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पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर की थी सुखवीर की हत्या
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Wed, 20 Jun 2018 01:37 AM IST
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पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर की थी सुखवीर की हत्या
- फोटो : Rupesh
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पालीमुकीमपुर थाना क्षेत्र के गांव दीनापुर में हुई सुखवीर की हत्या उसकी पत्नी के इशारे और उसी की मुखबिरी से हुई थी। यह खुलासा पुलिस ने करते हुए उसकी पत्नी व उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि इस मामले में पहले पुलिस ने एक नामजद को जेल भेजा था। मगर जांच में यह बात भी सामने आई कि नामजद के अलावा पत्नी व उसका प्रेमी भी हत्या में शामिल थे। वजह साफ थी कि हत्या के वक्त बगल की चारपाई पर सुखवीर की पत्नी सोयी हुई थी और उसे गोली चलने से लेकर आरोपियों को पहचानने तक के किसी सवाल का जवाब नहीं था। इस दिशा में काम करते हुए पुलिस ने जब साक्ष्य तलाशते हुए सब कुछ साफ हो गया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचे के अलावा वह मोबाइल भी बरामद किया है, जिसकी मदद से सुखवीर की लोकेशन आरोपियों को मिलती रही।
एसएसपी अजय कुमार साहनी ने पुलिस कार्यालय पर प्रेसवार्ता में बताया कि 12/13 जून की रात हुई हत्या में सुखवीर की मां ने गांव के रामअवतार शास्त्री आदि को पुरानी रंजिश में नामजद किया। पुलिस ने शास्त्री को जेल भेज दिया। मगर दौरान-ए-जांच यह तथ्य सामने आया कि पत्नी बगल की चारपाई पर सोयी थी और उसे कुछ नहीं पता। पूछताछ में वह रोने के अलावा कुछ नहीं बोल पा रही थी। जब अधिकारियों के निर्देश पर उससे सख्ती से पूछताछ हुई और उसके पास मिले मोबाइल नंबर की सर्विलांस से कॉल डिटेल आदि निकाली गई तो पूरा भेद खुल गया। एसएसपी के अनुसार सुखवीर की पत्नी मूल रूप से दीनापुर के आपराधिक परिवार की बेटी है। उसने 15 साल पहले बॉर्डर के जिले संभल के थाना बहजोई के गांव किसौली निवासी सुखवीर संग प्रेम विवाह किया था। वहां रहने के दौरान उसके संबंध किसौली के घनश्याम से हो गए।
घनश्याम पहले सुखवीर सिंह के भी संपर्क में था। मगर बाद में सुखवीर ने घनश्याम के पिता रामचंद्र की हत्या करा दी थी। इस हत्याकांड में सुखवीर ने गलत लोगों की नामजदगी करा दी थी। मगर बाद में असलियत खुली तो सुखवीर वहां से रंजिश के डर से अपनी पत्नी व परिवार को लेकर पत्नी के मायके दीनापुर में आकर नया मकान बनाकर बस गया। इसके बाद भी सुखवीर की पत्नी व घनश्याम के रिश्ते व मिलना-जुलना बरकरार रहा। साथ ही घनश्याम सुखवीर से पिता व भाई की हत्या का बदला और प्यार में बाधा हटाने की प्लानिंग बना रहा था।
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इसी बीच सुखवीर की मुलाकात दीनापुर के ही रामअवतार शास्त्री से हुई। उसकी भी घनश्याम से रंजिश चल रही थी। इस पर दोनों ने उसकी पत्नी को मिलाकर यह तय किया कि वह हमें घनश्याम की सटीक लोकेशन देगी और हम मौका पाकर हत्या कर देंगे। इसके लिए एक माह पहले फर्जी आईडी से सिम खरीदकर घनश्याम की पत्नी को नया मोबाइल दिया गया। इसी मोबाइल पर वह अपने पत्नी की लोकेशन सुखवीर को बताया करती थी। घटना वाली रात सुखवीर रामअवतार के घर सगे भाई ध्यान सिंह व राहुल संग रुका और मौका व खबर मिलते ही हत्या कर दी। इसके बाद उसकी पत्नी ने शोर जब मचाया, जब आरोपी काफी दूर निकल गए। इस मामले में पुलिस रामअवतार को पहले जेल भेज चुकी है। अब घनश्याम की पत्नी व उसके प्रेमी सुखवीर को गिरफ्तार किया गया। बाकी दो आरोपियों की तलाश चल रही है। इस सफलता में इंस्पेक्टर अजीत सिंह की भूमिका रही है। वहीं एसपी देहात डॉ.यशवीर सिंह व सीओ सुरेश मलिक का निर्देशन व पर्यवेक्षण रहा है।
दरोगा की हत्या से लेकर फर्जी लाइसेंस बनाने तक का आरोप
