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Aligarh News: जिले में खुंखार हो रहे कुत्ते..हर महीने आठ हजार एंटी रेबीज वायल की खपत

Thu, 21 May 2026 02:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2026 02:52 AM IST
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Dogs are becoming ferocious in the district... Eight thousand anti-rabies vials are consumed every month.
शहर में भटकते आवारा कुत्ते। संवाद
सुप्रीम कोर्ट ने खतरनाक कुत्तों को मौत देने संबंधी आदेश देकर एक बड़ी राहत दी है। जिले में एंटी रेबीज की खपत पर ध्यान दें तो आठ से 10 हजार वायल हर महीने खप रही हैं। एक वायल से पांच टीके लगाए जाते हैं। प्रतिमाह दस हजार से ज्यादा लोगों के टीके लगाए जा रहे हैं। यह आंकड़ा ही जिले में कुत्तों के खुंखार होने की गवाही दे रहा है।
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जिले में कुत्तों के हमलों से जान जाने की घटनाएं भी हुई हैं। सबसे चर्चित घटना एएमयू परिसर में हुई। सुबह घूमने गए सेवानिवृत्त प्रोफेसर को कुत्तों के झुंड ने नोंच-नोंचकर मौत के घाट उतार दिया था। नगर निगम द्वारा लावारिस कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी का अभियान भी चलाया जा रहा है। बावजूद इसके कुत्तों के काटने की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं।
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जिले का आंकड़ा
जिला अस्पताल व दीनदयाल अस्पताल में प्रतिमाह आठ से 10 हजार एंटी रेबीज टीके लगने का औसत है, हालांकि जिले में सभी सीएचसी व पीएचसी पर पर टीके लगते हैं, लेकिन वहां का औसत बेहद कम है। कुत्ते के काटने पर पांच टीके लगाए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुत्ता काटने के उपचार संबंधी विशेषज्ञ डॉ. शोएब अंसारी बताते हैं कि जिले में हर माह आठ से 10 हजार वायल एंटी रेबीज की खपत है। दस हजार से अधिक लोगों को प्रतिमाह कुत्ते काटने का औसत है। अब पिछले वर्ष से जिले में गंभीर श्रेणी यानी कैटेगरी-3 के मरीज को लगने वाली रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन की डोज भी मौजूद है।
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एक वर्ष पहले तक जिले में नहीं थी इम्युनोग्लोब्युलिन की डोज

जिले में रेबीज के खतरे पर 2022-23 में हुए शोध में खुलासा हुआ था कि उस समय जिले में रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन की डोज कुत्ता काटने पर उपलब्ध ही नहीं थी। जवां सीएचसी में इस एक साल के दौरान 2270 लोग रेबीज का टीका लगवाने पहुंचे। चिंताजनक बात यह रही कि कैटेगरी-3 के किसी भी मरीज को रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन नहीं मिल सका, क्योंकि केंद्र पर इसकी उपलब्धता ही नहीं थी।

अध्ययन में अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक जवां सीएचसी में दर्ज मामलों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, जानवरों द्वारा काटने के मामलों में 71.7 फीसदी मरीज पुरुष थे, जबकि औसत आयु 23 वर्ष रही। सबसे ज्यादा मामले युवाओं और बच्चों में सामने आए। शोधकर्ताओं के अनुसार, बाहर काम करने, सड़क पर अधिक समय बिताने और आवारा कुत्तों के संपर्क में रहने के कारण पुरुष और युवा अधिक प्रभावित हुए। रिपोर्ट में बताया गया कि 94 फीसदी मामलों में कुत्तों ने काटा। इसके अलावा बंदर, बिल्ली और अन्य जानवरों के मामले भी सामने आए, लेकिन संख्या बेहद कम रही।
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