सावधान रहें: किसान सम्मान निधि योजना के नाम पर किसानों से हो रही ठगी, साइबर ठग भेज रहे मोबाइल पर फर्जी लिंक
योजना के लिए जो पात्र हैं सिर्फ वे ही इससे जुड़ सकते हैं। इसलिए किसी की बातों में आने से बचें। व्हाट्सएप पर आए योजना से जुड़े किसी भी फर्जी लिंक पर क्लिक न करें। यह साइबर फ्रॉड हो सकता है।
विस्तार
यदि आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए पात्रता की श्रेणी में नहीं आते हैं तो इस योजना में अपना नाम गलत तरीके से शामिल कराने के नाम पर ठगी का शिकार हो सकते हैं।
कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि योजना के लिए जो पात्र हैं सिर्फ वे ही इससे जुड़ सकते हैं। इसलिए किसी की बातों में आने से बचें। व्हाट्सएप पर आए योजना से जुड़े किसी भी फर्जी लिंक पर क्लिक न करें। यह साइबर फ्रॉड हो सकता है।
केस : एक
अतरौली के विधिपुर गांव के किसान सुरेश के मोबाइल फोन पर पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ा एक लिंक आया। उन्होंने जैसे ही लिंक खोला, उनके बैंक खाते से रुपये पार हो गए। अब वे थाने, चौकी के चक्कर काट रहे हैं।
केस : दो
गभाना के कलुवा गांव के विजयपाल के मोबाइल फोन पर भी सम्मान निधि योजना से जुड़ा लिंक आया। उन्होंने जैसे ही लिंक को खोला तो मोबाइल में एक एप डाउनलोड हो गया। कुछ देर बाद ही उनके खाते से पैसे कटने के संदेश आने लगे। तीन बार में खाते से 68 हजार रुपये पार हो गए। अब वे बैंक व थाने के चक्कर लगा रहे हैं।
ऐसे हो रही ठगी
लोगों के मोबाइल पर पीएम किसान सम्मान निधि योजना के नाम से एक फर्जी लिंक शेयर किया जा रहा है। इस लिंक पर क्लिक करते ही एक एप डाउनलोड हो जाता है। इस एप के डाउनलोड होते ही मोबाइल हैक हो जाता है। इसके बाद साइबर ठग बैंक खाते आदि की जानकारी जुटा लेते हैं और खाते से रकम पार कर देते हैं।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
- पासवर्ड या सोशल सिक्योरिटी नंबर किसी के साथ शेयर न करें।
- किसी अनजान को वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) न बताएं ।
- अपनी व्यक्तिगत या फाइनेंशियल जानकारी किसी से साझा न करें।
- कंपनियों से जुड़े संदेश, ई-मेल या व्हाट्सएप के जरिये मिले लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर जानकारी दें।
मोबाइल फोन पर आने वाले योजना से जुड़े किसी भी लिंक को न खोलें। फोन कॉल पर किसी को भी बैंक खाते से जुड़ी जानकारी साझा न करें। किसी तरह का शक हो तो कृषि विभाग के कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों की मदद लें।- यशराज सिंह, उप निदेशक कृषि