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फरीदपुर गांव में गायब हुए 350 मतदाताओं की जांच शुरू
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Wed, 15 Feb 2017 01:13 AM IST
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313 प्रत्याशियों पर तीन साल के लिए लगा प्रतिबंध
- फोटो : File Photo
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कोल विधानसभा क्षेत्र के गांव फरीदपुर में वोटर लिस्ट में विलोपित दिखाए गए 350 मतदाताओं के मामले की जांच होगी। कमिश्नर ने डीएम को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कोल विधानसभा क्षेत्र के गांव फरीदपुर में मनमाने ढंग से मतदाता सूची तैयार करने का खामियाजा 350 लोगों को भुगतना पड़ा था। इस गांव में 1277 मतदाता हैं जो प्राथमिक विद्यालय फरीदपुर में वोट डालते आए हैं। 11 फरवरी को जब मतदाता वोट डालने पहुंचे तो उनमें से 350 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब थे। इन सबके नाम के आगे विलोपित लिखा गया था। इनमें ज्यादातर दलित एवं मुस्लिम मतदाता थे। गुस्साए मतदाताओं ने सेक्टर मजिस्ट्रेट को जानकारी देते हुए हंगामा भी मचाया, लेकिन कुछ न हो सका। इस मामले में अलीगढ़ मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने डीएम को जांच के आदेश दिए हैं। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बीएलए कहां थे.........
अलीगढ़। गांव फरीदपुर में 350 मतदाताओं को विलोपित दिखाने के मामले में जहां प्रशासन एवं बीएलओ की कार्यप्रणाली पर अंगुलियां उठ रही हैं। वहीं दूसरी ओर चुनाव के दौरान एक-एक वोट का हिसाब रखने वाले प्रत्याशियों द्वारा नियुक्त बूथ लेबल असिस्टेंट यानी कि बीएलए भी मतदाताओं के निशाने पर हैं। हर किसी के मन में सवाल उठ रहा है कि यदि सरकारी तंत्र से गलती हुई तो प्रत्याशियों के बीएलए क्या कर रहे थे। प्रशासन ने रिटर्निंग अफसर के माध्यम से सभी प्रत्याशियों के पास मतदाता सूची की सीडी भेजी है। ऐसे में सवाल ये कि इन लोगों ने सूची का अध्ययन क्यों नहीं किया। पता यह भी चला है कि कई प्रत्याशियों ने तो प्रशासन की तमाम अपीलों के बाद भी ऐन मौके तक अपने बीएलए नियुक्त नहीं किए।
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अभियान-अपील बेअसर
अलीगढ़। कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रशासन ने स्वीप समेत मतदाता जागरूकता के तमाम अभियान चलाए। रैलियां निकाली गईं और गांव-गांव में जाकर मतदाताओं को जागरूक किया। बावजूद इसके फरीदपुर के ग्रामीण नहीं जागे, जब जागे तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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कोल विधानसभा क्षेत्र के गांव फरीदपुर में मनमाने ढंग से मतदाता सूची तैयार करने का खामियाजा 350 लोगों को भुगतना पड़ा था। इस गांव में 1277 मतदाता हैं जो प्राथमिक विद्यालय फरीदपुर में वोट डालते आए हैं। 11 फरवरी को जब मतदाता वोट डालने पहुंचे तो उनमें से 350 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब थे। इन सबके नाम के आगे विलोपित लिखा गया था। इनमें ज्यादातर दलित एवं मुस्लिम मतदाता थे। गुस्साए मतदाताओं ने सेक्टर मजिस्ट्रेट को जानकारी देते हुए हंगामा भी मचाया, लेकिन कुछ न हो सका। इस मामले में अलीगढ़ मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने डीएम को जांच के आदेश दिए हैं। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बीएलए कहां थे.........
अलीगढ़। गांव फरीदपुर में 350 मतदाताओं को विलोपित दिखाने के मामले में जहां प्रशासन एवं बीएलओ की कार्यप्रणाली पर अंगुलियां उठ रही हैं। वहीं दूसरी ओर चुनाव के दौरान एक-एक वोट का हिसाब रखने वाले प्रत्याशियों द्वारा नियुक्त बूथ लेबल असिस्टेंट यानी कि बीएलए भी मतदाताओं के निशाने पर हैं। हर किसी के मन में सवाल उठ रहा है कि यदि सरकारी तंत्र से गलती हुई तो प्रत्याशियों के बीएलए क्या कर रहे थे। प्रशासन ने रिटर्निंग अफसर के माध्यम से सभी प्रत्याशियों के पास मतदाता सूची की सीडी भेजी है। ऐसे में सवाल ये कि इन लोगों ने सूची का अध्ययन क्यों नहीं किया। पता यह भी चला है कि कई प्रत्याशियों ने तो प्रशासन की तमाम अपीलों के बाद भी ऐन मौके तक अपने बीएलए नियुक्त नहीं किए।
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अलीगढ़। कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रशासन ने स्वीप समेत मतदाता जागरूकता के तमाम अभियान चलाए। रैलियां निकाली गईं और गांव-गांव में जाकर मतदाताओं को जागरूक किया। बावजूद इसके फरीदपुर के ग्रामीण नहीं जागे, जब जागे तब तक बहुत देर हो चुकी थी।