{"_id":"583ddc114f1c1b0e1ede6637","slug":"dahale-ke-pathash-ala","type":"story","status":"publish","title_hn":"बदहाली की पाठश्ााला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बदहाली की पाठश्ााला
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Wed, 30 Nov 2016 01:40 AM IST
विज्ञापन
बदहाली की पाठश्ााला
- फोटो : Dig Vishal
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यहां के भी ज्यादातर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की स्थिति बदहाल है। शहर में ही डेढ़ दर्जन से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं। जहां बिजली और शौचालय तक नहीं हैं। बच्चों कोे खाने को एमडीएम तो मिलता है, लेकिन पानी पीने के लिए उन्हें काफी दूर जाना पड़ता है, क्योंकि स्कूलों में नल ही नहीं है। जो स्कूल किराए के भवनों में चल रहे हैं। उन भवनों की हालत बेहद जर्जर है। मंगलवार को जब अमर उजाला की टीम ने शहर के आठ स्कूलों की स्थिति देखी तो यह यह हालात देखने को मिला कि जैसे शिक्षा के नाम पर बेसिक शिक्षा महकमा महज लकीर पीट रहा हो और बच्चे शिक्षित होने के लिए कोई सजा भुगत रहे हों। यही नहीं एक किराए के एक कमरे में तो दो स्कूल संचालित होते हुए मिले।
अंधेरे में पढ़ने को मजबूर है देश का भविष्य
शहर के बेगपुर स्थित प्राथमिक पाठशाला संख्या 60 में सुबह 10 बजे वहां तैनात सहायक अध्यापिका गरिमा रानी बच्चों को पढ़ाते हुए मिली। इस विद्यालय की हालत दयनीय थी। किराए के दो कमरों में चल रहे इस विद्यालय में न बिजली है और न पानी की व्यवस्था। शौचालय भी नहीं है। कक्षा एक से पांच तक के बच्चे एक साथ बैठ कर पढ़ते हैं। अध्यापिका गरिमा का कहना था कि यहां कई दशक से विद्यालय का यही हाल है। कई बार विद्यालय को निजी भूमि पर बनाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन जमीन ही नहीं मिली है।
बोर्ड तक नहीं लगा किराए के कमरे में चल रहे स्कूल
इससे थोड़ी दूरी पर जीवनगढ़ मोहल्ले में प्राइमरी पाठशाला 61 की दशा तो और खराब मिली। वहां महज एक किराए के कमरे में स्कूल संचालित होता मिला। उस कमरे के बाहर भी प्राइमरी पाठशाला का बोर्ड नहीं लगा था। देखने से लगा ही नहीं कि वहां कोई स्कूल संचालित है। इस विद्यालय में 40 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है, लेकिन सोमवार को साढ़े 10 बजे तक केवल 13 बच्चे ही मौजूद थे। यहां भी न बिजली थी और न पानी की व्यवस्था थी। अध्यापिका रेशमा तलत ने बताया कि करीब 35 साल से वह देख रही हैं कि इस स्कूल में बिजली, पानी और शौचालय नहीं है। बच्चों ने भी बताया कि एमडीएम खाकर उन्हें पानी पीने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।
विज्ञापन
गड्ढे वाले स्कूल के फर्श पर बैठते हैं बच्चे
शहर ही प्राइमरी पाठशाला लढिया पीलीकोठी में बेसिक शिक्षा महकमे की खुद की बिल्डिंग में चार विद्यालय संचालित हैं। यहां पर प्राइमरी पाठशाला संख्या 4, प्राइमरी पाठशाला संख्या 6, 11 और 23 के बच्चे पढ़ते हैं। दोपहर साढ़े 11 बजे यहां भी एक ही साथ सभी क्लासों के बच्चे बैठे थे। जिन टाट पट्टियों पर यह बच्चे बैठे थे। उनसे भी विद्यालय के फर्श में हो रहे गड्ढे छिप नहीं रहे थे। विद्यालय का एक कक्ष तो काफी जर्जर हालत में था। अध्यापिका अनुराधा का कहना है कि बिजली न होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दूसरी अध्यापिका शगुफ्ता का कहना था कि विद्यालय में बच्चोें के लिए जो एमडीएम आता है। उसका स्तर ठीक नहीं है।
एक ही कमरे में चल रहे दो परिषदीय स्कूल
सराय काले खां के प्राथमिक विद्यालय का हाल तो बहुत ही बुरा है। दोपहर साढ़े 12 बजे यहां पंचायती भवन के एक किराए के महज एक कमरे में एक नहीं बल्कि दो विद्यालय संचालित थे। यहां प्राइमरी पाठशाला 43 व 58 दोनों के बच्चे एक ही कमरे में मौजूद थे। दोनों स्कूलों के 64 पंजीकृत बच्चों में से 40 विद्यालय में आए थे। विद्यालय में न बिजली थी और न पानी। शौचालय भी अक्रियाशील था। यहां के हेडमास्टर मंजर अली ने बताया कि पिछले दिनों प्राइमरी पाठशाला 43 को भी इसी कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। उनका कहना था कि कई दशक से यह विद्यालय यहीं किराए के कमरे में चल रहा है। एक बच्ची से जब यह पूछा गया कि उसे ड्रेस मिली है तो उसने न में उत्तर दिया।
