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Aligarh: 100 से ज्यादा परिवार उजाड़ने वाला ‘डॉक्टर डेथ’ बेटों को बना रहा डॉक्टर-इंजीनियर,पत्नी को दे चुका तलाक
Fri, 23 May 2025 07:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 23 May 2025 07:09 AM IST
सार
Aligarh Doctor News: अपराध की दुनिया में आने के बाद उसने अपने परिवार को कानून से बचाने के लिए पत्नी को तलाक दे दिया, लेकिन पत्नी के साथ रह रहे अपने दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई।
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Aligarh Doctor Death
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Doctor Death Kidney Racket: सौ से ज्यादा हत्याएं करने वाला कुख्यात डॉ. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ की पारिवारिक कहानी फिल्मी है। अपराध की दुनिया में आने के बाद उसने अपने परिवार को कानून से बचाने के लिए पत्नी को तलाक दे दिया, लेकिन पत्नी के साथ रह रहे अपने दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई। इस समय उसका बड़ा बेटा पुणे के एक बड़े संस्थान से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है जबकि छोटा बेटा भी महाराष्ट्र के ही किसी संस्थान से इंजीनियरिंग कर रहा है।
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डाॅ. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ के राजस्थान से पकड़े जाने के बाद जब गांव पहुंचकर ग्रामीणों व परिवार के लोगों से बातचीत की गई तो वे खुलकर तो ज्यादा कुछ नहीं बोले। बस इतना ही बताया कि आखिरी बार 2020 में फरवरी माह में वह कोविड के समय में गांव आया था। आधा घंटा यहां रुका था। तब उसने बताया था कि पेरोल पर छूटकर आया है।
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उस समय उसने 20 दिन छर्रा थाने में हाजिरी भी लगाई थी। इस बीच जब ग्रामीणों ने उसकी पत्नी व परिवार के अन्य सदस्यों के विषय में पूछा तो बताया कि एक भाई उत्तराखंड में रहता है, जबकि एक भाई सीआईएसएफ में कार्यरत है। वहीं पत्नी के विषय में बताया कि उसकी शादी बीएएमएस शिक्षित होने के चलते कासगंज के एक रेलवे अफसर की बेटी से हुई थी।
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उसके दो बेटे भी हैं। ग्रामीणों व खानदान के सदस्यों ने दबी जुबां से यह बात स्वीकारी कि जब वह कोविड के समय में गांव आया था। तब उसने बातचीत में ये बात स्वीकारी थी कि पत्नी से कानूनी तरीके से लिखा पढ़ी में तलाक ले लिया है। ताकि उसे पुलिस परेशान न करे। दोनों बेटे उसी के पास रहते हैं। मगर यह बात नहीं बताई कि दोनों कहां रहते हैं।
हां, महाराष्ट्र में कहीं उनके होने की चर्चाएं जरूर होती रहीं हैं। मगर इसकी कोई पुष्टि नहीं। बेटों के विषय में इतना जरूर बताया था कि बड़ा बेटा एमबीबीएस कर रहा है और बड़ा डॉक्टर बनेगा। पत्नी बच्चों को पूरा खर्चा भेजता हूं। बेटों की पढ़ाई का खर्च भी संभाल रहा हूं। इसी से उसके शातिराना अंदाज का पता लगाया जा सकता है।
सैनिकों से है हमारे गांव पुरैनी की पहचान, ‘डॉक्टर डेथ’ ने किया बदनाम
अलीगढ़। जिस गांव के लाल प्रवीण चौधरी ने सरहद की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। सैनिकों के गांव के रूप में जिसकी पहचान है, वही पुरैनी गांव आज 'डॉक्टर डेथ' की करतूतों के कारण देशभर में बदनाम हो रहा है। इससे यहां के ग्रामीण आहत हैं। जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर अतरौली-छर्रा मार्ग पर कारगिल के बलिदानी प्रवीण चौधरी का द्वार है।
करीब एक किलोमीटर चलने के बाद पुरैनी गांव में घुसते ही बलिदानी प्रवीण चौधरी का मंदिर है। यहां पूछने पर एक ग्रामीण देवेंद्र के खंडहर हो चुके पुश्तैनी घर का पता तो बता देते हैं, लेकिन कहते हैं कि अखबार और टीवी से उसके बारे में देख-सुन रहे हैं। गांव को उसने बदनाम कर दिया, इसके बाद बिना अपना नाम बताए आगे बढ़ जाते हैं। इसके पीछे उनकी मंशा किसी तरह के विवाद से बचने की रही।
यह प्रतिक्रिया अपने आप बहुत कुछ कह रही है। करीब 2500 की आबादी वाले जाट बहुल गांव में ब्राह्मण, वैश्य, जाटव और खटीक समाज के लोग रहते हैं। इनमें 50 से अधिक सैनिक और पूर्व सैनिकों के परिवार हैं। 26 जून 1999 को प्रवीण चौधरी ने कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में बलिदान दे दिया था। पूर्व प्रधान उधम सिंह के पुत्र सोनू चौधरी बताते हैं कि प्रवीण उनका तहेरा भाई था। पुरैनी की पहचान सही मायनों में सैनिकों के गांव से हैं। देवेंद्र ने तो गांव को बदनाम किया है।