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निजीकरण के विरोध में जेल जाने को तैयार बिजली विभाग के कर्मचारी 

Tue, 06 Oct 2020 12:09 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Tue, 06 Oct 2020 12:09 AM IST
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Electricity department employees ready to go to jail against privatization
निजीकरण के विराेध में प्रदर्शन करते कर्मचारी - फोटो : neeraj
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के विरोध में जनपद के 200 से अधिक कर्मचारी जेल जाने को तैयार हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने सोमवार को कार्य बहिष्कार कर लाल डिग्गी स्थित कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इसी दौरान फार्म भरकर कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने जेल जाने की घोषणा की। 
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निजीकरण एवं बिजली संशोधन बिल 2020 के विरोध में बिजली विभाग के जिले भर के कर्मचारियों, अवर अभियंताओं एवं अभियंताओं ने कार्य बहिष्कार कर धरना दिया। मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कर्मचारी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपनी की तैयारी में है।
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बिजली संशोधन बिल 2020 जन विरोधी और कर्मचारी विरोधी है। यूनियन नेताओं की नजर लखनऊ में ऊर्जा मंत्री के साथ होने वाली बातचीत टिकी है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार निगम ने बताया कि अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
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उन्होंने बताया कि 200 से अधिक कर्मचारियों ने फार्म भरकर जेल जाने की घोषणा की है। निजीकरण एवं बिल के विरोध में बड़ी लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। अध्यक्षता अरविंद कुमार निगम एवं संचालन प्रदीप शर्मा ने की। कार्यक्रम को सह संयोजक सुबोध झा, सत्यवीर सिंह, मो. सगीर, कर्मवीर सिंह, सौरभ मंगला, प्रवीन कुमार, संजय शर्मा, दक्षक भारद्वाज, प्रमोद कुमार, ओपी शर्मा, अश्वनी उपाध्याय, प्रदीप चौहान, ऊदल सिंह, प्रताप सिंह, सुनील सिंह आदि ने संबोधित किया। 


गड़बड़ी होने पर विद्युत व्यवस्था चरमराने की आशंका
बिजली विभाग के कर्मचारियों व अभियंताओं के कार्य बहिष्कार से किसी तरह की गड़बड़ी होने की स्थिति में विद्युत व्यवस्था चरमराने की आशंका है। 400 केवीए एवं 765 केवीए के कर्मचारी अलग-अलग शिफ्ट में काम कर रहे हैं। इसके अलावा करीब 700 कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर हैं। 33 केवीए में ब्रेकडाउन या तार आदि टूटने की स्थिति में उसे ठीक कराना बड़ी चुनौती है। 
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