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रिश्वत कांड में जेल गए दो पूर्व मनोरंजन कर अफसर
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Wed, 15 Nov 2017 02:02 AM IST
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लाखों रुपये के मनोरंजन कर की अदायगी से बचाने के लिए ग्रांड सुरजीत सिनेमा से दो लाख और ग्लोब टीवी संचालक से तीन लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोपी अफसरों ने मंगलवार को मेरठ की अदालत मेें आत्मसमर्पण कर दिया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
वर्ष 2009 के इस बहुचर्चित मामले में आरोपी अफसरों की रिश्वत मांगते हुए सीडी बनाई गई थी, जिसकी जांच में आरोपियों की आवाज का मिलान हो गया। जिसके आधार पर आर्थिक अपराध शाखा ने इनके खिलाफ आरोप तय करते हुए दबिश देना शुरू कर दिया था। बता दें कि सुरजीत सिनेमा के हरजीत सिंह व ग्लोब टीवी के योंगेंद्र सिंह की ओर से दर्ज मुकदमे में आठ साल से जांच चल रही है।
ग्रांड सुजीत सिने प्लेक्स अलीगढ़ के निदेशक हरजीत सिंह और ग्लोब टीवी नेटवर्क संचालक योगेंद्र सिंह सांवल की ओर से 13 फरवरी 2009 और छह जून 2009 को थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया गया था। ये केस मुकदमा संख्या 392/2009, 12 भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के तहत दर्ज किया गया।
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जिसमें अलीगढ़ में तैनात तत्कालीन सहायक मनोरंजन कर आयुक्त अमृतपाल सिंह पुत्र मेहर सिंह, मनोरंजन कर निरीक्षक लोकेश शर्मा पुत्र हरिहर शर्मा पर मनोरंजन कर चोरी से बचाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। जिसकी बाकायदा सीडी बनाई गई थी। कर चोरी की कार्रवाई से बचाने के लिए ग्रांड सुरजीत से दो लाख और डेन ग्लोब से तीन लाख रुपये मांगे गए थे। इस मामले की विवेचना चार साल तक थाना पुलिस के स्तर से चली, 18 अगस्त 2013 को शासन के आदेश पर जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को सौंपी गई।
गहन विवेचना के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप के साक्ष्य के रूप में बनवाई गई सीडी की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला लोधी रोड दिल्ली से कराई गई। दिल्ली की परीक्षण रिपोर्ट में ये बात साफ हो गई कि सीडी में कैद रिश्वत मांगने वालों की आवाज, आरोपियों की आवाज से मिलती है। जिसके बाद रिश्वत मांगने का आरोप सिद्ध हो गया। दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए कई बार दबिश दी गई, लेकिन वो मौके से नहीं मिले।
आखिरी दबिश 14 नवंबर मंगलवार को दी गई, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए। वर्तमान में अमृतपाल सिंह रिटायर हो चुके हैं और गोंडा जनपद में एमआईजी आवास विकास कालोनी गोंडा शहर में रह रहे हैं। लोकेश शर्मा भी रिटायर होकर द्वारिकापुरी थाना कोतवाली मथुरा शहर में रह रहे हैं। दोनों ने मंगलवार को विशेष न्यायाधीश न्यायालय मेरठ की कोर्ट संख्या दो में आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। अब इनके खिलाफ जांच शाखा के स्तर से चार्जशीट भेजे जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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वर्ष 2009 के इस बहुचर्चित मामले में आरोपी अफसरों की रिश्वत मांगते हुए सीडी बनाई गई थी, जिसकी जांच में आरोपियों की आवाज का मिलान हो गया। जिसके आधार पर आर्थिक अपराध शाखा ने इनके खिलाफ आरोप तय करते हुए दबिश देना शुरू कर दिया था। बता दें कि सुरजीत सिनेमा के हरजीत सिंह व ग्लोब टीवी के योंगेंद्र सिंह की ओर से दर्ज मुकदमे में आठ साल से जांच चल रही है।
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ग्रांड सुजीत सिने प्लेक्स अलीगढ़ के निदेशक हरजीत सिंह और ग्लोब टीवी नेटवर्क संचालक योगेंद्र सिंह सांवल की ओर से 13 फरवरी 2009 और छह जून 2009 को थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया गया था। ये केस मुकदमा संख्या 392/2009, 12 भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के तहत दर्ज किया गया।
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जिसमें अलीगढ़ में तैनात तत्कालीन सहायक मनोरंजन कर आयुक्त अमृतपाल सिंह पुत्र मेहर सिंह, मनोरंजन कर निरीक्षक लोकेश शर्मा पुत्र हरिहर शर्मा पर मनोरंजन कर चोरी से बचाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। जिसकी बाकायदा सीडी बनाई गई थी। कर चोरी की कार्रवाई से बचाने के लिए ग्रांड सुरजीत से दो लाख और डेन ग्लोब से तीन लाख रुपये मांगे गए थे। इस मामले की विवेचना चार साल तक थाना पुलिस के स्तर से चली, 18 अगस्त 2013 को शासन के आदेश पर जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को सौंपी गई।
गहन विवेचना के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप के साक्ष्य के रूप में बनवाई गई सीडी की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला लोधी रोड दिल्ली से कराई गई। दिल्ली की परीक्षण रिपोर्ट में ये बात साफ हो गई कि सीडी में कैद रिश्वत मांगने वालों की आवाज, आरोपियों की आवाज से मिलती है। जिसके बाद रिश्वत मांगने का आरोप सिद्ध हो गया। दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए कई बार दबिश दी गई, लेकिन वो मौके से नहीं मिले।
आखिरी दबिश 14 नवंबर मंगलवार को दी गई, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए। वर्तमान में अमृतपाल सिंह रिटायर हो चुके हैं और गोंडा जनपद में एमआईजी आवास विकास कालोनी गोंडा शहर में रह रहे हैं। लोकेश शर्मा भी रिटायर होकर द्वारिकापुरी थाना कोतवाली मथुरा शहर में रह रहे हैं। दोनों ने मंगलवार को विशेष न्यायाधीश न्यायालय मेरठ की कोर्ट संख्या दो में आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। अब इनके खिलाफ जांच शाखा के स्तर से चार्जशीट भेजे जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।