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कोहरा, गुटका, नींद और सेंट्रल लॉक बने मौत के कारण
अभिषेक शर्मा, न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Mon, 29 Jan 2018 02:14 AM IST
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नाले में डूबी स्कार्पियो को जेसीबी के जरिए निकालने की कोशिश।
- फोटो : अमर उजाला
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हादसे का शिकार हुई स्कार्पियो के चालक की मानें तो इस हादसे के चार कारण हैं, जो सात लोगों का मौत का कारण बने। इनमें पहला कारण कोहरा, दूसरा गुटका, तीसरा नींद और चौथा गाड़ी का सेंट्रल लॉक। मौत का खौफनाक मंजर देखकर किसी तरह बचे चालक शाहिद ने बताया कि हादसे के बाद वह काफी देर तक बेहोश पड़ा रहा और बाद में खुद पुलिस चौकी पहुंच गया।
उसने पुलिस पूछताछ में बताया कि हादसे से कुछ समय पहले ही उसने गुटका खाया था। थूकने के लिए उसने अपनी ड्राइवर साइड खिड़की का लॉक खोल लिया था और उसकी खिड़की का शीशा भी खुला था। कोहरा अधिक होने के कारण गाड़ी की स्पीड 30 से 35 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से थी। उसे छोड़कर सभी लोग गहरी नींद में सोये हुए थे। जैसे ही वह मजार के निकट पहुंचा तभी उसने गुटका थूकने के लिए अपनी खिड़की खोली थी कि सामने से तेज गति से ट्रक सामने आ गया। यहां मोड़ होने के कारण उसका नियंत्रण गाड़ी से हट गया और वह सड़क की पटरी से उतरती हुई गहरे नाले में जा घुसी। उसने नियंत्रण करने के लिए जोर से ब्रेक भी लगाए लेकिन पहिया स्लिप हो गया और कार पानी में धंसती चली गई।
नाले में घुसने के दौरान ही उसकी खिड़की खुल गई और वह बाहर निकल आया। उसने गाड़ी में सवार अन्य लोगों को बाहर निकालने के लिए खिड़की खोलने के प्रयास भी किए, मगर सेंट्रल लॉक होने के कारण खिड़कियां नहीं खुल पाईं। वह खुद किसी तरह बाहर आ गया। उसने मदद के लिए एक ट्रक को रोकने की कोशिश की मगर वह नहीं रुका। उसने जोर-जोर से चीखना शुरू किया मगर इलाका सुनसान होने के कारण कोई मदद को नहीं आया। कुछ देर मशक्कत के बाद वह मदद के लिए पेट्रोल टंकी के निकट पहुंचा पर वहां पहुंचते-पहुंचते भीगने के कारण ठंड से बेहोश होकर गिर पड़ा। सड़क के किनारे गड्ढे में काफी देर बेहोश पड़ा रहने के बाद जब उसे होश आया तो उसने देखा पुलिस और लोग राहत कार्य में जुटे थे। फिर वह पिटाई के डर से भीड़ में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका और लोगों से पूछते-पूछते वह कस्बा पुलिस चौकी पहुंच गया। तब पुलिस ने हिरासत में लेकर उसका डॉक्टरी परीक्षण कराया।
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कोहरे का अंदाजा होता तो न आने देता
एसओ जवां अमित यादव की मानें तो रात करीब दस बजे यह लोग जवां से बरेली के लिए रवाना हुए थे। रात करीब एक बजे एसओ ने जब प्रदीप शर्मा को फोन मिलाया तो उन्होंने बताया था कि बरेली में प्रवेश कर चुके हैं और कुछ ही देर में किला थाना पहुंचकर दोनों को लेकर वापस लौट लेंगे। एसओ की मानें तो उस समय वह सीडीएफ चौकी से लौटकर थाने पहुंचे थे, उस समय तक उन्हें कोहरा नहीं मिला था। इसलिए उन्हें कोहरे का अनुमान नहीं था। अगर जरा भी अंदेशा होता तो उन्हें रात को वहीं रुकने की सलाह देता और आने न देता।
बुग्गी चालक के सामने अचानक गायब हुई स्कार्पियो
सुबह करीब साढ़े छह बजे एक प्रत्यक्षदर्शी बुग्गी चालक ने बताया कि एक स्कार्पियो उसके सामने से निकली और अचानक गायब हो गई। उसने देखा कि स्कार्पियो पलक झपकते ही पानी में डूब गई। बस उसकी छत ही छत दिख रही है। तभी उसने वहां दौड़ लगा रहे युवकों की मदद से पुलिस को खबर दी। तब दौड़ते हुए इलाके की लैपर्ड वहां पहुंची।
पौने दो घंटे लगे बाहर निकालने में