जब-जब शासन बजट भेजता है। विद्यालयों में सुधार के काम होते है। शहर के 16 विद्यालय किराए के भवनों में चल रहे हैं। इनके लिए भूमि नहीं मिल रही। देहात में जिन स्कूलों में बिजली नहीें है। अब उम्मीद है कि उन विद्यालयों का विद्युतीकरण जल्दी ही हो जाएगा। विभाग के अपने विद्यालयों में भवनों में संचालित विद्यालयों में शौचालय आदि की समस्या नहीं है।
बीबी पांडेय सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक)
विज्ञापन
अंधेरे में पढ़ने को मजबूर है देश का भविष्य
शहर के बेगपुर स्थित प्राथमिक पाठशाला संख्या 60 में सुबह 10 बजे वहां तैनात सहायक अध्यापिका गरिमा रानी बच्चों को पढ़ाते हुए मिली। इस विद्यालय की हालत दयनीय थी। किराए के दो कमरों में चल रहे इस विद्यालय में न बिजली है और न पानी की व्यवस्था। शौचालय भी नहीं है। कक्षा एक से पांच तक के बच्चे एक साथ बैठ कर पढ़ते हैं। अध्यापिका गरिमा का कहना था कि यहां कई दशक से विद्यालय का यही हाल है। कई बार विद्यालय को निजी भूमि पर बनाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन जमीन ही नहीं मिली है।
विज्ञापन
बोर्ड तक नहीं लगा किराए के कमरे में चल रहे स्कूल
इससे थोड़ी दूरी पर जीवनगढ़ मोहल्ले में प्राइमरी पाठशाला 61 की दशा तो और खराब मिली। वहां महज एक किराए के कमरे में स्कूल संचालित होता मिला। उस कमरे के बाहर भी प्राइमरी पाठशाला का बोर्ड नहीं लगा था। देखने से लगा ही नहीं कि वहां कोई स्कूल संचालित है। इस विद्यालय में 40 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है, लेकिन सोमवार को साढ़े 10 बजे तक केवल 13 बच्चे ही मौजूद थे। यहां भी न बिजली थी और न पानी की व्यवस्था थी। अध्यापिका रेशमा तलत ने बताया कि करीब 35 साल से वह देख रही हैं कि इस स्कूल में बिजली, पानी और शौचालय नहीं है। बच्चों ने भी बताया कि एमडीएम खाकर उन्हें पानी पीने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।
विज्ञापन
गड्ढे वाले स्कूल के फर्श पर बैठते हैं बच्चे
शहर ही प्राइमरी पाठशाला लढिया पीलीकोठी में बेसिक शिक्षा महकमे की खुद की बिल्डिंग में चार विद्यालय संचालित हैं। यहां पर प्राइमरी पाठशाला संख्या 4, प्राइमरी पाठशाला संख्या 6, 11 और 23 के बच्चे पढ़ते हैं। दोपहर साढ़े 11 बजे यहां भी एक ही साथ सभी क्लासों के बच्चे बैठे थे। जिन टाट पट्टियों पर यह बच्चे बैठे थे। उनसे भी विद्यालय के फर्श में हो रहे गड्ढे छिप नहीं रहे थे। विद्यालय का एक कक्ष तो काफी जर्जर हालत में था। अध्यापिका अनुराधा का कहना है कि बिजली न होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दूसरी अध्यापिका शगुफ्ता का कहना था कि विद्यालय में बच्चोें के लिए जो एमडीएम आता है। उसका स्तर ठीक नहीं है।
एक ही कमरे में चल रहे दो परिषदीय स्कूल
सराय काले खां के प्राथमिक विद्यालय का हाल तो बहुत ही बुरा है। दोपहर साढ़े 12 बजे यहां पंचायती भवन के एक किराए के महज एक कमरे में एक नहीं बल्कि दो विद्यालय संचालित थे। यहां प्राइमरी पाठशाला 43 व 58 दोनों के बच्चे एक ही कमरे में मौजूद थे। दोनों स्कूलों के 64 पंजीकृत बच्चों में से 40 विद्यालय में आए थे। विद्यालय में न बिजली थी और न पानी। शौचालय भी अक्रियाशील था। यहां के हेडमास्टर मंजर अली ने बताया कि पिछले दिनों प्राइमरी पाठशाला 43 को भी इसी कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। उनका कहना था कि कई दशक से यह विद्यालय यहीं किराए के कमरे में चल रहा है। एक बच्ची से जब यह पूछा गया कि उसे ड्रेस मिली है तो उसने न में उत्तर दिया।
जब-जब शासन बजट भेजता है। विद्यालयों में सुधार के काम होते है। शहर के 16 विद्यालय किराए के भवनों में चल रहे हैं। इनके लिए भूमि नहीं मिल रही। देहात में जिन स्कूलों में बिजली नहीें है। अब उम्मीद है कि उन विद्यालयों का विद्युतीकरण जल्दी ही हो जाएगा। विभाग के अपने विद्यालयों में भवनों में संचालित विद्यालयों में शौचालय आदि की समस्या नहीं है।
बीबी पांडेय सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक)