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Aligarh News: एएमयू की दीवारों पर वृत्तचित्र के पोस्टर चस्पा
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नरेंद्र मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री रहने के दौरान की घटनाओं पर आधारित विवादास्पद वृत्तचित्र से संबंधित गतिविधियां अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय तक पहुंच गई हैं। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय की दीवारों पर इसके प्रदर्शन से संबंधित पोस्ट चस्पा होने से इंतजामिया में हलचल मच गई। इंतजामिया का दावा है कि विश्वविद्यालय की शांति भंग करने की साजिश के तहत पोस्टर बाहरियों ने लगवाए। उन्हें हटवा दिया गया है।
एएमयू में नरेंद्र मोदी से संबंधित वृत्तचित्र के प्रर्दशन को लेकर लेकर कई विश्वविद्यालयों में विवाद हो चुका है। जेएनयू में तो इसे लेकर बवाल हो गया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चोरी-छिपे यह वृत्तचित्र देखने और दिखाने की सूचनाएं तो मिल रही थीं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इससे इन्कार करता आ रहा था। लेकिन बृहस्पतिवार को जब विश्वविद्यालय परिसर में पांच-छह पोस्टर चस्पा मिले।
इनमें बार कोड लगाकर अज्ञात लोगों की ओर से छात्रों को इसे देखने की अपील की गई थी। वृत्तचित्र दो हिस्सों में बना है, जिसका नाम ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ है। यह सीरीज गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों पर आधारित है। इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। पोस्टरों की जानकारी पाकर तो विश्वविद्यालय प्रशासन में खलबली मच गई।
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इस संबंध में अमर उजाला को विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद वसीम अली ने बताया कि दीवारों पर चस्पा पोस्टर हटवा दिए गए हैं। पोस्टर चिपकाने वाले बाहरी हैं। उनका मकसद विश्वविद्यालय की शांति भंग करना है। लेकिन उनकी साजिश सफल नहीं होगी।
धार्मिक नारों के वीडियो की जांच पूरी
एएमयू में गणतंत्र दिवस पर दोनों धर्मों के एनसीसी के छात्रों की ओर से लगाए गए नारों के वीडियो सहित अन्य तथ्यों की जांच पूरी हो गई है।
अल्लाहू अकबर नारा लगाने वाले एनसीसी छात्र को निलंबित किया जा चुका है, जबकि दूसरे वीडियो में राधा रानी, बंशी वाले की जय के उद्घोष हैं। समिति रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
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एएमयू में नरेंद्र मोदी से संबंधित वृत्तचित्र के प्रर्दशन को लेकर लेकर कई विश्वविद्यालयों में विवाद हो चुका है। जेएनयू में तो इसे लेकर बवाल हो गया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चोरी-छिपे यह वृत्तचित्र देखने और दिखाने की सूचनाएं तो मिल रही थीं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इससे इन्कार करता आ रहा था। लेकिन बृहस्पतिवार को जब विश्वविद्यालय परिसर में पांच-छह पोस्टर चस्पा मिले।
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इनमें बार कोड लगाकर अज्ञात लोगों की ओर से छात्रों को इसे देखने की अपील की गई थी। वृत्तचित्र दो हिस्सों में बना है, जिसका नाम ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ है। यह सीरीज गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों पर आधारित है। इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। पोस्टरों की जानकारी पाकर तो विश्वविद्यालय प्रशासन में खलबली मच गई।
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इस संबंध में अमर उजाला को विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद वसीम अली ने बताया कि दीवारों पर चस्पा पोस्टर हटवा दिए गए हैं। पोस्टर चिपकाने वाले बाहरी हैं। उनका मकसद विश्वविद्यालय की शांति भंग करना है। लेकिन उनकी साजिश सफल नहीं होगी।
धार्मिक नारों के वीडियो की जांच पूरी
एएमयू में गणतंत्र दिवस पर दोनों धर्मों के एनसीसी के छात्रों की ओर से लगाए गए नारों के वीडियो सहित अन्य तथ्यों की जांच पूरी हो गई है।
अल्लाहू अकबर नारा लगाने वाले एनसीसी छात्र को निलंबित किया जा चुका है, जबकि दूसरे वीडियो में राधा रानी, बंशी वाले की जय के उद्घोष हैं। समिति रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।