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70 साल में पहली बार ‘ठाकुर जी’ बाहर नहीं गए
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जन्माष्टमी के लिए दुकानों पर सजे ठाकुर जी के विग्रह।
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
पूरे उत्तर भारत में अलीगढ़ में ही ठाकुर जी या लड्डू गोपाल की छोटी प्रतिमाएं बनती हैं। यहां से ये मूर्तियां पूरे भारत में जाती है। आजादी के बाद ये पहला मौका है, जब नाम मात्र को ठाकुर जी शहर से बाहर गए हों। वरना साधारण दिनों में टनों के हिसाब से ये प्रतिमाएं पूरे देश के साथ विदेश तक जाती हैं।
वर्तमान में देश के अधिकांश मंदिरों के बंद होने से मांग कम हुई है। बनारस, उज्जैन, प्रयागराज, मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन पर्वत आदि धार्मिक स्थलों के साथ ही सभी प्रमुख मंदिर बंद होने से आसपास की दुकानें भी बंद हैं। जिससे मांग कम रही है। इससे पहले श्री कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर नवरात्रि तक देवी देवताओं की प्रतिमाओं की सर्वाधिक मांग रहती थी। इस बार श्राद्ध पक्ष के बाद एक महीने का अधिमास है, इसलिए अब मूर्ति निर्माताओं, थोक व्यापारियों को गणेश चतुर्थी और नवरात्रि से कुछ उम्मीद बंधी है।
खैर, ठाकुर जी के साथ भी नंबरों का फेर है। जीरो से 6 नंबर तक के साइज के ठाकुर की सर्वाधिक मांग रहती है। इसके बाद 7 से 10 तक कम लोग लेते हैं। अधिकांश दुकानों में सभी साइज के ठाकुर जी पीतल में उपलब्ध होते हैं। कुछ दुकानों में अष्टधातु के विग्रह भी होते हैं। लेकिन पीतल की प्रतिमाएं चमकदार होने से इनको लोग ज्यादा पसंद करते हैं। इन प्रतिमाओं के साथ ही पूरा साज शृंगार भी नंबरों पर आधारित साइज के अनुसार बनता है, जो इन प्रतिमाओं के साथ ही जाता है। इस बार उसकी मांग भी बहुत कम है। थोक व्यापारियों ने बताया कि अलीगढ़ से टनों के हिसाब से ठाकुर जी के विग्रह पूरे देश में पहुंचते हैं।
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मथुरा वृंदावन, बरसाना-गोकुल, बनारस, उज्जैन, हरिद्वार से लेकर अन्य सभी तीर्थ स्थल बंद है। लोग घरों में है। इसलिए न दुकानें खुल रही हैं न मूर्ति की मांग है। ये पहला ऐसा मौका है जब जन्माष्टमी के त्योहार में थोक बाजार में सन्नाटा हो।
- विपिन बिहारी गुप्ता। अध्यक्ष अलीगढ़ स्टैच्यू सप्लायर एसोसिएशन।
मेरी याददाश्त में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि जब इन दिनों किसी मूर्ति कारोबारी को दिन में फुर्सत मिलती हो। अबकी बार मांग बिल्कुल स्थानीय है, बाहर की कोई मांग नहीं है। जिससे पूरा कारोबार प्रभावित है।
- अशोक यादव, यादव मेटल्स। संरक्षक स्टैच्यू सप्लायर एसोसिएशन।
कोरोना के कारण सब कुछ बंद है। दर्शन भी बंद है। ऐसे में केवल घरों की पूजा के वास्ते ठाकुर जी स्थानीय स्तर पर लोग ले रहे हैं। बाहर का या देश विदेश का आर्डर नहीं है। पूरा कारोबार प्रभावित हुआ है। अब आने वाले कुछ महीनों से उम्मीद है।
- सुशील मित्तल, ब्रास कलेक्शन।
मांग बहुत कम है। अब हमें अधिमास के बाद नवरात्रि में बेहतर कारोबार की उम्मीद है। बहुत कम मात्रा में ठाकुर जी के विग्रह बाहर गए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। अब हमें आने वाले महीनों की तैयारी कर रहे हैं।
-मोहित अग्रवाल, स्मार्ट मूर्ति।
मैं वृंदावन से हूं, वहां सारे मंदिर बंद है, इसलिए इस बार ठाकुर जी के विग्रह की मांग कम है। वरना ये सीजन दुकानों पर सर्वाधिक भीड़ रहती थी। इस बार ऐसा नहीं है।
