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अलीगढ़ से क्राइम का ककहरा सीख लखनऊ-दिल्ली तक को हिलाया
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बिजनौर में एनआईए डीएसपी तंजील अहमद दंपती हत्याकांड को अंजाम देकर देश भर की एजेंसियों की निगाह में आए कुख्यात शूटर मुनीर मेहताब का अलीगढ़ से गहरा नाता है। या यूं कहें कि अलीगढ़ आकर उसने क्राइम का ककहरा सीखा और फिर यहां से आगे बढ़कर लखनऊ-दिल्ली तक की पुलिस को हिलाया। मुनीर पर 35 से अधिक अपराध दर्ज हैं, जिनमें अकेले अलीगढ़ में 9 अपराध दर्ज हैं। यहां तीन हत्याएं और आधा दर्जन लूट के मुकदमे न्यायालयों में विचाराधीन हैं। शुक्रवार को एनआई दंपती हत्याकांड में दोषी करार दिए जाने की खबर मिलने पर मुनीर फिर सुर्खियों में आया और दिन भर उसे लेकर चर्चाएं रहीं।
अलीगढ़ टीम को एसटीएफ से संबद्ध किया, तब हुई थी गिरफ्तारी
बिजनौर से एएमयू पढ़ने आए मुनीर को यहां दाखिला नहीं मिला। मगर दोस्तों संग यहीं रहने लगा। फिर एएमयू के छात्र गुटों की अदावत में सक्रिय मुनीर और उसके बेहद करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा के नाम अलीगढ़ में चर्चित हुए। कई घटनाओं में उनके नाम सामने आए। कारोबारी फहद की हत्या में आशुतोष पकड़ा गया। मगर मुनीर चकमा दे गया। फरारी में उसने एएमयू छात्र आलमगीर की हत्या की। इसी बीच 2 अप्रैल 2016 को तंजील दंपती की हत्या में 7 अप्रैल को उसका नाम सामने आया। तंजील की हत्या में किसी देश विरोधी ताकत के अंदेशे और मुनीर द्वारा उसी इशारे पर हत्या के शक में एनआईए, आईबी, दिल्ली स्पेशल सेल आदि उसके पीछे लगीं। मगर सफलता नहीं मिली। इस पर मुनीर की गिरफ्तारी के लिए अलीगढ़ पुलिस में तैनात तेजतर्रार मुखबिर नेटवर्क वाले थाना प्रभारी अजय कौशल, एसओजी में कार्यरत राकेश यादव, दुर्विजय सिंह व फिरोज खान को एसटीएफ लखनऊ यूनिट से संबद्ध किया गया। इन चारों ने दो महीने के प्रयास के बाद मुनीर को 26 जून को नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर के एक मकान से दबोच लिया। जब उससे सभी एजेंसियों ने अलग-अलग पूछताछ की तो सभी हैरान रह गए। तंजील की हत्या जरूर उसने निजी दुश्मनी में की। बाकी हत्याएं व अन्य अपराध उसने सिर्फ दोस्तों की अदावत में, अपने शोक पूरे करने के लिए या टशन में किए। किसी अपराध के पीछे कोई मकसद न था।
आज तक फरार है उसका साथी सऊद
मुनीर के साथी अलीगढ़ व बिजनौर से ही 50-50 हजार के इनामी सऊद की गिरफ्तारी भी होनी थी। मगर सऊद आज तक हाथ न लग सका। उसके विषय में इनपुट मिला कि वह मुनीर से पहले दुबई चला गया और गिरफ्तारी के दिन मुनीर भी मुंबई निकलने वाला था। मगर वह पकड़ा गया।
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दो मुकदमे निर्णय की दहलीज पर, वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी
गिरफ्तारी के बाद मुनीर 2018 में यहां पेशी पर आया था। उसके आने के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियों को ध्यान में रख उसकी पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से शुरू कराई गई। अब उसके खिलाफ लंबित फहद हत्याकांड व आलमगीर हत्याकांड निर्णय की दहलीज पर हैं। पिछली तारीखों पर विवेचक भी गवाही देकर गए हैं।
-न्यायालय में अलीगढ़ के ये मुकदमे विचाराधीन-
1-एएमयू छात्र तल्हा पर हमला किया गया।
