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Aligarh News: डीएम ने महिला सुरक्षा के लिए दिया मूल मंत्र ’सहेंगे नहीं, कहेंगे’
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कलेक्ट्रेट सभागार में लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिये कार्यशाला
- फोटो : CITY OFFICE
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महिलाओं के खिलाफ होने वाली घरेलू हिंसा, लिंग आधारित हिंसा एवं भेदभाव के उन्मूलन के प्रति जागरूकता के लिए शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें छात्र-छात्राओं, महिलाओं एवं बालिकाओं को दहेज उत्पीड़न, कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, बाल विवाह, अनैतिक व्यापार, पास्को एक्ट एवं हेल्पलाइन नंबर के बारे में जागरूक किया गया।
डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध राष्ट्रीय जेंडर अभियान 25 नवंबर से संचालित है, जो 22 दिसंबर तक चलेगा। उन्होंने कहा कि महिला, पुरुष एवं ट्रांसजेंडर के प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना है। उन्होंने सभी के लिए स्लोगन ’सहेंगे नहीं, कहेंगे,’ ’नई चेतना, पहल बदलाव की’ देते हुए कहा कि जो आपको अच्छा नहीं लगता उसके विरुद्ध आवाज जरूर उठाएं।
डीएम ने कहा कि आप द्वारा पहले अपराध को न रोकना ही दूसरे अपराध को बढ़ावा देता है। जिस दिन आप अपने प्रति हो रहे उत्पीड़न को बर्दाश्त करना छोड़ देंगे, उसी दिन उत्पीड़न बंद हो जाएगा। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि घर में बेटा-बेटी में होने वाले भेद को समाप्त करें। इससे लैगिंक असमानता समाप्त करने को बल मिलेगा।
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जिला महिला कल्याण अधिकारी स्मिता सिंह ने बताया कि बाल विवाह निरोधक अधिनियम 1929 के बाद बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है। जिसके तहत बाल विवाह पर रोक लगाने, पीड़ितों को राहत देने और इस तरह के विवाह को बढ़ावा देने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। इसमें दोषी पाए जाने पर दो साल का कठोर कारावास या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों हो सकता है।
पॉक्सो एक्ट 2012 अधिनियम बनाने का उद्देश्य यौन अपराधों से बच्चों को संरक्षण देना है। उन्होंने महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के बारे में बताया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1090 वूमेन पावर लाइन, 181 महिला हेल्पलाइन, 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112 पुलिस आपातकालीन सेवा, 1098 चाइल्ड लाइन, 102 स्वास्थ्य सेवाओं एवं 108 एंबुलेंस सेवाओं की भी जानकारी दी गई है।
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डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध राष्ट्रीय जेंडर अभियान 25 नवंबर से संचालित है, जो 22 दिसंबर तक चलेगा। उन्होंने कहा कि महिला, पुरुष एवं ट्रांसजेंडर के प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना है। उन्होंने सभी के लिए स्लोगन ’सहेंगे नहीं, कहेंगे,’ ’नई चेतना, पहल बदलाव की’ देते हुए कहा कि जो आपको अच्छा नहीं लगता उसके विरुद्ध आवाज जरूर उठाएं।
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डीएम ने कहा कि आप द्वारा पहले अपराध को न रोकना ही दूसरे अपराध को बढ़ावा देता है। जिस दिन आप अपने प्रति हो रहे उत्पीड़न को बर्दाश्त करना छोड़ देंगे, उसी दिन उत्पीड़न बंद हो जाएगा। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि घर में बेटा-बेटी में होने वाले भेद को समाप्त करें। इससे लैगिंक असमानता समाप्त करने को बल मिलेगा।
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जिला महिला कल्याण अधिकारी स्मिता सिंह ने बताया कि बाल विवाह निरोधक अधिनियम 1929 के बाद बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है। जिसके तहत बाल विवाह पर रोक लगाने, पीड़ितों को राहत देने और इस तरह के विवाह को बढ़ावा देने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। इसमें दोषी पाए जाने पर दो साल का कठोर कारावास या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों हो सकता है।
पॉक्सो एक्ट 2012 अधिनियम बनाने का उद्देश्य यौन अपराधों से बच्चों को संरक्षण देना है। उन्होंने महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के बारे में बताया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1090 वूमेन पावर लाइन, 181 महिला हेल्पलाइन, 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112 पुलिस आपातकालीन सेवा, 1098 चाइल्ड लाइन, 102 स्वास्थ्य सेवाओं एवं 108 एंबुलेंस सेवाओं की भी जानकारी दी गई है।