अलीगढ़: एडीए में शामिल हो चुका खैर, फिर भी नक्शे पास करते चले गए ईओ, विभागीय जांच के निर्देश
खैर नगर पालिका क्षेत्र को 16 जनवरी 2025 की सार्वजनिक अधिसूचना के जरिये एडीए के विकास क्षेत्र में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद यहां भवन निर्माण और विकास संबंधी मानचित्रों की स्वीकृति का अधिकार एडीए के पास चला गया था। इसके बावजूद नगर पालिका स्तर से 41 मानचित्र स्वीकृत कर दिए गए।
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खैर नगर पालिका का अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) में विलय हो जाने के बाद भी भवनों के नक्शे पास करने का खेल चलता रहा। अधिकार क्षेत्र खत्म होने के बावजूद नगर पालिका से 41 भवनों के मानचित्र स्वीकृत कर दिए गए। जांच में नियमों की अनदेखी सामने आने के बाद नगर निकाय निदेशालय ने तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) निषाद मधुरमय को प्रथमदृष्टया दोषी माना है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। इन मानचित्रों की स्वीकृति से सरकारी राजस्व को करीब 1.14 करोड़ रुपये के नुकसान का भी उल्लेख जांच में किया गया है। इस मामले को लेकर ईओ निषाद मधुरमय से संपर्क किया तो उन्होंने अपना पक्ष नहीं दिया।
खैर नगर पालिका क्षेत्र को 16 जनवरी 2025 की सार्वजनिक अधिसूचना के जरिये एडीए के विकास क्षेत्र में शामिल कर लिया गया था। इसके बाद यहां भवन निर्माण और विकास संबंधी मानचित्रों की स्वीकृति का अधिकार एडीए के पास चला गया था। इसके बावजूद नगर पालिका स्तर से 41 मानचित्र स्वीकृत कर दिए गए। जांच में माना गया कि पालिका के पास इन मानचित्रों को स्वीकृत करने का अधिकार नहीं था।
मामले की शिकायत पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ ने शासन स्तर पर की थी। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने इसकी जांच कराई। तत्कालीन एडीए सचिव दीपाली भार्गव की जांच में मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि क्षेत्राधिकार समाप्त होने के बाद भी नगर पालिका ने मानचित्रों को स्वीकृति दी, जिससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान हुआ।
अधिकार नहीं था, फिर भी चलती रही स्वीकृति की प्रक्रिया
जांच में मानचित्रों की स्वीकृति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई। कुछ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर मानचित्रों को स्वीकृति देने की बात कही गई है। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन ईओ के साथ अवर अभियंता की भूमिका भी जांच के घेरे में आई। शिकायत में मानचित्र पास करने के बदले रिश्वत लिए जाने के आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि, रिश्वत के आरोपों की पुष्टि के लिए विभागीय जांच में तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट में मानचित्रों की स्वीकृति से सरकारी राजस्व को हुए नुकसान को गंभीरता से लिया गया है।
शासन ने मांगा जवाब, जांच अधिकारी नियुक्त
तत्कालीन एडीएम प्रशासन पंकज कुमार की संस्तुति के बाद जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। अब नगर निकाय निदेशालय के निदेशक अनुज कुमार झा ने तत्कालीन ईओ निषाद मधुरमय के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 और उत्तर प्रदेश पालिका (केंद्रीकृत) सेवा नियमावली, 1966 के तहत विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नगर निकाय निदेशालय के उप निदेशक को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच में मानचित्रों की स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की भी पड़ताल की जाएगी।