2-पीडब्ल्यूडी ठेकेदार से क्वार्सी में पिस्टल लूट।
3-सिविल लाइंस इलाके में पल्सर बाइक लूट।
4-मीनाक्षी पुल पर 32 लाख रुपये की लूट की।
5-रेलवे रोड पर 35 लाख रुपये की लूट की।
6-सिविल लाइंस में कारोबारी फहद की हत्या।
7-क्वार्सी में तालशपुर प्रधान की पिस्टल लूटी।
8-पान दरीबा में सिपाही की हत्या, पिस्टल लूट।
9-एएमयू छात्र आलमगीर की दिनदहाड़े हत्या।
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अलीगढ़ टीम को एसटीएफ से संबद्ध किया, तब हुई थी गिरफ्तारी
बिजनौर से एएमयू पढ़ने आए मुनीर को यहां दाखिला नहीं मिला। मगर दोस्तों संग यहीं रहने लगा। फिर एएमयू के छात्र गुटों की अदावत में सक्रिय मुनीर और उसके बेहद करीबी दोस्त आशुतोष मिश्रा के नाम अलीगढ़ में चर्चित हुए। कई घटनाओं में उनके नाम सामने आए। कारोबारी फहद की हत्या में आशुतोष पकड़ा गया। मगर मुनीर चकमा दे गया। फरारी में उसने एएमयू छात्र आलमगीर की हत्या की। इसी बीच 2 अप्रैल 2016 को तंजील दंपती की हत्या में 7 अप्रैल को उसका नाम सामने आया। तंजील की हत्या में किसी देश विरोधी ताकत के अंदेशे और मुनीर द्वारा उसी इशारे पर हत्या के शक में एनआईए, आईबी, दिल्ली स्पेशल सेल आदि उसके पीछे लगीं। मगर सफलता नहीं मिली। इस पर मुनीर की गिरफ्तारी के लिए अलीगढ़ पुलिस में तैनात तेजतर्रार मुखबिर नेटवर्क वाले थाना प्रभारी अजय कौशल, एसओजी में कार्यरत राकेश यादव, दुर्विजय सिंह व फिरोज खान को एसटीएफ लखनऊ यूनिट से संबद्ध किया गया। इन चारों ने दो महीने के प्रयास के बाद मुनीर को 26 जून को नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर के एक मकान से दबोच लिया। जब उससे सभी एजेंसियों ने अलग-अलग पूछताछ की तो सभी हैरान रह गए। तंजील की हत्या जरूर उसने निजी दुश्मनी में की। बाकी हत्याएं व अन्य अपराध उसने सिर्फ दोस्तों की अदावत में, अपने शोक पूरे करने के लिए या टशन में किए। किसी अपराध के पीछे कोई मकसद न था।
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आज तक फरार है उसका साथी सऊद
मुनीर के साथी अलीगढ़ व बिजनौर से ही 50-50 हजार के इनामी सऊद की गिरफ्तारी भी होनी थी। मगर सऊद आज तक हाथ न लग सका। उसके विषय में इनपुट मिला कि वह मुनीर से पहले दुबई चला गया और गिरफ्तारी के दिन मुनीर भी मुंबई निकलने वाला था। मगर वह पकड़ा गया।
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दो मुकदमे निर्णय की दहलीज पर, वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी
गिरफ्तारी के बाद मुनीर 2018 में यहां पेशी पर आया था। उसके आने के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियों को ध्यान में रख उसकी पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से शुरू कराई गई। अब उसके खिलाफ लंबित फहद हत्याकांड व आलमगीर हत्याकांड निर्णय की दहलीज पर हैं। पिछली तारीखों पर विवेचक भी गवाही देकर गए हैं।
-न्यायालय में अलीगढ़ के ये मुकदमे विचाराधीन-
1-एएमयू छात्र तल्हा पर हमला किया गया।
2-पीडब्ल्यूडी ठेकेदार से क्वार्सी में पिस्टल लूट।
3-सिविल लाइंस इलाके में पल्सर बाइक लूट।
4-मीनाक्षी पुल पर 32 लाख रुपये की लूट की।
5-रेलवे रोड पर 35 लाख रुपये की लूट की।
6-सिविल लाइंस में कारोबारी फहद की हत्या।
7-क्वार्सी में तालशपुर प्रधान की पिस्टल लूटी।
8-पान दरीबा में सिपाही की हत्या, पिस्टल लूट।
9-एएमयू छात्र आलमगीर की दिनदहाड़े हत्या।