इस हत्याकांड में जेल गए रामअवतार शास्त्री का लंबा चौड़ा आपराधिक इतिहास है। हालांकि वर्ष 2009 के बाद से उस पर अब यह 9 साल बाद हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है। मगर एसएसपी ने बताया कि रामअवतार पर इससे पहले अपहरण, हत्या, धोखाधड़ी आदि के आठ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। उसने पटना में नकली नोटों की तस्करी का धंधा किया तो उस समय पुलिस के पीछे लगने पर वहां दरोगा की हत्या कर भाग आया था। बाद में जेल से छूटा तो फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने का गोरखधंधा करने लगा। उसने खुद डीएम-एसएसपी के पद नाम की मुहर आदि बनवाकर यह धंधा शुरू किया। गांव में अपने परिवार के कई लोगों को लाइसेंस दिला दिए। बाद में भेद खुलने पर उसमें भी मुकदमा दर्ज हुआ। इस अपराधी पर अब पुलिस उसकी संपत्ति जब्त करने की दिशा में काम करेगी।
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एसएसपी अजय कुमार साहनी ने पुलिस कार्यालय पर प्रेसवार्ता में बताया कि 12/13 जून की रात हुई हत्या में सुखवीर की मां ने गांव के रामअवतार शास्त्री आदि को पुरानी रंजिश में नामजद किया। पुलिस ने शास्त्री को जेल भेज दिया। मगर दौरान-ए-जांच यह तथ्य सामने आया कि पत्नी बगल की चारपाई पर सोयी थी और उसे कुछ नहीं पता। पूछताछ में वह रोने के अलावा कुछ नहीं बोल पा रही थी। जब अधिकारियों के निर्देश पर उससे सख्ती से पूछताछ हुई और उसके पास मिले मोबाइल नंबर की सर्विलांस से कॉल डिटेल आदि निकाली गई तो पूरा भेद खुल गया। एसएसपी के अनुसार सुखवीर की पत्नी मूल रूप से दीनापुर के आपराधिक परिवार की बेटी है। उसने 15 साल पहले बॉर्डर के जिले संभल के थाना बहजोई के गांव किसौली निवासी सुखवीर संग प्रेम विवाह किया था। वहां रहने के दौरान उसके संबंध किसौली के घनश्याम से हो गए।
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घनश्याम पहले सुखवीर सिंह के भी संपर्क में था। मगर बाद में सुखवीर ने घनश्याम के पिता रामचंद्र की हत्या करा दी थी। इस हत्याकांड में सुखवीर ने गलत लोगों की नामजदगी करा दी थी। मगर बाद में असलियत खुली तो सुखवीर वहां से रंजिश के डर से अपनी पत्नी व परिवार को लेकर पत्नी के मायके दीनापुर में आकर नया मकान बनाकर बस गया। इसके बाद भी सुखवीर की पत्नी व घनश्याम के रिश्ते व मिलना-जुलना बरकरार रहा। साथ ही घनश्याम सुखवीर से पिता व भाई की हत्या का बदला और प्यार में बाधा हटाने की प्लानिंग बना रहा था।
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इसी बीच सुखवीर की मुलाकात दीनापुर के ही रामअवतार शास्त्री से हुई। उसकी भी घनश्याम से रंजिश चल रही थी। इस पर दोनों ने उसकी पत्नी को मिलाकर यह तय किया कि वह हमें घनश्याम की सटीक लोकेशन देगी और हम मौका पाकर हत्या कर देंगे। इसके लिए एक माह पहले फर्जी आईडी से सिम खरीदकर घनश्याम की पत्नी को नया मोबाइल दिया गया। इसी मोबाइल पर वह अपने पत्नी की लोकेशन सुखवीर को बताया करती थी। घटना वाली रात सुखवीर रामअवतार के घर सगे भाई ध्यान सिंह व राहुल संग रुका और मौका व खबर मिलते ही हत्या कर दी। इसके बाद उसकी पत्नी ने शोर जब मचाया, जब आरोपी काफी दूर निकल गए। इस मामले में पुलिस रामअवतार को पहले जेल भेज चुकी है। अब घनश्याम की पत्नी व उसके प्रेमी सुखवीर को गिरफ्तार किया गया। बाकी दो आरोपियों की तलाश चल रही है। इस सफलता में इंस्पेक्टर अजीत सिंह की भूमिका रही है। वहीं एसपी देहात डॉ.यशवीर सिंह व सीओ सुरेश मलिक का निर्देशन व पर्यवेक्षण रहा है।
दरोगा की हत्या से लेकर फर्जी लाइसेंस बनाने तक का आरोप
इस हत्याकांड में जेल गए रामअवतार शास्त्री का लंबा चौड़ा आपराधिक इतिहास है। हालांकि वर्ष 2009 के बाद से उस पर अब यह 9 साल बाद हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है। मगर एसएसपी ने बताया कि रामअवतार पर इससे पहले अपहरण, हत्या, धोखाधड़ी आदि के आठ से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। उसने पटना में नकली नोटों की तस्करी का धंधा किया तो उस समय पुलिस के पीछे लगने पर वहां दरोगा की हत्या कर भाग आया था। बाद में जेल से छूटा तो फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने का गोरखधंधा करने लगा। उसने खुद डीएम-एसएसपी के पद नाम की मुहर आदि बनवाकर यह धंधा शुरू किया। गांव में अपने परिवार के कई लोगों को लाइसेंस दिला दिए। बाद में भेद खुलने पर उसमें भी मुकदमा दर्ज हुआ। इस अपराधी पर अब पुलिस उसकी संपत्ति जब्त करने की दिशा में काम करेगी।