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अलीगढ़ः फर्जी संस्तुतियों से कारागार में तैनात डॉ. शाहरुख बुरे फंसे
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जिला कारागार में तैनात परामर्शदाता डॉ. शाहरुख सैय्यद हुसैन रिजवी वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी संस्तुति पत्रों के आधार पर कारागार में तैनाती पाने के आरोपों में फंस गए हैं। शासन स्तर पर हुई शिकायत के आधार पर महानिदेशक ने अपर निदेशक को इसकी जांच सौंपी है और सीएमओ को पत्र भेजकर तत्काल कारागार से हटाने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
महानिदेशक स्वास्थ्य की ओर से सीएमओ को भेजे गए पत्र में उल्लेख है कि वर्ष 2014 में कारागार में घटिया घेवर खाने से कई बंदी बीमार हो गए थे। जिसमें उन पर घेवर के संबंध में गलत रिपोर्ट देने का आरोप लगा था। इस आरोप में वे जेल से हटाए गए। इसके बाद 2015 में वे वापस किसी तरह प्रयास कर जेल में अपना तबादला करा लाए। इसके बाद 2017 में उनके खिलाफ विधायक ठा.दलवीर सिंह ने यह शिकायत दी कि वे समुदाय देखकर इलाज करते हैं। इस मामले में जब उनके कारागार में वापस तबादला संस्तुति संबंधी पत्र देखना शुरू हुआ तो एक पत्र 2019 में अपर निदेशक की ओर से था, जबकि दूसरा 2019 का ही तत्कालीन जेल अधीक्षक का था।
जांच में पाया कि अपर निदेशक के पत्र पर हस्ताक्षर फर्जी हैं, जबकि जेल अधीक्षक आलोक सिंह उस समय अलीगढ़ जेल में तैनात ही नहीं थे। इन्हीं तमाम पहलुओं पर जब शासन में शिकायत हुई तो इस शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। सीएमओ डॉ.आनंद उपाध्याय के अनुसार महानिदेशक की ओर से मामले में अपर निदेशक को विभागीय जांच करने और उन्हें जेल से हटाने का आदेश पत्र मिल गया है। फिलहाल उन्हें हटा दिया गया है। बाकी विभागीय जांच अपर निदेशक स्तर से की जाएगी।
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महानिदेशक स्वास्थ्य की ओर से सीएमओ को भेजे गए पत्र में उल्लेख है कि वर्ष 2014 में कारागार में घटिया घेवर खाने से कई बंदी बीमार हो गए थे। जिसमें उन पर घेवर के संबंध में गलत रिपोर्ट देने का आरोप लगा था। इस आरोप में वे जेल से हटाए गए। इसके बाद 2015 में वे वापस किसी तरह प्रयास कर जेल में अपना तबादला करा लाए। इसके बाद 2017 में उनके खिलाफ विधायक ठा.दलवीर सिंह ने यह शिकायत दी कि वे समुदाय देखकर इलाज करते हैं। इस मामले में जब उनके कारागार में वापस तबादला संस्तुति संबंधी पत्र देखना शुरू हुआ तो एक पत्र 2019 में अपर निदेशक की ओर से था, जबकि दूसरा 2019 का ही तत्कालीन जेल अधीक्षक का था।
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जांच में पाया कि अपर निदेशक के पत्र पर हस्ताक्षर फर्जी हैं, जबकि जेल अधीक्षक आलोक सिंह उस समय अलीगढ़ जेल में तैनात ही नहीं थे। इन्हीं तमाम पहलुओं पर जब शासन में शिकायत हुई तो इस शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। सीएमओ डॉ.आनंद उपाध्याय के अनुसार महानिदेशक की ओर से मामले में अपर निदेशक को विभागीय जांच करने और उन्हें जेल से हटाने का आदेश पत्र मिल गया है। फिलहाल उन्हें हटा दिया गया है। बाकी विभागीय जांच अपर निदेशक स्तर से की जाएगी।
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