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ठंड से ग्रामीण की मौत, मासूम हुए अनाथ
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Tue, 16 Jan 2018 02:14 AM IST
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बिस्तर के नाम पर पड़ा हुआ पुआल।
- फोटो : Amar Ujala
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ठंड लगने से कोल तहसील के गांव भुवनगढ़ी निवासी जंगजीत (45) की ठंड लगने से मौत हो गई। सोमवार को तड़के करीब पांच बजे बेटी द्रोपा देवी (10) और बेटे धर्मपाल (12) ने पिता को जगाने की कोशिश की। जब वह नहीं उठा तो पास ही रहने वाले चाचा चंद्रपाल को जानकारी दी। चंद्रपाल पड़ोसियों के साथ टूटी छत वाली जर्जर कोठरी में पहुंचा तो चारपाई पर पुआल के ऊपर जंगजीत का शव पड़ा था। चारपाई पर बिछाने के लिए बिस्तर तक नहीं थे। उधर अमर उजाला ने जब एसडीएम को जानकारी दी तब गांव में राजस्व टीम पहुंची और मृतक के मासूम बच्चों को दो कंबलों की मदद देकर चली गई।
जंगजीत की पत्नी की मौत कई साल पहले हो चुकी है। तीन बच्चाें को लेकर जर्जर कोठरी में जिंदगी की जंग लड़ रहा था, लेकिन ठंड ने बच्चों के सिर से पिता का साया भी छीन लिया। मृतक के दोनों बच्चों और पड़ोसियों ने बताया कि उसे कोई बीमारी नहीं थी। परिजन एवं ग्रामीण ठंड लगने से मौत की बात कह रहे हैं। ग्राम प्रधान तहसील खां ने सुबह छह बजे ही लेखपाल अजय सिंह को ठंड से किसान की मौत की जानकारी दी, लेकिन दोपहर दो बजे तक लेखपाल गांव नहीं पहुंचे। इस सूचना पर अमर उजाला ने एसडीएम कोल को जानकारी दी, जिसके बाद दो राजस्व कर्मी गांव पहुंचे और कागजी कार्रवाई करते हुए मृतक के बच्चों को कंबल देकर सरकारी मदद का आश्वासन दिया।
खिड़की पर पल्ले नहीं, ठंडी हवा सीधे कोठरी में
तीन बच्चों के साथ जंगजीत जिस कोठरी में रहता था, वह दस फुट लंबी और छह फुट चौड़ी है। खिड़की के जंगले में पल्ले तक नहीं है। ठंडी हवा सीधे कोठरी में घुसती है। यह कोठरी ही रसोई, स्नानघर है। अंदर एक ही चारपाई है, जिस पर बिछौने के नाम पर धान का पुआल बिछा था। पड़ोसियों ने बच्चाें के ओढ़ने के लिए चादर, कंबल दे दिए थे। इसी चारपाई पर जंगजीत बच्चों को लेकर सोता था। बच्चों को ढकने के बाद बचे कपड़े में खुद को किसी तरह ठंड से बचाता था।
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अंतिम दर्शन नहीं कर पाया बड़ा बेटा
महज दो बीघे खेत और जरूरत के लिए खाना, कपड़े तक न होने के चलते जंगजीत ने बड़े लड़के लालू (16) को कुछ दिन पहले गांव के लोगों के साथ मजदूरी करने के लिए बाहर भेज दिया था। वह पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सका। ग्राम प्रधान तहसील खां ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में जंगजीत ने मकान की मांग की थी, जिस पर चार माह पूर्व सत्यापन कराते हुए प्रस्ताव भेज दिया था।
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जंगजीत की पत्नी की मौत कई साल पहले हो चुकी है। तीन बच्चाें को लेकर जर्जर कोठरी में जिंदगी की जंग लड़ रहा था, लेकिन ठंड ने बच्चों के सिर से पिता का साया भी छीन लिया। मृतक के दोनों बच्चों और पड़ोसियों ने बताया कि उसे कोई बीमारी नहीं थी। परिजन एवं ग्रामीण ठंड लगने से मौत की बात कह रहे हैं। ग्राम प्रधान तहसील खां ने सुबह छह बजे ही लेखपाल अजय सिंह को ठंड से किसान की मौत की जानकारी दी, लेकिन दोपहर दो बजे तक लेखपाल गांव नहीं पहुंचे। इस सूचना पर अमर उजाला ने एसडीएम कोल को जानकारी दी, जिसके बाद दो राजस्व कर्मी गांव पहुंचे और कागजी कार्रवाई करते हुए मृतक के बच्चों को कंबल देकर सरकारी मदद का आश्वासन दिया।
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खिड़की पर पल्ले नहीं, ठंडी हवा सीधे कोठरी में
तीन बच्चों के साथ जंगजीत जिस कोठरी में रहता था, वह दस फुट लंबी और छह फुट चौड़ी है। खिड़की के जंगले में पल्ले तक नहीं है। ठंडी हवा सीधे कोठरी में घुसती है। यह कोठरी ही रसोई, स्नानघर है। अंदर एक ही चारपाई है, जिस पर बिछौने के नाम पर धान का पुआल बिछा था। पड़ोसियों ने बच्चाें के ओढ़ने के लिए चादर, कंबल दे दिए थे। इसी चारपाई पर जंगजीत बच्चों को लेकर सोता था। बच्चों को ढकने के बाद बचे कपड़े में खुद को किसी तरह ठंड से बचाता था।
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अंतिम दर्शन नहीं कर पाया बड़ा बेटा
महज दो बीघे खेत और जरूरत के लिए खाना, कपड़े तक न होने के चलते जंगजीत ने बड़े लड़के लालू (16) को कुछ दिन पहले गांव के लोगों के साथ मजदूरी करने के लिए बाहर भेज दिया था। वह पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सका। ग्राम प्रधान तहसील खां ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में जंगजीत ने मकान की मांग की थी, जिस पर चार माह पूर्व सत्यापन कराते हुए प्रस्ताव भेज दिया था।