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हाथरस के रावण ने अपने पीछे छोड़ा शिक्षा विभाग के कारनामे का जिन्न

Thu, 10 Oct 2019 01:09 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Oct 2019 01:09 AM IST
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Dussehra
विजयदशमी पर हाथरस में भले ही रावण का दहन हो गया हो, लेकिन जलने के बाद रावण अपने पीछे बेसिक शिक्षा विभाग के कारनामे का जिन्न छोड़ गया है। सरकारी किताबों को रद्दी में बेचने से लेकर हाथरस में रावण के पुतले बनाने तक के प्रकरण की जांच करवाई जाएगी। दोषी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई में अमल भी लाई जाएगी।
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अमर उजाला द्वारा बुधवार को प्रकाशित अंक में हाथरस के रावण के पुतले में सरकारी निशुल्क किताबों के इस्तेमाल की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की गई थीं। संबंधित मजदूर ने उक्त रद्दी को अलीगढ़ के रफातगंज से खरीदने का बयान दिया है। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल मच गई कि आखिरकार सरकारी किताबें बाजार में कैसे आईं। बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेकर वह जांच समिति जल्द ही गठित करेंगे। रावण का पुतला भले ही जल गया हो, लेकिन आरोपी दुकानदार, किताब बेचने वाले लोगों को चिह्नित किया जाएगा। संबंधित दोषी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करवाई जाएगी।
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किताबें कहीं की भी हों, लेकिन हैं निशुल्क वाली
बुधवार को खबर पढ़कर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों व शिक्षकों में सरकारी किताबों वाले रावण का मामला चर्चा में रहा। कयास लगाए गए कि यह किताबें जरूरी नहीं अलीगढ़ की हों, हो सकता है बाहर से भी रद्दी खरीदकर लाई गई हो। ऐसे में किताब भले ही कहीं की भी हों, लेकिन हैं तो सरकारी निशुल्क वाली। वहीं सरकारी निशुल्क किताबों का इतनी मात्रा में रद्दी में बिकना ही विभाग पर बड़ा प्रश्न चिह्न लगाता है। बीएसए ने बताया कि संबंधित दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलवाई जाएगी।
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