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बच्चों में नए लक्षण नजर आएं तो न करें नजरअंदाज : डॉ. पियाली

Mon, 17 May 2021 01:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 17 May 2021 01:52 AM IST
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Do not ignore if you see new symptoms in children: Dr. Piyali
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत प्रदेश में संचालित 180 बाल गृहों में रह रहे 18 साल तक के बच्चों को कोरोना से बचाने को लेकर विभागीय कोविड वर्चुअल ग्रुप के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया।
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वेबिनार में एसजीपीजीआई, लखनऊ की वरिष्ठ कंसलटेंट पीडियाट्रिशियन डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने कहा कि इस समय बच्चों में कोई भी नए लक्षण नजर आएं तो उनको नजरअंदाज न किया जाए। बच्चों में डायरिया, उल्टी-दस्त, सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, आंखें लाल होना या सिर व शरीर में दर्द होना, सांसों का तेज चलना आदि कोरोना के लक्षण हो सकते हैं।
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बच्चा यदि पहले से किन्हीं बीमारियों की चपेट में रहा है और कोरोना के भी लक्षण नजर आते हैं तो उसे चिकित्सक के पास ले जाएं। उन्होंने बच्चों का हेल्थ चार्ट बनाने पर जोर दिया। इससे पता चलेगा कि बच्चे को कब आइसोलेट करने की जरूरत है या कब अस्पताल ले जाना है।
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डॉ. पियाली ने कहा कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उनके खाद्य पदार्थों में हरी साग-सब्जी, दाल, मौसमी फल जैसे- तरबूज, खरबूज, नींबू, संतरा आदि को जरूर शामिल करें ताकि शरीर में रोग से लड़ने की ताकत पैदा हो सके।
प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब में डॉ. पियाली ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है, जो बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकती है। बच्चों में मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग और हैंडवाश की आदत डाली जाए। बाल गृहों में हेल्प डेस्क की स्थापना हो और वहां पर हेल्पलाइन नंबरों (1075, 1800112545) और चाइल्ड लाइन नंबर 1098 का प्रदर्शन जरूर हो।

इस अवसर पर महिला कल्याण निदेशक मनोज कुमार राय ने कहा कि कोविड-19 के तहत बाल गृहों में रह रहे बच्चों को पहले से ही विभिन्न आयु वर्ग में विभाजित कर उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है। वेबिनार में प्रदेश के सभी मंडलों के विभागीय अधिकारियों, जिलों के प्रोबेशन अधिकारियों, बाल गृहों के अधीक्षक, केयर टेकर, काउंसलर, नर्सिंग स्टाफ के अलावा सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार), यूनिसेफ व अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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