-राजा सिघांरिया, व्यापारी।
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पूरे उत्तर भारत में अलीगढ़ में ही ठाकुर जी या लड्डू गोपाल की छोटी प्रतिमाएं बनती हैं। यहां से ये मूर्तियां पूरे भारत में जाती है। आजादी के बाद ये पहला मौका है, जब नाम मात्र को ठाकुर जी शहर से बाहर गए हों। वरना साधारण दिनों में टनों के हिसाब से ये प्रतिमाएं पूरे देश के साथ विदेश तक जाती हैं।
वर्तमान में देश के अधिकांश मंदिरों के बंद होने से मांग कम हुई है। बनारस, उज्जैन, प्रयागराज, मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन पर्वत आदि धार्मिक स्थलों के साथ ही सभी प्रमुख मंदिर बंद होने से आसपास की दुकानें भी बंद हैं। जिससे मांग कम रही है। इससे पहले श्री कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर नवरात्रि तक देवी देवताओं की प्रतिमाओं की सर्वाधिक मांग रहती थी। इस बार श्राद्ध पक्ष के बाद एक महीने का अधिमास है, इसलिए अब मूर्ति निर्माताओं, थोक व्यापारियों को गणेश चतुर्थी और नवरात्रि से कुछ उम्मीद बंधी है।
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खैर, ठाकुर जी के साथ भी नंबरों का फेर है। जीरो से 6 नंबर तक के साइज के ठाकुर की सर्वाधिक मांग रहती है। इसके बाद 7 से 10 तक कम लोग लेते हैं। अधिकांश दुकानों में सभी साइज के ठाकुर जी पीतल में उपलब्ध होते हैं। कुछ दुकानों में अष्टधातु के विग्रह भी होते हैं। लेकिन पीतल की प्रतिमाएं चमकदार होने से इनको लोग ज्यादा पसंद करते हैं। इन प्रतिमाओं के साथ ही पूरा साज शृंगार भी नंबरों पर आधारित साइज के अनुसार बनता है, जो इन प्रतिमाओं के साथ ही जाता है। इस बार उसकी मांग भी बहुत कम है। थोक व्यापारियों ने बताया कि अलीगढ़ से टनों के हिसाब से ठाकुर जी के विग्रह पूरे देश में पहुंचते हैं।
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मथुरा वृंदावन, बरसाना-गोकुल, बनारस, उज्जैन, हरिद्वार से लेकर अन्य सभी तीर्थ स्थल बंद है। लोग घरों में है। इसलिए न दुकानें खुल रही हैं न मूर्ति की मांग है। ये पहला ऐसा मौका है जब जन्माष्टमी के त्योहार में थोक बाजार में सन्नाटा हो।
- विपिन बिहारी गुप्ता। अध्यक्ष अलीगढ़ स्टैच्यू सप्लायर एसोसिएशन।
मेरी याददाश्त में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि जब इन दिनों किसी मूर्ति कारोबारी को दिन में फुर्सत मिलती हो। अबकी बार मांग बिल्कुल स्थानीय है, बाहर की कोई मांग नहीं है। जिससे पूरा कारोबार प्रभावित है।
- अशोक यादव, यादव मेटल्स। संरक्षक स्टैच्यू सप्लायर एसोसिएशन।
कोरोना के कारण सब कुछ बंद है। दर्शन भी बंद है। ऐसे में केवल घरों की पूजा के वास्ते ठाकुर जी स्थानीय स्तर पर लोग ले रहे हैं। बाहर का या देश विदेश का आर्डर नहीं है। पूरा कारोबार प्रभावित हुआ है। अब आने वाले कुछ महीनों से उम्मीद है।
- सुशील मित्तल, ब्रास कलेक्शन।
मांग बहुत कम है। अब हमें अधिमास के बाद नवरात्रि में बेहतर कारोबार की उम्मीद है। बहुत कम मात्रा में ठाकुर जी के विग्रह बाहर गए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। अब हमें आने वाले महीनों की तैयारी कर रहे हैं।
-मोहित अग्रवाल, स्मार्ट मूर्ति।
मैं वृंदावन से हूं, वहां सारे मंदिर बंद है, इसलिए इस बार ठाकुर जी के विग्रह की मांग कम है। वरना ये सीजन दुकानों पर सर्वाधिक भीड़ रहती थी। इस बार ऐसा नहीं है।
-राजा सिघांरिया, व्यापारी।