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कोरोना काल में जिले का विकास ठप
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आशीष श्रीवास्तव, अलीगढ़।
कोरोना काल में देशभर के उद्योगों पर असर पड़ा है तो जिले का विकास भी ठप हो गया है। विशेष रूप से मनरेगा से ग्रामीण इलाकों में होने वाले विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नए वित्तीय वर्ष में तालाब खुदाई से लेकर चक रोड, नाली समेत अन्य सैकड़ों कार्य अब तक शुरू भी नहीं हो सके हैं।
प्रधानों की सरकार का गठन नहीं हो सका है, वहीं अफसर कोरोना महामारी के राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं। बीमारी के भय से मनरेगा श्रमिक घरों में दुबके बैठे हैं। ऐसे में महामारी के काबू में आने तक यह काम हाल फिलहाल में शुरू हो पाने में भी संदेह ही है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा से होने वाले प्रमुख काम
-211 तालाबों की खुदाई
-900 से अधिक ग्रामीण संपर्क मार्गों का मिट्टीकरण
-1200 से अधिक चक रोड व नाली निर्माण
-पौधरोपण के लिए गढ्ढे खुदाई के काम
-विलुप्त नीम व सेंगर नदी खुदाई का काम
घरों में बंद हैं मनरेगा श्रमिक
कोरोना के भय से मनरेगा श्रमिक घरों में बंद हैं और बुलाने से भी नहीं आ रहे। इस वित्तीय वर्ष के 52 दिन गुजरने के बावजूद मात्र 70089 मानव दिवस इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। बताते चलें कि पिछले साल ग्रामीण इलाकों में कोरोना का प्रसार कम होने के कारण 22 मई तक 98754 मानव दिवस सृजित हो गए थे। इससे पहले के सालों में इनकी संख्या 1 लाख से अधिक ही रही है।
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अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही हुआ काम
मनरेगा से जुड़े एक अफसर ने बताया कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही ग्राम पंचायतों में पिछले वित्तीय वर्ष के अवशेष काम चले। अधिकांश मानव दिवस तभी के हैं। 17 अप्रैल से पंचायत चुनाव के नामांकन शुरू होने के बाद से काम ठप है।
- कोरोना के असर के चलते मनरेगा मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं। अब बीमारी थोड़ा नियंत्रण में आती दिख रही है। जल्द ही जिले में विशेष अभियान चलाकर मनरेगा श्रमिकों को अधिक से अधिक काम दिलाया जाएगा। - सचिन कुमार, प्रभारी उपायुक्त मनरेगा
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कोरोना काल में देशभर के उद्योगों पर असर पड़ा है तो जिले का विकास भी ठप हो गया है। विशेष रूप से मनरेगा से ग्रामीण इलाकों में होने वाले विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नए वित्तीय वर्ष में तालाब खुदाई से लेकर चक रोड, नाली समेत अन्य सैकड़ों कार्य अब तक शुरू भी नहीं हो सके हैं।
प्रधानों की सरकार का गठन नहीं हो सका है, वहीं अफसर कोरोना महामारी के राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं। बीमारी के भय से मनरेगा श्रमिक घरों में दुबके बैठे हैं। ऐसे में महामारी के काबू में आने तक यह काम हाल फिलहाल में शुरू हो पाने में भी संदेह ही है।
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वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा से होने वाले प्रमुख काम
-211 तालाबों की खुदाई
-900 से अधिक ग्रामीण संपर्क मार्गों का मिट्टीकरण
-1200 से अधिक चक रोड व नाली निर्माण
-पौधरोपण के लिए गढ्ढे खुदाई के काम
-विलुप्त नीम व सेंगर नदी खुदाई का काम
घरों में बंद हैं मनरेगा श्रमिक
कोरोना के भय से मनरेगा श्रमिक घरों में बंद हैं और बुलाने से भी नहीं आ रहे। इस वित्तीय वर्ष के 52 दिन गुजरने के बावजूद मात्र 70089 मानव दिवस इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। बताते चलें कि पिछले साल ग्रामीण इलाकों में कोरोना का प्रसार कम होने के कारण 22 मई तक 98754 मानव दिवस सृजित हो गए थे। इससे पहले के सालों में इनकी संख्या 1 लाख से अधिक ही रही है।
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अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही हुआ काम
मनरेगा से जुड़े एक अफसर ने बताया कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही ग्राम पंचायतों में पिछले वित्तीय वर्ष के अवशेष काम चले। अधिकांश मानव दिवस तभी के हैं। 17 अप्रैल से पंचायत चुनाव के नामांकन शुरू होने के बाद से काम ठप है।
- कोरोना के असर के चलते मनरेगा मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं। अब बीमारी थोड़ा नियंत्रण में आती दिख रही है। जल्द ही जिले में विशेष अभियान चलाकर मनरेगा श्रमिकों को अधिक से अधिक काम दिलाया जाएगा। - सचिन कुमार, प्रभारी उपायुक्त मनरेगा