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बेमौसम बारिश-ओलावृष्टि: फसल बर्बाद, कर्ज बरकरार, मौसम की मार से कराह रहे किसान

Thu, 02 Apr 2026 12:11 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 02 Apr 2026 12:11 PM IST
सार

अकराबाद क्षेत्र के गांव दभी के किसान रक्षपाल सिंह ने बताया कि इस बार सोचा था कि बेटी की शादी अच्छे से कर देंगे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि घर का खर्च चलाना मुश्किल है।

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Farmers upset due to unseasonal rain and hailstorm
ट्रैक्टर से गेंहू लेकर आते किसान, धनीपुर मंडी में सूखता बारिश से भीगा गेहूं - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। धनीपुर स्थित अनाज मंडी पहुंचे किसानों के चेहरों पर फसल खराब होने का दर्द साफ झलक रहा है, लेकिन उनकी चिंता सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। किसानों का कहना है कि इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद में उन्होंने बैंक से फसली ऋण लेकर खाद, बीज और सिंचाई पर खर्च किया था, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि न तो फसल सही बची और न ही कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नजर आ रहा है।

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हाथरस के पंचाै दरियापुर से गेहूं लेकर पहुंचे किसान कुलदीप सिंह व प्रमोद कुमार ने बताया कि इस बार 25 बीघा में गेहूं की खेती की थी। पहले बारिश ने फसल खराब कर दी और पैदावार आधी रह गई। अब मंडी में कोई पूछ नहीं रहा... कर्ज कैसे देंगे, यही चिंता खा रही है।
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सिकंदरपुर माछुआ के किसान प्रेम कुमार का कहना था। बारिश से सरसों व गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह भीग गई, जिससे दाने काले पड़ने लगे हैं और गुणवत्ता भी खराब हो गई है। तेज हवाओं व बारिश के कारण फसल जमीन पर गिर गई, जिससे कटाई में भी दिक्कतें आ रही हैं। प्रति बीघा 40 से 50 किलोग्राम तक फसल का उत्पादन प्रभावित हुआ है। बोले, इस बार अच्छी फसल की उम्मीद में बैंक से कर्ज लिया था। खाद-बीज सब उधार में डाला, लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया। अब समझ नहीं आ रहा कि बैंक का पैसा कैसे चुकाएंगे। इमलानी से पहुंचे किसान प्रताप सिंह ने बताया कि मंडी में कोई सही दाम नहीं दे रहा। घर में बच्चों की फीस देनी है, ऊपर से कर्ज का दबाव है, रातों की नींद उड़ गई है।
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बेटी की शादी करनी थी.. अब तो घर चलाना भी होगा मुश्किल
अकराबाद क्षेत्र के गांव दभी के किसान रक्षपाल सिंह ने बताया कि इस बार सोचा था कि बेटी की शादी अच्छे से कर देंगे, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि घर का खर्च चलाना मुश्किल है। फसल बर्बाद हो गई, कर्ज सिर पर है। क्या करें, कुछ समझ नहीं आ रहा। हर साल मौसम कुछ न कुछ नुकसान कर देता है, लेकिन इस बार तो पूरी तरह टूट गए हैं। बैंक वाले भी पैसा मांग रहे हैं। मजबूरी में गेहूं सस्ती कीमत पर बेचना पड़ रहा है।

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