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बकरीद : कोरोना ने ईदगाह में नमाज रोकी, बारिश ने रास्ते रोके

Thu, 22 Jul 2021 12:11 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jul 2021 12:11 AM IST
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Eid-ul-azha
उपरकोट जामा मस्जिद पर एक दूसरे को बधाई देते लोग। - फोटो : CITY OFFICE
अलीगढ़ मंडल में कोरोना का एक भी सक्रिय मामला नहीं होने के बावजूद लगातार दूसरी बकरीद की नमाज शाहजमाल और जमालपुर ईदगाह में नहीं हुई। सभी ने अपने आसपास की मस्जिदों और घरों में ही बकरीद की नमाज अदा कर पुरखों की कब्रों पर फूल चढ़ा कर अगरबत्ती से खूशबू कर उनके लिए दुआएं मांगी।
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सुबह दस बजे तक बारिश बहुत अधिक होने के कारण कुर्बानी का सिलसिला इसके बाद शुरू हुआ। इसके साथ ही बकरीद का तीन दिन का त्योहार शुरू हो गया। इस बार भी कोरोना संक्रमण, महंगाई, बारिश और पूरे शहर में हुए जलभराव के कारण लोग दिन भर परेशान हुए।
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शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने अपने घर ऊपरकोट पर ही नमाज अदा की। उन्होंने वहां आए लोगों से कहा कि कुर्बानी देने वाले अपने पड़ोसियों का विशेष ख्याल रखें। उनको कोई दिक्कत न हो। जहां तक मुमकिन हो कुर्बानी के खून को पानी से साफ कर दें, खाल को पॉलीथिन में पैक करा दे, ताकि वह किसी दूसरे के इस्तेमाल हो सके, उसका मदरसों में दान हो सके। नगर निगम के वाहनों में बाकी अवशेष डालें, जिसे शहर से बाहर डंपिंग यार्ड में भेजा जा सके । कुर्बानी के बाद उसका हिस्सा बांट सही-सही करें। एक हिस्सा जरूरतमंद और गरीबों को बांटे। उन्होंने कहा कि शहर में जलभराव को नगर निगम जल्द दूर कराए, जिससे लोगों की आवाजाही हो सके। बकरीद के दिन बहुत बारिश होने से लोगों को बहुत दिक्कत हुई है। बारिश के कारण बिजली का फाल्ट हुआ, जिससे पीने के पानी की आपूर्ति बाधित रही है। इन समस्याओं का समाधान किया जाए।
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लगातार ये दूसरी बकरीद थी, जब शाहजमाल और जमालपुर ईदगाह के साथ बड़ी मस्जिदों में सामूहिक नमाज नहीं हुई है। अलग अलग मस्जिदों में अलग अलग समय पर हुई नमाज। जिसमें ऊपरकोट जामा मस्जिद, बू अली शाह मस्जिद, शीशे वाली मस्जिद, जामा मस्जिद एएमयू, जमालपुर मस्जिद सहित अन्य मस्जिदों में कहीं 60-70 तो कहीं 100 लोगों ने ही नमाज अदा की। इसमें उन लोगों की तादाद ज्यादा थी, जो रोजाना मस्जिद में ही नमाज अदा करते हैं। कोरोना, महंगाई, बारिश और जलभराव ने त्योहार का मजा किरकिरा किया। लोग अपने ही परिजनों, रिश्तेदारों से मिलने वक्त से नहीं जा सके। कोरोना और महंगाई की मार के कारण इस बार साझा कुर्बानी ज्यादा हुई। भैंसे जैसे बड़े जानवर कुर्बानी में कम रहे। छोटे जानवरों से ही काम चलाया गया। जिसमें भैंस का पड्डा 30-40 हजार रुपये, भैंसा 60 से 70 हजार रुपये और बकरों की कीमत उनकी नस्ल और वजन के अनुसार 15 से 40 हजार रुपये के बीच रही। बेहद अच्छी नस्ल के वजनी बकरों की कीमत 50 हजार रुपये से ऊपर लग गई।
