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जिला योजना पर अविश्वास प्रस्ताव की आंच
आशीष निगम
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:47 AM IST
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तो क्या इस बार भी जिले के विकास के लिए आवश्यक जिला योजना जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ संभावित अविश्वास प्रस्ताव की आंच में झुलस जाएगी। वर्तमान में चल रही राजनीतिक उठापटक से तो यही लगता है।
वर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ विपक्षियों की खेमेबंदी चल रही है, ऐसे में जल्द कोई निर्णय आ सकता है। इस प्रकरण का पूरा असर 334.76 करोड़ की जिला योजना के अनुमोदन पर पड़ने की आशंका है। अब सभी की निगाह 24 जून को जिला पंचायत के पंत सभागार में होने जा रही बोर्ड बैठक पर टिकी है।
नियमानुसार इस वित्तीय वर्ष के लिए जिला योजना का अनुमोदन 17 जनवरी 2017 तक हो जाना चाहिए था। लेकिन पहले विधानसभा चुनाव आचार संहिता और उसके बाद जिला पंचायत चेयरमैन उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ खेमेबंदी और अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चल रही रस्साकशी के चलते ऐसा नहीं हो सका। मई माह में हुई जिला पंचायत की बोर्ड बैठक से उम्मीद थी। लेकिन मात्र 20 मिनट चली बैठक की खानापूर्ति के दौरान किसी ने जिला योजना में रुचि तक नहीं दिखाई। जबकि जिले के विकास एवं तमाम सरकारी विभागों के माध्यम से क्रियान्वित होने वाली योजनाओं का भविष्य जिला योजना पर टिका है।
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विशेष रूप से विकास कार्यों को भारी भरकम बजट देने वाली केंद्र सरकार की स्कीमें इस पर निर्भर करती हैं। बताते चलें कि इन योजनाओं में केंद्र से 60 फीसदी तो राज्य से 40 फीसदी बजट मिलता है। लेकिन अनुमोदन न मिलने के चक्कर में सरकार लाचार है और बजट तक जारी नहीं कर पा रही है। इससे जिले के विकास की भी रफ्तार थम गई है।
प्रदेश में अब तक 60 जिलों में जिला योजनाओं को अनुमोदन मिल चुका है। शासन स्तर से इनके लिए बजट भी भेजा जा चुका है। इससे शेष जिलों को पूरा बजट मिलने पर खतरा मंडरा रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि अनुमोदन वाले जिलों ने और पैसा मांग लिया या फिर जिला योजना मद का पैसा किसी अन्य मद में लगा दिया तो शेष बचे जिलों के बजट में कटौती होनी तय है।
बताते चलें कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी 329.12 करोड़ रुपये के प्रस्तावित बजट के सापेक्ष मात्र सवा अरब रुपया ही मिल सका था। करीब आधा दर्जन विभाग तो पूरे वित्तीय वर्ष में एक धेले को भी तरसते रह गए थे।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खेमेबंदी अंतिम दौर में पहुंचती दिख रही है। रविवार रात जन्मदिन पार्टी के बाद काफी संख्या में सदस्य सैर करने चले गए हैं। अब वह किस खेमे की ओर से हैं, यह नहीं कहा जा सकता। हां, यह सही है कि काफी संख्या में सदस्य घर से इस पार्टी में शामिल होने की कहकर निकले और फिर घूमने चले गए।
इस सैर का 24 जून को प्रस्तावित जिला पंचायत बोर्ड की जिला योजना संबंधी बैठक पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। अगर यह सदस्य अध्यक्ष के पक्ष में गए हैं तो बैठक सफल होगी। अन्यथा बैठक से पहले यह सदस्य कोई बड़ा धमाका कर सकते हैं।
अध्यक्ष विरोधी खेमे का प्रयास है कि 24 जून की बैठक से पहले ही अविश्वास प्रस्ताव पर काम पूरा कर लिया जाए। हालांकि कोई सदस्य खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। मगर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।
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वर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ विपक्षियों की खेमेबंदी चल रही है, ऐसे में जल्द कोई निर्णय आ सकता है। इस प्रकरण का पूरा असर 334.76 करोड़ की जिला योजना के अनुमोदन पर पड़ने की आशंका है। अब सभी की निगाह 24 जून को जिला पंचायत के पंत सभागार में होने जा रही बोर्ड बैठक पर टिकी है।
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नियमानुसार इस वित्तीय वर्ष के लिए जिला योजना का अनुमोदन 17 जनवरी 2017 तक हो जाना चाहिए था। लेकिन पहले विधानसभा चुनाव आचार संहिता और उसके बाद जिला पंचायत चेयरमैन उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ खेमेबंदी और अविश्वास प्रस्ताव को लेकर चल रही रस्साकशी के चलते ऐसा नहीं हो सका। मई माह में हुई जिला पंचायत की बोर्ड बैठक से उम्मीद थी। लेकिन मात्र 20 मिनट चली बैठक की खानापूर्ति के दौरान किसी ने जिला योजना में रुचि तक नहीं दिखाई। जबकि जिले के विकास एवं तमाम सरकारी विभागों के माध्यम से क्रियान्वित होने वाली योजनाओं का भविष्य जिला योजना पर टिका है।
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विशेष रूप से विकास कार्यों को भारी भरकम बजट देने वाली केंद्र सरकार की स्कीमें इस पर निर्भर करती हैं। बताते चलें कि इन योजनाओं में केंद्र से 60 फीसदी तो राज्य से 40 फीसदी बजट मिलता है। लेकिन अनुमोदन न मिलने के चक्कर में सरकार लाचार है और बजट तक जारी नहीं कर पा रही है। इससे जिले के विकास की भी रफ्तार थम गई है।
प्रदेश में अब तक 60 जिलों में जिला योजनाओं को अनुमोदन मिल चुका है। शासन स्तर से इनके लिए बजट भी भेजा जा चुका है। इससे शेष जिलों को पूरा बजट मिलने पर खतरा मंडरा रहा है। जानकारों के मुताबिक यदि अनुमोदन वाले जिलों ने और पैसा मांग लिया या फिर जिला योजना मद का पैसा किसी अन्य मद में लगा दिया तो शेष बचे जिलों के बजट में कटौती होनी तय है।
बताते चलें कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी 329.12 करोड़ रुपये के प्रस्तावित बजट के सापेक्ष मात्र सवा अरब रुपया ही मिल सका था। करीब आधा दर्जन विभाग तो पूरे वित्तीय वर्ष में एक धेले को भी तरसते रह गए थे।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खेमेबंदी अंतिम दौर में पहुंचती दिख रही है। रविवार रात जन्मदिन पार्टी के बाद काफी संख्या में सदस्य सैर करने चले गए हैं। अब वह किस खेमे की ओर से हैं, यह नहीं कहा जा सकता। हां, यह सही है कि काफी संख्या में सदस्य घर से इस पार्टी में शामिल होने की कहकर निकले और फिर घूमने चले गए।
इस सैर का 24 जून को प्रस्तावित जिला पंचायत बोर्ड की जिला योजना संबंधी बैठक पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। अगर यह सदस्य अध्यक्ष के पक्ष में गए हैं तो बैठक सफल होगी। अन्यथा बैठक से पहले यह सदस्य कोई बड़ा धमाका कर सकते हैं।
अध्यक्ष विरोधी खेमे का प्रयास है कि 24 जून की बैठक से पहले ही अविश्वास प्रस्ताव पर काम पूरा कर लिया जाए। हालांकि कोई सदस्य खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। मगर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।