फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   'Directions' to women giving Padman of Aligarh

अलीगढ़ के पैडमैन दे रहे महिलाओं को ‘दिशा’

Thu, 28 Dec 2017 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Thu, 28 Dec 2017 02:33 AM IST
विज्ञापन
'Directions' to women giving Padman of Aligarh
सैनेटरी पैड बनाने के लिए प्रेस मशीन पर पैड को पुश करती महिला कर्मी। - फोटो : Amar Ujala
आशीष निगम
विज्ञापन

महिलाओं के मासिक चक्र पर महिलाएं भी खुल कर बात नहीं करती हैं। अभी तक आधी से अधिक आबादी में ये नितांत व्यक्तिगत समस्या बनी हुई है, भले ही छात्राओं की पढ़ाई छूट जाए या किसी महिला को कोई गंभीर बीमारी लग जाए। अब इसको लेकर थोड़ी-थोड़ी जागरूकता जरूर बढ़ रही है। स्कूलों से लेकर अस्पताल तक महिलाओं को माहवारी के दौरान साफ सफाई के तरीके बताए जाने लगेे हैं। अभिनेता अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म ‘पैडमैन’ 26 जनवरी को रिलीज हो रही है। इसमें महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड की उपयोगिता और इसके इस्तेमाल पर पूरी कहानी रची गई है। अलीगढ़ में भी ऐसे ही एक पैडमैन हैं देशराज गिरि, जो दो साल से पंचायत उद्योग विभाग के सहयोग से खुद सेनेटरी पैड बनाने की फैक्ट्री संचालित कर महिलाओं को ‘दिशा’ नाम से सस्ते से सस्ते पैड उपलब्ध करा रहे हैं।

यह फैक्ट्री मंजूरगढ़ी पंचायत उत्पादन केंद्र में वर्ष 2015 से संचालित है। प्रतिदिन यहां एक हजार पैड बनते हैं। यहां पर सैनेटरी पैड के साथ मेटरनिटी पैड भी बनते हैं, जो प्रसव के दौरान इस्तेमाल होता है। देशराज गिरि अस्पतालों, स्कूलों और गांवों में पैड के इस्तेमाल का प्रचार कर रहे हैं। उनका दर्द यह है कि स्वच्छता का मिशन चलाने वाली सरकार ने इस पर 12 फीसदी जीएसटी लागू किया है। अगर ये जीएसटी हट जाए तो एक पैड की कीमत दो रुपये हो जाएगी। अभी यह ढाई रुपये की कीमत का पड़ रहा है। इसकी तुलना में एक ब्रांडेड पैड लगभग दोगुनी कीमत का पड़ता है।
विज्ञापन


यह भी जानें 
1-उत्तर प्रदेश में पहली बार जनपद महोबा की जिलाधिकारी रहीं डॉ. काजल सिंह ने पंचायत राज विभाग के माध्यम से इसके उत्पादन की शुरुआत कराई थी। 
2-वर्ष 2015 में अलीगढ़ मंडल में पंचायत राज विभाग के सहयोग से मंजूरगढ़ी पंचायत उत्पादन केंद्र में पहली बार उत्पादन की शुरुआत हुई। चार महिलाओं को काम पर लगाया गया।   
विज्ञापन
विज्ञापन


एसे बनती है ब्रांडेड पैड
1-ठंडे देशों में पैदा होने वुडपल्प के पेड़ की लकड़ी के गुदे में पानी सोखने से क्षमता बहुत अच्छी होती है। सेनेटरी पैड में इसको रुई की तरह इस्तेमाल करने के लिए मशीन में धुन कर तैयार करते है। एक पैड में 9 ग्राम वुड पल्प का इस्तेमाल होता है। वुड पल्प 65 रुपये किलो मिलता है। एक किलो में लगभग 110 पैड बनते हैं।
2-नौ ग्राम की वुड पल्प को तौलने के बाद उसे कंप्रैश कर एक पट्टी की तरह पैड बना दिया जाता है। ये काम प्रेस मशीन करती है। प्रेस मशीन से निकलने के बाद इसको दो पर्तों के बीच सील कर दिया जाता है, ये काम मशीन करती है। इसमें पहली पर्त यानी बैक लेयर हायली डिग्रेडबिल पीवीसी की होती है, जो धूप में खुद ब खुद नष्ट हो जाती है। एक पैड में दो ग्राम पीवीसी लगती है। दूसरी पर्त फ्रंट लेयर नान विवेन काटन की होती है, ये भी दो ग्राम की होती है। 

3-सीलिंग के बाद तैयार पैड को यूबी ट्रिटेेड मशीन में डाल कर जीवाणुरहित कर दिया जाता है ताकि पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह का हानिकारण जीवीणु-कीटाणु पैड में रह न जाए। वहां से निकालने के बाद इसकी फ्रंट लेयर पर एक एडहेसिव लगा कर इसके ऊपर एक स्टीकर लगता है। इस स्टीकर का हटा कर ही महिलाएं इसे इस्तेमाल करती हैं। 
 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed