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पहली बार अलीगढ़ में बच्चे की दुर्लभ बीमारी का चला पता, शरीर में बनता था तेजाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Thu, 13 Dec 2018 08:05 PM IST
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डॉक्टर (सांकेतिक तस्वीर)
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पहली बार अलीगढ़ में 10 वर्षीय एक बच्चे को ऐसी दुर्लभ बीमारी का पता लगाया गया है जो दो लाख बच्चों में से किसी एक को होती है। इस बीमारी में शरीर में लगातार
तेजाब बनता रहता है। बीमारी का पता लगने के बाद दवाओं से उपचार किया जा रहा है। जल्द ही बच्चे की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।
बच्चे में दुर्लभ बीमारी का पता लगाने वाले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि बच्चों में हाथ पैरों के कड़ेपन और मंदबुद्धि को सेरेब्रल पाल्सी मान लिया जाता है। जिससे डॉक्टर और मरीज निराश हो जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि प्रत्येक मामले में ऐसा नहीं होता है। हाथपैरों में कड़ेपन और मंदबुद्धिता के और भी कई कारण होते हैं। जैसे दिमाग की कोशिकाओं में होने वाली विभिन्न रासायनिक क्रियाओं में कोई कमी का होना, जिन्हें न्यूरो मेटाबोलिक डिसऑर्डर कहते हैं।
डॉ. अनूप कुमार ने पहली बार अलीगढ़ में एक बच्चे में ऐसी ही एक बीमारी का पता लगाया है, जिसका नाम आइसोवेलेरिक एसिडीमिया है। वह कहते हैं कि यह दुर्लभ बीमारी दो लाख लोगों में से एक से कम को होती है। इस बीमारी में लगातार शरीर में एसिड बनता रहता है जो हाथ पैरों में कड़ापन, दिमागी कमजोरी एवं बेहोशी आदि लक्षणों के लिए जिम्मेदार होता है।
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ऐसे सही करते हैं इस बीमारी को डॉ. अनूप कुमार कहते हैं कि भोजन में प्रोटीन की मात्रा कम करके एवं अन्य दवाओं का प्रयोग करके इस बीमारी के असर को बहुत कम किया जा सकता है। जिससे कि मरीज में सामान्य जीवन जीने की आशा बढ़ जाती है। बच्चे के उपचार में डॉ. भरत कुमार वार्ष्णेय, डॉ. रश्मि रानी एवं ताहिर हुसैन का सहयोग रहा।
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तेजाब बनता रहता है। बीमारी का पता लगने के बाद दवाओं से उपचार किया जा रहा है। जल्द ही बच्चे की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।
बच्चे में दुर्लभ बीमारी का पता लगाने वाले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि बच्चों में हाथ पैरों के कड़ेपन और मंदबुद्धि को सेरेब्रल पाल्सी मान लिया जाता है। जिससे डॉक्टर और मरीज निराश हो जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि प्रत्येक मामले में ऐसा नहीं होता है। हाथपैरों में कड़ेपन और मंदबुद्धिता के और भी कई कारण होते हैं। जैसे दिमाग की कोशिकाओं में होने वाली विभिन्न रासायनिक क्रियाओं में कोई कमी का होना, जिन्हें न्यूरो मेटाबोलिक डिसऑर्डर कहते हैं।
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डॉ. अनूप कुमार ने पहली बार अलीगढ़ में एक बच्चे में ऐसी ही एक बीमारी का पता लगाया है, जिसका नाम आइसोवेलेरिक एसिडीमिया है। वह कहते हैं कि यह दुर्लभ बीमारी दो लाख लोगों में से एक से कम को होती है। इस बीमारी में लगातार शरीर में एसिड बनता रहता है जो हाथ पैरों में कड़ापन, दिमागी कमजोरी एवं बेहोशी आदि लक्षणों के लिए जिम्मेदार होता है।
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ऐसे सही करते हैं इस बीमारी को डॉ. अनूप कुमार कहते हैं कि भोजन में प्रोटीन की मात्रा कम करके एवं अन्य दवाओं का प्रयोग करके इस बीमारी के असर को बहुत कम किया जा सकता है। जिससे कि मरीज में सामान्य जीवन जीने की आशा बढ़ जाती है। बच्चे के उपचार में डॉ. भरत कुमार वार्ष्णेय, डॉ. रश्मि रानी एवं ताहिर हुसैन का सहयोग रहा।