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'डॉक्टर डेथ' की कहानी: 200 लोगों से ले रखा था किडनी ट्रांसप्लांट का एडवांस, मेरठ में करता था ये घिनौना काम
Wed, 21 May 2025 03:28 PM IST
शाहरुख खान
बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़
बृजेश चौहान, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 21 May 2025 03:28 PM IST
सार
डॉक्टर डेथ के गैंग ने 200 लोगों से किडनी ट्रांसप्लांट का एडवांस ले रखा था। कई राज्यों में फैले किडनी रैकेट से उसके तार जुड़े थे। देवेंद्र शर्मा के नाम पर हत्या, लूट और अपहरण जैसे संगीन अपराधों की लंबी फेहरिस्त है।
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डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
100 से ज्यादा लोगों की हत्या करने वाला देवेंद्र शर्मा उर्फ 'डॉक्टर डेथ' और उसके साथी पकड़े जाने से पहले 200 से ज्यादा लोगों से किडनी ट्रांसप्लांट कराने के नाम पर एडवांस रकम ले चुके थे। जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था तब इसका खुलासा हुआ था।
वह 125 लोगों की किडनी अवैध रूप से निकालकर ट्रांसप्लांट करा भी चुका था। उसके तार कई राज्यों में फैले किडनी रैकेट से जुड़े थे। पुरैनी के ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार डॉक्टर देवेंद्र शर्मा ने पटना से बीएएमस करने के बाद छर्रा में क्लीनिक खोला था।
उसका क्लीनिक भी अच्छा चल रहा था। इस दौरान साल 1994 में उसने गैस एजेंसी की डीलरशिप के लिए आवेदन किया। उसे डीलरशिप तो नहीं मिली, किसी ने उससे एजेंसी दिलाने के नाम पर 11 लाख रुपये ठग लिए थे।
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इस नुकसान से वह संभल नहीं पाया और जरायम की दुनिया में कूद गया। उसने छर्रा और अमरोहा में फर्जी गैस एजेंसी खोली और एक गिरोह बना लिया था। यह गिरोह सिलिंडरों से लदे ट्रकों को लूटता और सिलिंडर देवेंद्र अपनी फर्जी गैस एजेंसियों पर बेचता था। इस मामले में वह गिरफ्तार भी हुआ था।
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वह 125 लोगों की किडनी अवैध रूप से निकालकर ट्रांसप्लांट करा भी चुका था। उसके तार कई राज्यों में फैले किडनी रैकेट से जुड़े थे। पुरैनी के ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार डॉक्टर देवेंद्र शर्मा ने पटना से बीएएमस करने के बाद छर्रा में क्लीनिक खोला था।
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उसका क्लीनिक भी अच्छा चल रहा था। इस दौरान साल 1994 में उसने गैस एजेंसी की डीलरशिप के लिए आवेदन किया। उसे डीलरशिप तो नहीं मिली, किसी ने उससे एजेंसी दिलाने के नाम पर 11 लाख रुपये ठग लिए थे।
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इस नुकसान से वह संभल नहीं पाया और जरायम की दुनिया में कूद गया। उसने छर्रा और अमरोहा में फर्जी गैस एजेंसी खोली और एक गिरोह बना लिया था। यह गिरोह सिलिंडरों से लदे ट्रकों को लूटता और सिलिंडर देवेंद्र अपनी फर्जी गैस एजेंसियों पर बेचता था। इस मामले में वह गिरफ्तार भी हुआ था।
जमानत पर आने के बाद वह किड़नी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह से जुड़ गया। यह गिरोह किराये पर टैक्सी बुक करता और चालक की किड़नी निकालकर उसकी हत्या कर देता था और शव कासगंज में हजारा नहर में फेंक देता। पुलिस जांच में भी यह सामने आ चुका है। यह भी बताया जा रहा है कि 200 लोगों से किड़नी ट्रांसप्लांट करने का एडवांस ले चुका था।
लूटे गए वाहनों को मेरठ में बेचता था
