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अलीगढ़ : बेटी तो वापस नहीं आ सकती, मगर सजा से सुकून मिला

Fri, 13 May 2022 01:18 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 01:18 AM IST
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Daughter can't come back, but got relief from punishment
मिशन शक्ति अभियान के तहत पुलिस व अभियोजन द्वारा लगातार मुकदमों में ठोस व त्वरित पैरवी का अभियान चलाया जा रहा है, मगर बच्ची के परिवार को उम्मीद न थी कि इतनी जल्दी मुकदमे में सजा हो जाएगी। बृहस्पतिवार को जब फैसला आया तो वे पुलिस व अपने वकीलों का आभार जताते न थक रहे थे। बस एक ही बात कही कि बेटी तो वापस नहीं आ सकती, मगर दिल को कुछ सुकून जरूर मिला है।
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पीड़ित परिवार मजदूरी करता है। दोषी भी मजदूरी करता था। घटना वाले दिन वह सुबह से ही शराब के नशे में था। वह पीड़ित की दोनों बच्चियों को कुरकुरे दिलाने ले गया था, मगर उसने एक बच्ची को घर भेज दिया, जबकि दूसरी को एकांत में ले गया, जहां उसके साथ इस दरिंदगी को अंजाम दिया। वजह सिर्फ नशे में थी। उसने इस कदर बेरहमी से कत्ल किया, जिसकी गवाही खुद बच्ची के शव पर आई चोट व डॉक्टरों ने अदालत में दी। इधर, पुलिस के सामने इकबालिया जुर्म व न्यायालय के समक्ष 164 के बयान में भी दोषी ने अपना जुर्म स्वीकारा। मगर ट्रायल शुरू होते ही वह अपने आरोप से मुकर गया और इसे साजिश व रंजिश के तहत फंसाया गया है।
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परिवार में संतोष, आरोपी पक्ष परिवार सहित गायब
इस घटना के बाद कस्बा इगलास में पीड़ित परिवार के अन्य सभी सदस्यों में संतोष दिखाई दिया। घर पर मौजूद बेटी के चाचा ने बताया कि न्यायालय से इसी तरह के न्याय की उम्मीद थी। बहुत अच्छा हुआ है। वहीं, दोषी का परिवार घर पर ताला लगाकर गायब है। बताया गया है कि घर में सिर्फ उसके माता-पिता हैं। वे कहां गए, किसी को नहीं मालूम है। इधर, मृत बच्ची का पिता मजदूरी करता है। उसके चार बच्चों में मृत बच्ची तीसरे नंबर की थी। दो बेटे व एक बेटी और है।
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इंस्पेक्टर इगलास ने ली रुचि, सिर्फ 13 तारीखों में कराई सजा
पुलिस द्वारा इस प्रकरण को शासन की सौ दिन के काम की मंशा के अनुसार एसएसपी की नियमित निगरानी में लिया गया। इसी का परिणाम रहा कि मात्र 13 कार्य दिवस में ये सजा हुई है। इस प्रकरण में खुद इंस्पेक्टर इगलास रिपुदमन सिंह ने भी निजी रुचि ली है। इससे पहले कासगंज के सोरों में वर्ष 2019 में रिपुदमन ने इसी तरह एक दुष्कर्म के मामले में 21 दिन में सजा दिलाई थी। रिपुदमन सिंह के अनुसार इस प्रकरण में एक तारीख में आरोप तय हुए। नौ तारीखों में गवाही हुईं। दो तारीखों में बचाव पक्ष के बयान व गवाही हुई।
- मिशन शक्ति अभियान के तहत शासन की मंशा के अनुरूप पुलिस व अभियोजन टीमें अपना काम कर रही हैं। लगातार ऐसे प्रकरणों की निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में ये सजा हुई है। इससे पहले भी कई सजाएं हुई हैं। आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।

- कलानिधि नैथानी, एसएसपी
मिशन शक्ति में ये हुईं सजाएं--
- 169 सजाएं अप्रैल 2021 से दिसंबर 2021 तक जिले में हुई हैं।
- 35 सजाएं उम्रकैद तक, 20 सजाएं 10 वर्ष तक, 89 सजाएं 10 वर्ष से कम।
- 25 सजाएं मिशन शक्ति के ताजा अभियान में अभी तक हुई हैं।
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इस कदर बेरहमी से किया कत्ल
इस बच्ची के शव का तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया था। डॉक्टरों ने अपनी गवाही के दौरान बताया था कि बच्ची के सिर, माथे की चोटों के निशान इस बात की गवाही दे रहे थे कि उसे कितनी बेरहमी से मारा गया होगा। माथे की हड्डी तक दिखाई दे रही थी। गर्दन में खून उतर आया था।
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