यूपी: अस्पताल में गुस्साए परिजनों ने किया हंगामा, महिला डॉक्टर की पीपीई किट फाड़ी, गिरफ्तार
अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सोमवार शाम को मेडिकल स्टाफ पर हमला करने वाले मुख्य हमलावर और महिला डॉक्टर की पर्सनल प्रोटेक्शन किट फाड़ने वाले की पहचान कर ली गई है।
इस मामले में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कुलपति को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया है। साथ ही सुरक्षा की मांग की है। इस पूरे मुद्दे पर मंगलवार को आरडीए की एक जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाकर आगे की रणनीति तैयार की गई।
आरडीए की ओर से कहा गया है कि इस मामले में सीसीटीवी कैमरों की मदद से मुख्य हमलावर की पहचान कर ली गई है। आरडीए की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई है कि जबतक पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध न कराई जाए तबतक इमरजेंसी में मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर काम न करें।
हालांकि अन्य प्रकार की महत्वपूर्ण सेवाएं जारी रहेंगी। मालूम हो कि इमरजेंसी में बमुश्किल मरीज को भर्ती करने और फिर ऑक्सीजन व वेंटीलेटर न मिलने पर सोमवार देर शाम तीमारदारों ने मेडिकल स्टाफ पर हमला कर दिया था।
परिजनों ने कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर के सिर में लोहे की रॉड से हमला किया था। इसके साथ ही अन्य कर्मचारियों को ऑक्सिजन सिलिंडर से मारने की भी कोशिश की थी। उन्होंने एक महिला डॉक्टर की पीपीई किट भी फाड़ दी थी।
सूचना पर इंस्पेक्टर सीओ तृतीय अनिल समानिया, सिविल लाइंस प्रमेंद्र कुमार पुलिस बल व क्यूआरटी के साथ मौके पर पहुंचे थे, लेकिन तब तक हमलावर भाग चुके थे।
इसके विरोध में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने इमरजेंसी में काम ठप कर दिया और हड़ताल पर चले गए। बाद में पुलिस द्वारा आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर रात में दो नामजद व उनके दो साथियों को गिरफ्तार किया, जिसके बाद डॉक्टर काम पर लौटे।
खाली ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने का आरोप
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने बताया कि जब वेंटीलेटर न होने की बात कही गई थी तो वहां ऑक्सीजन का सिलिंडर लगाने को कहा गया था। ऑक्सीजन सिलिंडर लगाने में ही तीन घंटे का वक्त लगा दिया गया था।
उस पर भी हालत बिगड़ी तो पता चला कि सिलिंडर में ऑक्सीजन ही नहीं है। इसी बात पर विवाद शुरू हुआ था। विवाद व हंगामा शुरू होने के दौरान महिला की मौत हो गई तो तीमारदार और ज्यादा बिफर गए।