अतीत का अलीगढ़ 22: बेकाबू अपराधों की वजह से अलीगढ़ में कभी लगाना पड़ा था मार्शल लॉ
राज्य सरकार ने एक शासनादेश के जरिए प्रदेश के सभी जिलों के लिए नया जिला गजेटियर तैयार करने का आदेश दिया है। उसके लिए कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अलीगढ़ का अंतिम गजेटियर 1909 में तैयार किया गया था। लगभग 400 पेजों की इस पुस्तक में लगभग 114 साल पुराने अलीगढ़ के भूगोल, नदियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सिंचाई व ड्रेनेज सिस्टम, पुलिस व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से वर्णन है। इस संबंध में अतीत का अलीगढ़ नाम से एक समाचार श्रृंखला शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि पुराने अलीगढ़ के बारे में जानकारी पाठकों को रुचिकर लगेगी। कृपया अपनी राय से हमें अवगत कराएं।
विस्तार
अंग्रेजों द्वारा विजित किए जाने पर 1804 में अलीगढ़ जिले का गठन किया गया था। इसके साथ ही पुलिस की तैनाती भी की गई थी। पुलिस का काम मुख्य शहर, बाजारों में कानून व्यवस्था बनाए रखना और अपराध नियंत्रण था। ग्रामीण इलाकों में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी तहसीलदारों को दी गई थी। खुद अंग्रेज मानते थे कि यह व्यवस्था बुरी तरह विफल रही। ग्रामीण इलाकों में ही नहीं , मुख्य शहर में भी अराजकता का माहौल था।
कई जमींदारों और बड़े किसानों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ बगावती रुख अख्तियार कर लिया था। हालात बेकाबू होने लगे थे। इन हालात में अंग्रेजों ने जिले में मार्शल लॉ अर्थात सैन्य शासन थोपने का एलान कर दिया था। 1809 में तहसीलदारों से पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी वापस ले ली गई थी। मजिस्ट्रेट की निगरानी में पुलिस बल का गठन किया गया।
थानों की स्थापना का लंबा इतिहास
शुरुआती दौर में कोल, अतरौली, औरंगाबाद, छर्रा, चंडौस, खैर, हसनगढ़, सासनी, हसायन, कौड़ियागंज और सिकंदराराऊ थाने स्थापित किए गए। इसके बाद पांच और थानों की स्थापना की गई। लेकिन 1817 में उन्हें खत्म कर दिया गया। 1817 में ही हाथरस और मुरसान के रूप में दो नए थानों का गठन किया गया। इसके बाद 1837 में बेगम समरू की जागीर के अंग्रेजी राज में विलय के बाद टप्पल थाने की स्थापना की गई। 1851 में नई व्यवस्था के तहत मिस्टर ई एफ टेलर ने जिले की सभी आठ तहसीलों में आठ पुलिस डिवीजन का गठन किया ।
एक बार फिर से तहसीलदारों के हाथ में पुलिस की कमान दे दी गई। हालांकि उनकी शक्ति अपने हलकों में ही निरीक्षण तक सीमित रखी गई। इस व्यवस्था के तहत दस थानों का गठन किया गया। ये कोल, अतरौली, अकराबाद, सिकंदराराऊ, सासनी, दादों, हाथरस, इगलास, खैर और टप्पल में स्थापित किए गए। इसके साथ ही प्रथम श्रेणी की पुलिस चौकियां या उपथाने हरदुआगंज, जवां, चंडौस, सोमना, गोंडा, हसायन, और गंगीरी में स्थापित किए गए। इसके अलावा जिले के 21 स्थानों पर पुलिस चौकियों की स्थापना की गई। ग्रांड ट्रंक रोड (जीटी रोड) पर पुलिस के सचल दस्तों की भी तैनाती की गई।
1857 की क्रांति के बाद पुलिस व्यवस्था में आई तब्दीली
1857 की क्रांति के पश्चात पुलिस व्यवस्था और थानों की व्यवस्था में काफी तब्दीली की गई। पुराने सभी थानों को प्रथम श्रेणी का दर्जा दिया गया। टप्पल अपवाद रहा। इसे द्वितीय श्रेणी के थाने का दर्जा दिया गया। प्रथम श्रेणी की पुलिस चौकियों को बरकरार रखा गया था। इनमें नारायनपुर, मुरसान, अगसौली, बारला और सांकरा जोड़ी गईं। ज्यादातर छोटी चौकियों को खत्म कर दिया गया। लेकिन मडराक, भांकरी, दरयापुर, पनेठी और हतीसा की पुलिस चौकियां बरकरार रखी गईं। छह नई पुलिस चौकियां बनाई गईं। इनमें छेरत, हतीसा, मिताई गोपी, जाओ और आलम शामिल थीं। इनमें से कई को बाद में बदल दिया गया। बन्ना देवी के रूप में अलीगढ़ और हाथरस के पूर्व में सलेमपुर नए थाने खोले गए। सांकरा थाना खत्म कर दिया गया।
1906 में 16 पुलिस सर्किल में बांटा गया जिला
1906 में पुलिस व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किए गए। इसके तहत सोमना, मुरसान, सलेमपुर, अगसौली, नारायनपुर, जवां, गंगीगी और बारला थाने खत्म कर दिए गए। दतौली के रूप में नया थाना स्थापित किया गया। बन्नादेवी थाने को भांकरी ले जाया गया। इस व्यवस्था में जिले को 16 पुलिस सर्किल में बांटा गया। कोशिश की गई कि सभी तहसीलों में पुलिस सर्किल समानुपाती हों। अलीगढ़ सर्किल में कोल, भांकरी और हरदुआगंज थाना, अतरौली में अतरौली, दादों और दतौली, खैर में खैर, टप्पल और चंडौस, इगलास में इगलास और गोंडा, हाथरस में हाथरस और सासनी, सिकंदराराऊ तहसील में सिकंदराराऊ, अकराबाद और हसायन थाने शामिल किए गए। हर सर्किल में 122 वर्ग मील का इलाका और 75 हजार से ज्यादा की आबादी शामिल थी।
जारी...
स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)