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12 दिन तक उमंग बना रहा ‘राज’... जो थे बेगाने, अपने बने आज

Thu, 30 May 2019 02:01 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अभिषेक शर्मा , अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अभिषेक शर्मा , अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Thu, 30 May 2019 02:01 AM IST
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The 'Raj' remained a rage for 12 days ... which was the beginnings, made today
अपहरण कर्ताओं के चंगुल से छूटने के बाद अपनी मां की गोद में दूध पीता मासूम बच्चा उमंग। - फोटो : Dig Vishal
जिला कारागार के बाहर से अगवा उमंग को गाजियाबाद से बरामद करने के साथ पुलिस उसे अगवा करने और खरीदने वाली महिलाओं को गिरफ्तार कर पुलिस बुधवार तड़के अलीगढ़ ले आई। यहां दिन में पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।
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इस दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मात्र 12 दिन मां से अलग रहा मासूम उमंग अपनी मां को नहीं पहचान पाया और जिस महिला ने उसे खरीदा था, वह उसी की गोद में खुद को सहज महसूस कर रहा था। बच्चे के यह हाव-भाव देख मां और उसकी बुआ हैरान हो गईं। 
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गिरफ्तारी के बाद से लेकर अलीगढ़ आने तक और दोपहर में जेल जाने तक बच्चा ज्यादातर समय खरीदने वाली महिला की गोद में ही रहा। इस दौरान खरीदने वाली महिला बच्चे को राज नाम से पुकार रही थी और बच्चा भी उससे घुला-मिला था। दोपहर में प्रेस वार्ता के बाद जब आरोपी महिला को जेल भेजने की तैयारी हुई, तब बमुश्किल बच्चे को मां व बुआ को सौंपा गया। किसी तरह दोनों ने दूध के लालच से बच्चे को संभाला। तब जाकर कलेजे के टुकड़े को वापस पाकर मां के दिल को तसल्ली हुई। परिवार में खुशी वापस लौटी।
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अपहरण के पांच दिन बाद फिर आई थी अपहरणकर्ता 
इस घटनाक्रम के संबंध में पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान एसपी क्राइम डॉ.अरविंद कुमार ने बताया कि दौलतपुर डिबाई निवासी महिला हेमलता अलीगढ़ कारागार में गैंगेस्टर में निरुद्ध अपने पति अशोक से मिलने आई थी। मगर मुलाकात पर्ची का वक्त निकल जाने के कारण उसकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसी दौरान उसकी नजर अपनी बहन संग खेल रहे मासूम उमंग पर गई और वह बच्चे को अगवा कर ले गई।

अपहरण के बाद ई-रिक्शा में बैठकर सीधे क्वार्सी चौराहा गई। वहां से बुलंदशहर की बस में सवार होकर अपने घर पहुंच गई। आरोपी हेमलता ने बताया कि 18 मई को वह बच्चे को लेकर का गाजियाबाद के थाना सिहनी गेट के भट्ठा नंबर-5 पर पहुंच गई। यहां उसने अपने गांव की ही सहेली अनीता पत्नी अशोक से संपर्क किया और बच्चे के संबंध में बताया। अनीता ने लड़का पाने के लालच में 50 हजार रुपये में उमंग को खरीदने की बात तय की।

मौके पर 40 हजार रुपये दे दिए, जबकि 10 हजार रुपये बाद में देने की बात कही। हेमलता मौके से 40 हजार रुपये ले आई। इसके बाद वह 22 मई को अलीगढ़ जेल अपने पति से मिलने आई और यहां उसने बच्चे का अपहरण कर उसे बेचने की पूरी बात पति को बताई।

पति की जमानत को थी 50 हजार रुपये की जरूरत
पूछताछ में हेमलता ने स्वीकार किया कि आठ माह से जेल में निरुद्ध उसके पति की जिला न्यायालय से जमानत खारिज हो गई है। हाईकोर्ट में जमानत के लिए वकील ने 45 हजार रुपये मांगे थे। इसी जरूरत के लिए वह परेशान थी। जब उसने यहां बच्चे को देखा तो कुछ ही देर में उसके दिमाग में बच्चे के अपहरण और अनीता को बेचने का प्लान बन गया।

इसके बाद उसने बिना किसी देरी के बच्चे का अपहरण किया और सीधे यहां से निकल गई। 40 हजार रुपये उसने अपने वकील को दे भी दिए। वह शेष दस हजार रुपये लेने अनीता से गई थी, जहां उसका रुपये न मिलने पर अनीता से विवाद भी हुआ था। मगर इसी बीच पुलिस ने उन दोनों को दबोच लिया।

जिसने रुपये दिए उधार, उसी ने पुलिस को दी खबर
सीओ तृतीय अनिल समानिया के अनुसार बच्चा खरीदने वाली महिला अनीता के पति की मौत के बाद उसने अपने देवर अशोक से शादी कर ली है। वह गाजियाबाद के सिहानी गेट इलाके के भट्ठा नंबर पांच में झोपड़ियों में रहती है और उसका पति सिंक रोड गाजियाबाद निवासी वेदराम चौधरी के यहां बतौर ट्रैक्टर चालक नौकर है। अनीता के एक बेटी है। जब हेमलता वहां बच्चा बेचने पहुंची तो अनीता को बेटे की चाहत जाग गई।

