो लाख रुपये मांगने लगे। उनके साथ दो अन्य अज्ञात लोग भी थे। पीयूष ने रुपये देने से मना किया।
इसी दौरान गौरव ने अपनी अंटी से लाइसेंसी पिस्टल निकालकर पीयूष पर गोली चलाई। गगन ने बचाने की कोशिश की तो शशि ने फायर किया, जिससे गगन बाल-बाल बच गया। तभी फैक्टरी स्वामी सुमित वहां पहुंच गए। उनकी गाड़ी की लाइट में गौरव, शशि व उनके दो अन्य साथी भाग गए। कमर में गोली लगने जख्मी पीयूष को मेडिकल कॉलेज लाया गया। जिसका नामजद मुकदमा पुलिस ने हमले की धारा में दर्ज किया। यहां कई दिन के उपचार के बाद उन्हें दिल्ली ले जाया गया, जहां 23 जुलाई को पीयूष को मृत घोषित कर दिया गया।
कुल 13 गवाह, पुलिस को दिया बयान भी न आया काम
इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए। जिनमें वादी चाचा, मां, पत्नी, अस्पताल लाने वाला रिश्तेदार युवक, फैक्टरी स्वामी सहित अन्य पुलिस व अस्पताल के गवाह शामिल हैं। इसके अलावा विवेचक ने घायल का बयान 161 के तहत दर्ज किया। मगर कोई साक्ष्य अदालत में काम नहीं आया। वहीं बचाव पक्ष ने भी अपनी ओर से तमाम तर्क दिए गए। लंबे समय तक चले ट्रायल के बाद मुकदमे में आरोपी को बरी किया गया है।
हमें न्याय की उम्मीद थी। पूरे मुकदमे में हमने मजबूत पैरवी की। खुद पीयूष का बयान पुलिस ने लिखा था, उसे अदालत में मृत्यु पूर्व बयान के तौर पर स्वीकारने की अपील की गई। मगर हमारी दलील नहीं स्वीकारी गई हैं। अब इस मामले में हम फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।-विपिन बिहारी गुप्ता, वादी/मृतक के चाचा
अदालत के समक्ष हमने अपना पक्ष बहुत मजबूती से रखा था। काफी साक्ष्य व गवाह इस मुकदमे में हैं। मगर हमारे पक्ष को नजरंदाज कर फैसला किया गया है। अब फैसले का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद अपील की जाएगी।-जेपी राजपूत, एडीजीसी अभियोजन