हथियारों के सौदागर: दबोचे आरोपियों के मोबाइल बने मुखबिर, मेमोरी में छिपा तस्करी का पूरा खेल और नेटवर्क
आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल शुरू कर दी है। मोबाइल डाटा के विश्लेषण से यह स्पष्ट किया जा रहा है कि कौन लोग लगातार इनके संपर्क में थे और किन इलाकों में गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों से विस्तृत रिकॉर्ड जुटाए गए हैं।
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अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह के भंडाफोड़ के बाद अब अलीगढ़ पुलिस इसकी जड़ों तक पहुंचने में जुट गई है। गिरफ्त में आए 12 आरोपियों के मोबाइल फोन इस नेटवर्क की परतें खोलने की कुंजी बन गए हैं। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगालकर यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किन-किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे और इसके पीछे किन लोगों का नेटवर्क सक्रिय था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल शुरू कर दी है। मोबाइल डाटा के विश्लेषण से यह स्पष्ट किया जा रहा है कि कौन लोग लगातार इनके संपर्क में थे और किन इलाकों में गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों से विस्तृत रिकॉर्ड जुटाए गए हैं, जिनमें कॉल का समय, अवधि और बातचीत के पैटर्न का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही, कॉल के दौरान मोबाइल किन टावरों से जुड़ा रहा, इसके आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। इस प्रक्रिया से उनके मूवमेंट का रूट मैप तैयार किया जा रहा है, जिससे यह समझने में मदद मिले कि गिरोह किस तरह अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय था।
पकड़े गए आरोपियों में गिरोह का सरगना हाजी कासिफ के अलावा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दो छात्र शहवान खान और मो. कासिफ भी शामिल हैं। इनके अलावा एक होटल कारोबारी समेत अन्य सदस्य भी गिरफ्त में हैं, जिनके आपराधिक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। कई आरोपियों पर पहले से ही गंभीर मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
हम इस पूरे संगठित गिरोह के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच कर रहे हैं। फर्जी नंबर प्लेट वाली कार और मोबाइल डेटा से कई और खुलासे होने की उम्मीद है।- नीरज जादौन, एसएसपी
आईएमईआई ट्रैकिंग से आसान हुई जांच
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच में तकनीक से काफी मदद मिली है। उन्होंने बताया कि आईएमईआई ट्रैकिंग के जरिए काफी काम आसान हुआ है। सिम कार्ड बदलने के बावजूद मोबाइल हैंडसेट की पहचान इसी यूनिक नंबर से हो रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि एक ही फोन में कितनी बार सिम बदली गई और वह किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय रहा। इससे नेटवर्क के विस्तार और आपसी कनेक्शन की पुष्टि हो सकेगी।
चेसिस नंबर बताएगी असली मालिक
जांच के दौरान बरामद स्विफ्ट कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगी पाई गई है। अब पुलिस चेसिस नंबर के जरिए वाहन के वास्तविक मालिक का पता लगाने में जुटी है, जिससे गिरोह के अन्य कनेक्शन सामने आने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक की गहराई से जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर डंप डेटा का भी विश्लेषण किया जाएगा, जिससे किसी विशेष स्थान पर सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान की जा सके।