देवेंद्र शर्मा के तार मेरठ के वाहनों के कमेले से भी जुड़े थे। गैस सिलिंडरों से लदे ट्रकों से सिलिंडर लूटने के बाद मेरठ के सोतीगंज में बेच देता था। उस समय मेरठ का सोतीगंज वाहनों के कमेले के नाम से बदनाम था। वहां पहुंचते ही चोरी के वाहनों के पुर्जे-पुर्जे कर दिए जाते थे। किड़नी ट्रांसप्लांट करने के लिए टैक्सी बुलाता था। चालक की हत्या करने के बाद उनकी टैक्सी को भी सोतीगंज में ठिकाने लगाता था।
देवेंद्र शर्मा के तार मेरठ के वाहनों के कमेले से भी जुड़े थे। गैस सिलिंडरों से लदे ट्रकों से सिलिंडर लूटने के बाद मेरठ के सोतीगंज में बेच देता था। उस समय मेरठ का सोतीगंज वाहनों के कमेले के नाम से बदनाम था। वहां पहुंचते ही चोरी के वाहनों के पुर्जे-पुर्जे कर दिए जाते थे। किड़नी ट्रांसप्लांट करने के लिए टैक्सी बुलाता था। चालक की हत्या करने के बाद उनकी टैक्सी को भी सोतीगंज में ठिकाने लगाता था।
बरला थाने में दर्ज हुआ था पहला मामला, छर्रा थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है देवेंद्र
अलीगढ़। देवेंद्र अलीगढ़ के थाना छर्रा का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर वर्ष 1994 में पहला मामला थाना बरला में कातिलाना हमले का दर्ज हुआ था। उसके बाद उस पर दर्ज अपराधों की फेहरिस्त बढ़ती गई।
अलीगढ़। देवेंद्र अलीगढ़ के थाना छर्रा का हिस्ट्रीशीटर है। उस पर वर्ष 1994 में पहला मामला थाना बरला में कातिलाना हमले का दर्ज हुआ था। उसके बाद उस पर दर्ज अपराधों की फेहरिस्त बढ़ती गई।
साल 1996 में मथुरा में हत्या का मामला दर्ज हुआ। 1996 में रोजा शाहजहांपुर में लूट, 2001 में पलवल हरियाणा में अपहरण, इसी साल अमरोहा में फर्जी गैस एजेंसी चलाने का मामला दर्ज हुआ। 2002 में बदरपुर में अपहरण, इसी साल अपहरण और हत्या, फरीदाबाद में अपहरण व हत्या, हिंडोन सिटी राजस्थान में हत्या की वारदात की। इसी साल सोरों कासगंज और बांदीकुई राजस्थान में चोरी के साक्ष्य मिटाने में गिरफ्तार हुआ।
2003 में पलवल हरियाणा में अपहरण और हत्या की दो वारदात, 2004 में होडल में हत्या, इसी साल अतरौली में भी हत्या की वारदात की। वर्ष 2014 में फर्जीवाडा कर श्यौराज को जेल भिजवाने का मामला उसके खिलाफ दर्ज किया गया। इसी साल बरला में कारोबारी मयंक गोयल पर जेल से हमला कराने की साजिश, इसी साल से मयंक से रंगदारी मांगने का भी मामला दर्ज किया गया था। साल 2020 में पैरोल आने के बाद भागने का मामला, लालकोठी जयपुर में शून्य अपराध संख्या पर दर्ज हुआ हत्या और लूट का मामला जांच के लिए थाना सासनी जिला हाथरस भेजा गया था।
एक ट्रांसप्लांट के लेता था सात लाख
किडनी ट्रांसप्लांट गैंग का खुलासा 2004 में हुआ था। मुरादाबाद में उस समय पुलिस कप्तान रहे प्रेमप्रकाश ने इस गिरोह को गिरफ्तार किया था। डा. अमित उस समय नेपाल भाग गया था जिसे वहां से गिरफ्तार किया गया था। उस समय जो जानकारी मिली थी उसके मुताबिक वह पांच से सात लाख रुपये ट्रांसप्लांट के लेता था। उस समय भी इस गिरोह ने दिल्ली, यूपी, हरियाणा और पंजाब के उन लोगों से एडवांस ले रखा था जिन्हें किसी अपने की किडनी ट्रांसप्लांट करानी थी।
यह भी पढ़ें: 'डॉक्टर डेथ' की कहानी: छह साल में 125 किडनी ट्रांसप्लांट...किए अनगिनत कत्ल; ऐसे हुई अपराध की दुनिया में एंट्री
किडनी ट्रांसप्लांट गैंग का खुलासा 2004 में हुआ था। मुरादाबाद में उस समय पुलिस कप्तान रहे प्रेमप्रकाश ने इस गिरोह को गिरफ्तार किया था। डा. अमित उस समय नेपाल भाग गया था जिसे वहां से गिरफ्तार किया गया था। उस समय जो जानकारी मिली थी उसके मुताबिक वह पांच से सात लाख रुपये ट्रांसप्लांट के लेता था। उस समय भी इस गिरोह ने दिल्ली, यूपी, हरियाणा और पंजाब के उन लोगों से एडवांस ले रखा था जिन्हें किसी अपने की किडनी ट्रांसप्लांट करानी थी।
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