दस बजे बारिश बंद हुई और उसकेबाद धीरे धीरे जलभराव कम हुआ। दोपहर दो बजे के बाद लोगों का घूमना शुरू हुआ तो सिनेमाघरों में भी रौनक आई। रामघाट रोड पीएसी के माल पर संचालित स्टार वर्ल्ड सिनेमा, मीनाक्षी सिनेमा, नावेल्टी में लोगों ने फिल्में देखीं। बाजारों में भी शाम को रौनक दिखी।
इंसानियत और मोहब्बत दोनों कुर्बानी चाहती हैं : शहर मुफ्ती
शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने बताया कि कुर्बानी के बगैर कोई भी मोहब्बत मुकम्मल नहीं हो सकती है। चाहे वह अल्लाह से हो, किसी शख्स सेे हो या अपने वतन से। हर मोहब्बत कुर्बानी मांगती है। इंसानियत और मोहब्बत दोनों कुर्बानी चाहती हैं।
उन्होंने बताया कि बकरीद का महत्व कुर्बानी के कारण ही खास है। अल्लाह ने अपने पैंगबर रसूल हजरत इब्राहिम को सबसे पहले कुर्बानी का सबक सिखाया था। हजरत इब्राहिम ने पहले सौ ऊंट की कुर्बानी दी, इसके बाद वह लगातार ऐसा करते रहे। फिर उन्होंने सोचा कि उन्हें जिंदगी में सबसे प्यारा उनका बेटा हजरत इस्माइल है। इसलिए उन्होंने उसकी कुर्बानी देने की ठानी, लेकिन जब इस्माइल की गर्दन पर छुरी रखी गई तो अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिबरायल को भेजा। जिसने इस्माइल की जगह एक दुंबा (भेंड़) खड़ा कर दिया और फिर उसकी कुर्बानी की गई।
अल्लाह को पैंगबर रसूल हजरत इब्राहिम की ये कुर्बानी इतनी पसंद आई कि उन्होंने दुंबे की कुर्बानी को सुन्नत ए इब्राहिम का खिताब दिया। इसी वाकये के बाद से ये इस्लामिक रवायत जारी है। शहर मुफ्ती ने एक मोहेदिज (इस्लामिक धार्मिक ग्रंथ हदीस लिखने वाले को मोहदिज कहते हैं) का भी वाकया सुनाया। बताया कि एक बार किताब लिखते वक्त एक मक्खी उनकी दवात पर बैठ कर पानी पीने लग गई तो उन्होंने तब तक इंतजार किया जब तक मक्खी उड़ न जाए। जब मक्खी उड़ गई तो उन्होंने आगे लिखना शुरू किया। जब उनका इंतकाल हुआ और वह जन्नत पहुंचे तो वहां उनसे पूछा गया कि आपको जन्नत कैसे नसीब हुई तो उन्होंने बताया कि मुझे धार्मिक किताबों के लिखने के लिए नहीं, बल्कि एक हकीर (मामूली) कीड़े को पानी पीने देने के लिए जन्नत मिली है। शहर मुफ्ती ने कहा कि ये वाकया हमें सिखाता है कि हम मामूली से मामूली जीव जंतु को भी प्यार दें। इंसानियत को सबसे ज्यादा तरजीह दें।
कुर्बानी खत्म हो, पर्यावरण को होती है हानि
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के सचिव कामरेड इकबाल मंद ने कुर्बानी खत्म करने की अपील की है। कहा कि यह एक तरह की पशु क्रूरता है। किसी एक प्रथा के निर्वहन में लाखों जानवरों को मार देना अमानवीयता है। इससे पर्यावरण का विनाश होता है और प्रदूषण फैलता है।
कहा कि पर्यावरण सीधे प्रत्येक जीव के साथ जुड़ा हुआ है। सामान्य अर्थों में पर्यावरण हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले सभी जैविक/अजैविक तत्वों, तथ्यों, प्रक्रियाओं और घटनाओं के समुच्चय से निर्मित इकाई है। यह हमारे चारों ओर व्याप्त है और हमारे जीवन की प्रत्येक घटना इसी के अंदर संपादित होती है। हम मनुष्य अपनी समस्त क्रियाओं से इस पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं। इस प्रकार एक जीवधारी और उसके पर्यावरण