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बृज चौरासी कोस की परिक्रमा : बुजुर्ग मां की इच्छा को हथठेल खींचकर पूरा कर रहा बुजुर्ग बेटा

Wed, 10 Jun 2026 02:31 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 02:31 AM IST
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Elderly son fulfills his elderly mother's wish by pulling a handcart.
ठेले में बुजुर्ग मां को बृज चौरासी कोस की परिक्रमा कराते नंद महाराज।  संवाद - फोटो : Samvad
सिकंदराराऊ के गांव रतिभानपुर के हैं निवासी मां-बेटा
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राधे-राधे का जाप करती रहती हैं 92 साल की राजनदेवी
बेटे के धर्म-कर्म को देखकर हर कोई कर रहा आस्था को नमन
अब 270 दिन में मां को कराएंगे अन्य तीर्थ स्थलों के दर्शन
अनमोल मोहित शर्मा
गोरई। कलयुग में भी कुछ संतानें माता-पिता की आज्ञाकारी हैं। उनकी हर इच्छा को पूरा करने के लिए अपना धर्म समझती हैं। ऐसा ही नजारा बृज चौरासी कोस की परिक्रमा में देखने को मिल रहा है। आसमान से बरस रही आग और तपती जमीन पर चलकर हाथरस जिले की सिकंदराराऊ तहसील के गांव रतिभानपुर निवासी 52 साल का बुजुर्ग बेटा नवलदास नंद महाराज अपनी 92 वर्षीय मां राजन देवी को हथठेल में बैठाकर परिक्रमा करवा रहा है। परिक्रमा मार्ग में जो कोई इस भक्ति को देख रहा है वही आस्था को नमन कर रहा है।
नवलदास नंद महाराज ने बताया कि हथठेल को धार्मिक आस्था के अनुसार सजाकर वह घर से मां को लेकर परिक्रमा के लिए 25 मई को निकले हैं। मंगलवार को 18 वां दिन है। परिक्रमा पूरी होने में अभी तीन दिन और लग जाएंगे। मां को पहले भी बृज चौरासी कोस की परिक्रमा इसी प्रकार कराई थी। राजन देवी राधे-राधे के नाम का जाप करती रहती हैं। इच्छा पूरी होने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही है। परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले हर मंदिर में माथा टेक रही हैं। कहीं छांव में विश्राम भी कर लेती हैं और मौसम ठंडा होते ही परिक्रमा शुरू कर देती हैं।
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नवल दास नंद महाराज ने बताया कि मां पहले भी परिक्रमा कर हरिद्वार, कांगड़ा में नगरकोट तीर्थयात्रा कर चुकी हैं। इस बार भी परिक्रमा पूरी होने पर मां को लेकर हरिद्वार, कांगड़ा और अन्य तीर्थ स्थलों पर दर्शन के लिए लेकर जाएंगे। अगली तीर्थयात्रा करीब 270 दिनों की होगी। मां की हर इच्छा उनके लिए शिरोधार्य है। राजन देवी का कहना है कि एक मंदिर पर पुजारी का काम देख रहा उनका इकलौता बेटा नवलदास नंद महाराज उनकी हर अभिलाषा को पूरी करवा रहा है। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस सेवा का बेटे को फल अवश्य दें।
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