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बेहाल मरीजों को उनके हाल पर डॉक्टरों ने छोड़ा

Sat, 03 Aug 2019 12:26 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2019 12:26 AM IST
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Doctor strike : left patient on his own condition
एनएमसी बिल के विरोध में जेएन मेडिकल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल होने पर इमरजेंसी से मरीज को वाप - फोटो : CITY OFFICE
एनएमसी बिल के विरोध में जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी वजह से मरीजों की परेशानी काफी बढ़ गई है। इमरजेंसी सेवाएं ठप पड़ गई है। उपचार को पहुंचे बेहाल मरीजों को डॉक्टरों ने उनके हाल पर छोड़ दिया।
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जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल के कारण इमरजेंसी के नए मरीजों को भर्ती नहीं किया गया। सुरक्षाकर्मी गेट से ही हड़ताल का हवाला देकर मरीजों को लौटा रहे थे। दूर-दूर से आए मरीज रोते हुए वापस लौटे। सीएमओ ऑफिस पहुंचने वाले कुछ लोगों को जरूर प्राथमिक उपचार दिया गया। कुछ मरीजों को भर्ती भी किया गया। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एवं मेडिसन संकाय के डीन प्रो. एससी शर्मा ने बताया कि ओपीडी सेवाएं प्रभावित नहीं हुई। करीब 2500 मरीज देखे गए। इमरजेंसी में जरूर दिक्कत हुई। रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने रात में जनरल बॉडी मीटिंग कर हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया। आरडीए उपाध्यक्ष डॉ. हमजा मलिक ने बताया कि शुक्रवार सुबह 9 बजे जीबीएम में आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इससे पूर्व दिन में आरडीए सदस्यों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन का पुतला दहन किया। ट्रॉमा सेंटर के समीप प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। डॉक्टरों ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि हम भारत में नहीं उत्तर कोरिया के तानाशाह शासन में रह रहे हैं।
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12 घंटे तक ड्यूटी पर जमें रहे प्रो. रब्बानी
प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ प्रो. एमयू रब्बानी ने हड़ताल के दौरान 12 घंटे कार्य कर जेएन मेडिकल कॉलेज में सुर्खियों में हैं। सुबह 8 से रात 8 बजे तक लगातार ओपीडी एवं इमरजेंसी में डटे रहे। इमरजेंसी में उन्होंने सीएमओ को कह दिया था कि हृदय रोगियों को वापस नहीं करें। मेरे यूनिट में भर्ती कर लें। इसका फायदा यह हुआ कि तीन गंभीर मरीजों को भर्ती किया गया। हृदय घात से पीड़ित अमजद अली नामक एक 65 वर्षीय मरीज को लौटा दिया गया था। उसे जकरिया मार्केट स्थित एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। वहां एंजियाग्राफी एवं अन्य जांच की जरूरत पड़ी तो उसे किसी बड़े अस्पताल में जाने की सलाह दी गई। उसके परिजन सीएमओ आफिस पहुंचे और भर्ती करने का आग्रह किया। प्रो. रब्बानी की सहमति से मरीज को भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया। सीएमओ डॉ. असद ने बताया कि प्रो. रब्बानी के निर्णय की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। उन्होंने चिकित्सकों के समक्ष एक अनुपम उदाहरण पेश किया है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को दिल्ली के सभी प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर थे। ऐसे में आज मरीजों को दिल्ली रेफर करना भी मुश्किल था।
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