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आतिशबाजी का असर : बुधवार की शाम आसमान में छा गई धुंध
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पर्यावरण संरक्षण पर सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट के तमाम प्रयासों के बाद भी दिवाली के मौके पर हुई जबरदस्त आतिशबाजी से एक बार फिर से शहर में प्रदूषण घातक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार की शाम शहर और आस-पास के इलाकों में आसमान में धुंध छाने लगी। इससे राहगीरों एवं वाहन चालकों को आंखों में जलन की शिकायत महसूस हुई। इससे उन्हें बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय की ओर से प्रदूषण की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। दिवाली के तीसरे दिन वायु और ध्वनि प्रदूषण में और बढ़ोत्तरी हुई है। यह सामान्य से चार गुना तक अधिक है। इससे शहर की आवोहवा खराब हो गई है। हालांकि दिवाली पर प्रदूषण का स्तर 413 माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यू था, जो बुधवार की सुबह तक 364 माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यू पर आ गया।
हालांकि शाम के समय प्रदूषण फिर से बढ़ गया है। इससे प्रदूषण का स्तर बेहद घातक स्तर पर जा पहुंचा है। शहर के आवासीय क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण 70 से 80 डेसीबल तक मापा गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (आईक्यू) न्यूनतम से 43 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक पर पहुंच गया है।
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आसमान में धुंध छाई रहने से सांस के रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण अगले दो-तीन दिन तक वातावरण को प्रभावित करेगा। उन्होंने बताया कि एयर क्वालिटी इंडेक्स का सामान्य मापक 100 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक है।
इसके बढ़ने पर वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि शहर के आवासीय क्षेत्र ज्ञान सरोवर, एएमयू समेत कई स्थानों पर पीएम -10 को मापने के लिए मैन्युअल सैंपलर मशीन से सैंपल कराया जा रहा है। इसकी 31 अक्तूबर तक मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि 301 से 400 का आईक्यू बेहद घातक स्थिति में है और यह रेड श्रेणी में आता है।
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क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय की ओर से प्रदूषण की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। दिवाली के तीसरे दिन वायु और ध्वनि प्रदूषण में और बढ़ोत्तरी हुई है। यह सामान्य से चार गुना तक अधिक है। इससे शहर की आवोहवा खराब हो गई है। हालांकि दिवाली पर प्रदूषण का स्तर 413 माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यू था, जो बुधवार की सुबह तक 364 माइक्रो ग्राम पर मीटर क्यू पर आ गया।
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हालांकि शाम के समय प्रदूषण फिर से बढ़ गया है। इससे प्रदूषण का स्तर बेहद घातक स्तर पर जा पहुंचा है। शहर के आवासीय क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण 70 से 80 डेसीबल तक मापा गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (आईक्यू) न्यूनतम से 43 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक पर पहुंच गया है।
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आसमान में धुंध छाई रहने से सांस के रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण अगले दो-तीन दिन तक वातावरण को प्रभावित करेगा। उन्होंने बताया कि एयर क्वालिटी इंडेक्स का सामान्य मापक 100 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक है।
इसके बढ़ने पर वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि शहर के आवासीय क्षेत्र ज्ञान सरोवर, एएमयू समेत कई स्थानों पर पीएम -10 को मापने के लिए मैन्युअल सैंपलर मशीन से सैंपल कराया जा रहा है। इसकी 31 अक्तूबर तक मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि 301 से 400 का आईक्यू बेहद घातक स्थिति में है और यह रेड श्रेणी में आता है।