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Aligarh Exhibition: बाबा साहेब का धम्म चक्र सामाजिक क्रांति का प्रतीक, सेमिनार में यह हुई परिचर्चा
Thu, 05 Feb 2026 06:39 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Thu, 05 Feb 2026 06:39 PM IST
सार
सांस्कृतिक सत्र में युवा कवित्री वंदना सिद्धार्थ ने काव्य पाठ किया और मिशनरी गायक शशि भूषण ने बाबा साहेब के जीवन प्रसंगों को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
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डॉ. बीआर. अम्बेडकर स्मृति सेमिनार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
- फोटो : स्वयं
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विस्तार
धम्मभूमि के तत्वावधान में 4 फरवरी को अलीगढ़ राजकीय कृषि प्रदर्शनी स्थित कृष्णमंजलि नाट्यशाला में डॉ. बीआर. अम्बेडकर स्मृति सेमिनार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय एससी.एसटी फेडरेशन के महासचिव केपी चौधरी ने की, जबकि उद्घाटन डिक्की के पूर्व अध्यक्ष आरके सिंह द्वारा किया गया।
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मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राजकुमार भाटी ने कहा कि 14 अक्टूबर 1956 को बाबा साहेब द्वारा बौद्ध धर्म ग्रहण करना जातिगत भेदभाव और शोषण के विरुद्ध एक बड़ी चेतावनी थी। उन्होंने जोर दिया कि बिना पाखंड और भेदभाव का बहिष्कार किए समतामूलक समाज की स्थापना संभव नहीं है। विशिष्ट अतिथि बिहार के पूर्व विधायक सतीश दास ने कहा कि विश्व में सुख-शांति के लिए अंततः बुद्ध के मार्ग पर ही चलना होगा। हरियाणा से आए अधिवक्ता रजत कंसन ने भारतीय संविधान को न्याय का सबसे बड़ा दस्तावेज बताया, वहीं पंजाब की अमन बौद्ध ने महिलाओं से अंधविश्वास मुक्त होकर बुद्ध के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
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सांस्कृतिक सत्र में युवा कवित्री वंदना सिद्धार्थ ने काव्य पाठ किया और मिशनरी गायक शशि भूषण ने बाबा साहेब के जीवन प्रसंगों को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया। शांति देवी मेमोरियल स्कूल के बच्चों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन सुशील कुमार गौतम ने किया। इस अवसर पर धम्म सेन बौद्ध, बिम्बिसार बौद्ध सहित भारी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
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