हादसा करीब छह बजे हुआ था। जब कुछ युवक दौड़ लगाने स्टेडियम की ओर जा रहे थे तो उन्हें कार दिखाई दी। करीब 6.45 पर युवकों ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। 6.53 पर सीओ और कोतवाल को कंट्रोल रूम से हादसे का संदेश मिला। सात बजे तक फोर्स घटना स्थल पर पहुंच चुकी थी। 7.10 बजे जेसीबी बुलाई गई। एक जेसीबी से कार बाहर नहीं निकल सकी तो 7.20 बजे दूसरी जेसीबी बुलाई गई। दो जेसीबी लगाकर करीब 7.45 बजे कार को बाहर निकाला जा सका। पौने दो घंटे में पानी में दम घुटने से सभी की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पानी में डूबने और दम घुटने से मौत होना स्पष्ट हुआ है।
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उसने पुलिस पूछताछ में बताया कि हादसे से कुछ समय पहले ही उसने गुटका खाया था। थूकने के लिए उसने अपनी ड्राइवर साइड खिड़की का लॉक खोल लिया था और उसकी खिड़की का शीशा भी खुला था। कोहरा अधिक होने के कारण गाड़ी की स्पीड 30 से 35 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से थी। उसे छोड़कर सभी लोग गहरी नींद में सोये हुए थे। जैसे ही वह मजार के निकट पहुंचा तभी उसने गुटका थूकने के लिए अपनी खिड़की खोली थी कि सामने से तेज गति से ट्रक सामने आ गया। यहां मोड़ होने के कारण उसका नियंत्रण गाड़ी से हट गया और वह सड़क की पटरी से उतरती हुई गहरे नाले में जा घुसी। उसने नियंत्रण करने के लिए जोर से ब्रेक भी लगाए लेकिन पहिया स्लिप हो गया और कार पानी में धंसती चली गई।
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नाले में घुसने के दौरान ही उसकी खिड़की खुल गई और वह बाहर निकल आया। उसने गाड़ी में सवार अन्य लोगों को बाहर निकालने के लिए खिड़की खोलने के प्रयास भी किए, मगर सेंट्रल लॉक होने के कारण खिड़कियां नहीं खुल पाईं। वह खुद किसी तरह बाहर आ गया। उसने मदद के लिए एक ट्रक को रोकने की कोशिश की मगर वह नहीं रुका। उसने जोर-जोर से चीखना शुरू किया मगर इलाका सुनसान होने के कारण कोई मदद को नहीं आया। कुछ देर मशक्कत के बाद वह मदद के लिए पेट्रोल टंकी के निकट पहुंचा पर वहां पहुंचते-पहुंचते भीगने के कारण ठंड से बेहोश होकर गिर पड़ा। सड़क के किनारे गड्ढे में काफी देर बेहोश पड़ा रहने के बाद जब उसे होश आया तो उसने देखा पुलिस और लोग राहत कार्य में जुटे थे। फिर वह पिटाई के डर से भीड़ में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका और लोगों से पूछते-पूछते वह कस्बा पुलिस चौकी पहुंच गया। तब पुलिस ने हिरासत में लेकर उसका डॉक्टरी परीक्षण कराया।
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कोहरे का अंदाजा होता तो न आने देता
एसओ जवां अमित यादव की मानें तो रात करीब दस बजे यह लोग जवां से बरेली के लिए रवाना हुए थे। रात करीब एक बजे एसओ ने जब प्रदीप शर्मा को फोन मिलाया तो उन्होंने बताया था कि बरेली में प्रवेश कर चुके हैं और कुछ ही देर में किला थाना पहुंचकर दोनों को लेकर वापस लौट लेंगे। एसओ की मानें तो उस समय वह सीडीएफ चौकी से लौटकर थाने पहुंचे थे, उस समय तक उन्हें कोहरा नहीं मिला था। इसलिए उन्हें कोहरे का अनुमान नहीं था। अगर जरा भी अंदेशा होता तो उन्हें रात को वहीं रुकने की सलाह देता और आने न देता।
बुग्गी चालक के सामने अचानक गायब हुई स्कार्पियो
सुबह करीब साढ़े छह बजे एक प्रत्यक्षदर्शी बुग्गी चालक ने बताया कि एक स्कार्पियो उसके सामने से निकली और अचानक गायब हो गई। उसने देखा कि स्कार्पियो पलक झपकते ही पानी में डूब गई। बस उसकी छत ही छत दिख रही है। तभी उसने वहां दौड़ लगा रहे युवकों की मदद से पुलिस को खबर दी। तब दौड़ते हुए इलाके की लैपर्ड वहां पहुंची।
पौने दो घंटे लगे बाहर निकालने में
हादसा करीब छह बजे हुआ था। जब कुछ युवक दौड़ लगाने स्टेडियम की ओर जा रहे थे तो उन्हें कार दिखाई दी। करीब 6.45 पर युवकों ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। 6.53 पर सीओ और कोतवाल को कंट्रोल रूम से हादसे का संदेश मिला। सात बजे तक फोर्स घटना स्थल पर पहुंच चुकी थी। 7.10 बजे जेसीबी बुलाई गई। एक जेसीबी से कार बाहर नहीं निकल सकी तो 7.20 बजे दूसरी जेसीबी बुलाई गई। दो जेसीबी लगाकर करीब 7.45 बजे कार को बाहर निकाला जा सका। पौने दो घंटे में पानी में दम घुटने से सभी की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पानी में डूबने और दम घुटने से मौत होना स्पष्ट हुआ है।