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Aligarh News: पूर्व प्रधान दमुआका अरविंद सहित पांच आरोपी बरी, 7 साल पहले युवक की हुई थी हत्या
Sat, 11 Feb 2023 12:35 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Feb 2023 12:35 AM IST
सार
घटना 29 फरवरी 2016 की रात की है। वादी मुकदमा राजकुमार की ओर से पिसावा में मुकदमा दर्ज कराया गया कि गांव दमुआका में उनके भतीजे राहुल की घर के दरवाजे पर नामजदों द्वारा फायरिंग कर हत्या कर दी गई। इस हत्या में तत्कालीन प्रधान अरविंद सिंह, बॉबी, चेतन, लोकेश व झर्रन पर आरोप लगा।
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अदालत
- फोटो : amar ujala
विस्तार
पिसावा क्षेत्र के गांव दमुआका के चर्चित पूर्व प्रधान अरविंद सिंह सहित पांच आरोपी को गांव के अनुसूचित युवक की हत्या में शुक्रवार को बरी कर दिए गए। यह फैसला कमजोर साक्ष्य और गवाहों के साक्ष्यों से मिलान न होने के आधार पर एडीजे विशेष एससीएसटी न्यायालय ने सुनाया है। इस हत्या में चुनावी रंजिश में हत्या का आरोप लगा था। वर्तमान में अरविंद महाराजगंज जेल में है और अब यहां से रिहाई आदेश पहुंचने पर रिहाई होगी।
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घटना 29 फरवरी 2016 की रात की है। वादी मुकदमा राजकुमार की ओर से पिसावा में मुकदमा दर्ज कराया गया कि गांव दमुआका में उनके भतीजे राहुल की घर के दरवाजे पर नामजदों द्वारा फायरिंग कर हत्या कर दी गई। इस हत्या में तत्कालीन प्रधान अरविंद सिंह, बॉबी, चेतन, लोकेश व झर्रन पर आरोप लगा। मुकदमे की विवेचना पहले सीओ खैर स्तर से की गई। बाद में तमाम कानूनी पेचीदगियों के चलते मुकदमे की विवेचना हाथरस में सादाबाद सीओ को मिली। तब जाकर चार्जशीट की प्रक्रिया हुई। इस दौरान अरविंद सिंह की ओर से मुकदमा झूठा लिखे जाने के तमाम तर्क अधिकारियों को दिए गए। मगर बाद में न्यायालय में हाजिर होकर जेल गए। तब से अरविंद सिंह जेल में हैं। बाद प्रधानी का जिम्मा उनकी पत्नी पर रहा।
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बचाव पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रामबाबू शर्मा व नीरज चौहान के अनुसार मुकदमे में सत्र परीक्षण के दौरान दो ऐसे पहलू आए, जिन पर मुकदमे के गवाह साक्ष्यों से मिलान नहीं कर सके। मुकदमे में आरोप था कि प्रधानी के चुनाव में वोट न देने के कारण राहुल की हत्या की गई, जबकि न्यायालय में यह साबित हुआ कि मृत राहुल घटना के समय 17 वर्ष का था और चुनाव में उसके पास वोट का अधिकार नहीं था। इसलिए हत्या का यह आधार अदालत में साबित नहीं हुआ।
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दूसरा बचाव पक्ष के गवाहों से साबित हुआ कि पहले इनके घर किसी वजह से पुलिस गई थी। बाद में यह घटना हुई। इन्हीं तमाम आधारों पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। बता दें कि अरविंद सिंह अपने क्षेत्र के चर्चित दबंग लोगों में शामिल हैं और उन पर और भी अपराध दर्ज हैं। पूर्व में अरविंद को प्रशासनिक आधार पर अलीगढ़ से मथुरा और अब मथुरा से महाराजगंज जेल रखा गया। इस मामले में अधिवक्ता राजीव सिंह ने भी पैरवी की है। अधिवक्ता द्वय ने कहा कि अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकारते हुए कमजोर साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया है।
मामले में हमारी ओर से मजबूत पैरवी व साक्ष्य पेश किए गए। अब फैसले का अध्ययन करते हुए इसके खिलाफ अपील की जाएगी।-महेंद्रपाल कुमार, विशेष लोक अभियोजक