के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संबंध भी होता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म जीवाणु से लेकर कीड़े-मकोड़े, सभी जीव-जंतु और पेड़-पौधे आ जाते हैं। इनके साथ जुड़ी सारी जैव क्रियाएं और प्रक्रियाएं भी। अजैविक संघटकों में चट्टानें, पर्वत, नदी, हवा और जलवायु के तत्व हैं। बलि अथवा कुर्बानी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए जाती है। इस प्र्रथा के अंतर्गत बकरा, मुर्गा या भैंसे की बलि दिए जाने का प्रचलन है। मनुष्य ने पिछली कुछ सदियों में ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व विस्तार किया है। इस विस्तार ने बहुत-सी पारंपरिक मान्यताओं को बदला है, जैसे मानव बलि। इस लिए कुर्बानी का खात्मा होना चाहिए। ज्ञान के शोधकर्ताओं ने पाया कि दुनिया के जिन क्षेत्रों में धार्मिकता अधिक है, वहां नए ज्ञान को भली-भांति सीखने के प्रति रुचि कम होती है।
सपाइयों ने सादगी से मनाई बकरीद
सपा के पूर्व नगर विधायक जफर आलम ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए सादगी के साथ बकरीद मनाई। घर पर ही नमाज अदा की। वहां उनसे मिलने वालों का सिलसिला देर रात तक चला। पूर्व कोल विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने अपने आवास पर नमाज पढ़ने के बाद लोगों को मुबारकबाद दी।
सपा नेता जिबरान हसन ख्वाजा, पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इस्हाक, अयाज शेरवानी, मुजाहिद किदवई, जस्सू शेरवानी ने भी लोगों से भाईचारे के साथ बकरीद मनाने को कहा। महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी ने ऊपरकोट पर लोगों से मिल कर बकरीद मनाई। युवजन सभा के प्रदेश कोषाध्यक्ष सलमान शाहिद ने अपने करीबियों के साथ बकरीद मनाई और मुल्क केसाथ प्रदेश में अमन चैन की दुआ मांगते हुए घर पर ही नमाज अदा की। सपा नेता रुबीना खानम ने बीमार मरीजों संग ईद की खुशियां बांटी। उन्होंने ठा. मलखान सिंह जिला अस्पताल में बीमार मरीजों को फल वितरित किए।
कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष परवेज अहमद ने अपने आवास पर देश में अमन चैन की दुआ मांगी। उनके साथ मो. अरहम, शहजाद अख्तर, इश्तियाक अहमद, मुश्ताक अहमद, शारिक ज़ुबैर, एजाज़ अहमद, इजलाल अहमद, मैराज हसन, हैदर खान आदि मौजूद रहे। कांग्रेस के पूर्व पदाधिकारी मनोज सक्सेना ने जियाउद्दीन राही के घर पहुंच कर उनको मुबारकबाद दी।

शिवपाल ने बाबा को दी मुबारकबाद
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के महानगर अध्यक्ष बाबा फरीद आजाद ने भुजपुरा स्थित महानगर कार्यालय पर नमाज पढ़ाई। यहां देश में अमन चैन और खुशहाली की दुआ की गई। कोरोना से जान गंवाने वालों के लिए भी दुआ मांगी गई। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने फोन पर महानगर अध्यक्ष बाबा फरीद आजाद एवं अलीगढ़ वासियों को दी ईद उल अजहा की मुबारकबाद दी। इस अवसर पर मजहर उद्दीन, मोहम्मद हसीन, दिलशाद अब्बासी, अरबाज अरशद आदि मौजूद रहे।

भुजपुरा स्थित महानगर कार्यालय पर नमाज पढ़ते नमाजी।

भुजपुरा स्थित महानगर कार्यालय पर नमाज पढ़ते नमाजी।- फोटो : CITY OFFICE

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