फर्जी डॉक्टर के बाद फर्जी अस्पताल: तीन साल में 300 अस्पतालों का पंजीयन हुआ कम, पर अस्पतालों की भरमार
गांवों में तो स्थिति और भयावह है। छोटे-छोटे कमरों में डॉक्टर का बोर्ड लगा होता है। बिना ट्रेनिंग वाले लोग इंजेक्शन लगाते हैं, ऑपरेशन करते हैं। गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड बिना योग्यता वाले करते हैं, जिससे बच्चे और मां दोनों की जान खतरे में पड़ती है।
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अलीगढ़ जिले में फर्जी चिकित्सकों और फर्जी अस्पतालों का जाल बिछा हुआ है। पिछले तीन साल में लगभग 300 अस्पतालों का पंजीयन कम हुआ है। बावजूद शहर से लेकर गांव तक बिना पंजीकरण के अस्पताल, लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे, उसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं। मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नाम मात्र की है। हाल में ही एडी हेल्थ डॉ. मोहन झा ने अतरौली में ध्रुव हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था। वहां न तो कोई अभिलेख मिला और न ही डॉक्टर। ऐसे में उन्होंने नोटिस थमा दिया था। लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई और अस्पताल धड़ल्ले से संचालित है।
शहर के एटा चुंगी, नगला पटवारी, क्वार्सी बाईपास, कमालपुर रोड, क्वार्सी बाईपास जमालपुर रोड, अपनूशहर रोड, अतरौली, छर्रा, गभाना, जवां और अकराबाद जैसे इलाकों में फर्जी अस्पतालों का पूरा नेटवर्क फैला हुआ है। यहां अयोग्य लोग खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज करते हैं। बिना डिग्री वाले लोग अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे कर रहे हैं। झोलाछाप मरीजों का उपचार का उन्हें दवाएं देते हैं और फीस वसूलते हैं। कई बार तो मरीजों की हालत बिगड़ जाती है, लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। विभाग के पिछले तीन साल के अस्पताल पंजीकरण के आंकड़ों पर गौर करें तो खेल का साफ पता चलता है। 2023-24 में स्वास्थ्य विभाग ने 514 अस्पतालों का पंजीकरण हुआ था। मगर 2024-25 में 354 अस्पतालों को पंजीकृत किया गया। यानी 160 अस्पतालों को पंजीकरण नहीं मिला।
अब सवाल उठता है कि इनका पंजीकरण क्यों नहीं? अगर यह वैध नहीं थे तो पहले कैसे हुआ ? वर्तमान में यह अस्पताल संचालित हैं या नहीं? अब अगर 2024-25 की बात करें तो अप्रैल से अक्तूबर तक लगभग 230 अस्पतालों का पंजीयन किया जा चुका है। इन आंकड़े के अनुसार पिछले साल से 174 और 2023-24 से करीब 284 अस्पतालों का पंजीकरण कम हुआ है। अब अगर जिले की बात करें तो हजारों की संख्या में अस्पताल, क्लीनिक और लैब लाइसेंस के चल रहे हैं। इनमें से अधिकतर पंजीकृत नहीं है। विभाग की टीम कभी-कभी छापा मारती है, लेकिन जुर्माना लेकर छोड़ देती है। फर्जी डॉक्टर फिर से धंधा शुरू कर देते हैं। अगर सील किया तो नाम व जगह बदल कर स्वास्थ्य विभाग के गठजोड़ से काम शुरू कर देते हैं।
मानक पूरे करने वाले अस्पतालों, क्लीनिक, लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटर को नियमानुसार पंजीकरण व नवीनीकरण प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। जो मानक पर पूरे नहीं है, उन्हें मानक पूरे करने का समय दिया जा रहा है। बिना पंजीकरण के चलने वाले अस्पतालों, लैब और क्लीनिक पर विभाग कार्रवाई करेगा। टीम गठित कर दी गई है।-डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के अस्पताल के निरीक्षण करने का शासनादेश है। अस्पतालों का निरीक्षण कर कमियां मिलने पर अस्पताल व चिकित्सक को नोटिस जारी कर सीएमओ को कार्रवाई का निर्देश दिया जाता है। अभी हाल में अतरौली के ध्रुव हॉस्पिटल को नोटिस दिया गया था। अस्पताल में प्रसव से लेकर आपरेशन आदि सभी की सुविधा है। मगर पंजीकरण का कागज नहीं मिला था।-डॉ. मोहन झा, एडी हेल्थ
ग्रामीण क्षेत्रों में हाल और बदतर
गांवों में तो स्थिति और भयावह है। छोटे-छोटे कमरों में डॉक्टर का बोर्ड लगा होता है। बिना ट्रेनिंग वाले लोग इंजेक्शन लगाते हैं, ऑपरेशन करते हैं। गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड बिना योग्यता वाले करते हैं, जिससे बच्चे और मां दोनों की जान खतरे में पड़ती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि परामर्श के साथ दवाएं भी उपलब्ध कराते हैं। कई बार मरीजों की तबीयत भी बिगड़ जाती है।
वर्ष-पंजीकृत अस्पतालों, लैब, नर्सिंग होम की संख्या
2021-22-668
2022-23-331
2023-24-514
2024-25-354
2025-26-230