उसे शायद इस बात का अंदाजा न था कि पुलिस यहां तक पहुंच जाएगी और उसने अपने पति के मालिक से ही 40 हजार रुपये जरूरत बताकर उधार लिए थे। इसके बाद वेदराम ने अनीता की गोद में चार माह का बच्चा देखा तो उसे कुछ संदेह हुआ था। वेदराम चौधरी का पुलिस में उठना बैठना है और उनका सीओ तृतीय अनिल समानिया से भी पुराना परिचय है। इसी बीच पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुप में बच्चे का फोटो वायरल हुआ तो वेदराम ने भी वह फोटो देखा।

इस पर उन्होंने सीओ तृतीय से संपर्क किया। इसी खबर पर सीओ यहां से मंगलवार दोपहर गाजियाबाद पहुंचे और वहां सिहानी गेट पुलिस की मदद से बच्चा बरामद कराते हुए दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कराया। एसएसपी ने वेदराम चौधरी को प्रशस्ति पत्र देना तय किया है। इस टीम में उनके साथ इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अमित कुमार, एसआई रामकेश व सिहानी गेट पुलिस टीम भी शामिल रही।

बुआ के माथे से हटा कलंक
अपहृत चार माह का मासूम उमंग 12 दिनों तक ‘राज’ बनाकर रहा, हालांकि 13वें दिन वह परिवार में लौट आया। उमंग के लौटने पर सबसे अधिक खुशी उसकी बुआ को हुई। बुआ वीनेश ने बताया कि वह हर दिन भगवान से प्रार्थना कर उमंग की तलाश में घर से निकलती थी। उमंग का अपहरण उसके सीने पर एक बोझ की तरह हो गया था। वीनेश के अनुसार उमंग के मिलने से उसके माथे से एक कलंक सा हट गया है।

वीनेश ने बताया कि पति योगेश चोरी के इल्जाम में जिला जेल में निरुद्ध हैं। उनकी गिरफ्तारी के समय उमंग एक माह से भी कम उम्र का था। वह उमंग को बहुत प्यार करते हैं। जब भी परिवार का कोई सदस्य उनसे मिलाई करने जेल जाता है, उससे उमंग के हालचाल के बारे में जरूर पूछते हैं। पति योगेश के कहने पर ही वह भाभी और भतीजे को पति से मिलवाने जेल लाई थी। मगर, उनसे मुलाकात से पहले ही उमंग का अपहरण हो गया।

पति योगेश को जब उमंग के अपहरण की खबर दी तो उन्हें भी गहरा सदमा लगा। वह अपनी किस्मत को कोसने लगे। वीनेश रुंधे गले से बोलीं कि परिवार वाले शायद कभी कुछ न कहते। मगर, रिश्तेदार तो बातों में ताना मार ही देते। इसी बात का डर अंदर ही अंदर सताए जा रहा था। वीनेश ने बताया कि वह पति के जेल जाने के बाद से भाई-भाभी के परिवार के साथ ही रहती हैं। इधर, 12 दिन बाद परिवार में लौटे उमंग के साथ खुशियां एक बार फिर से उसके आंगन में लौट आईं।

उमंग को सीने से लगा उसकी मां प्रियंका और बुआ वीनेश फफक उठीं। 12 दिन से बदहवाश हालत में उमंग की तलाश में घूम रहे उसके पिता वीरेंद्र सिंह के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई। परिवार वालों ने बच्चे की तलाशी को दिन रात एक कर देने वाली जनपद की पुलिस को धन्यवाद बोला। उमंग को आंचल से लगा मां ने उसे खूब स्नेह किया। वीनेश के मुताबिक भगवान ने हमारी मुराद पूरी कर दी।

महिला अस्पताल पहुंच सीसीटीवी से मिलाया अनीता का चेहरा

उमंग की बरामदगी से एक बार फिर जनपद की पुलिस ने खाकी का मान बढ़ा दिया है। मगर पुलिस वाहवाही के काबिल तब और होगी जब उमंग की तरह ही गायब हुए 35 और बच्चे अपने मां-पिता को मिल सकेंगे। जनपद में पिछले दो साल में गायब हुए 70 में से सिर्फ 35 बच्चों का अभी भी कोई सुराग नहीं लगा है। उमंग की वापसी से अब उन परिवारों को भी अपने बच्चों की वापसी की उम्मीद जगी है।


इसी कड़ी में पुलिस बुधवार को महिला अस्पताल पहुंची। जहां करीब छह माह पहले एक नवजात को एक बुजुर्ग महिला अगवा कर ले गई थी। वह सीसीटीवी में कैद भी है। वहां पहुंची पुलिस ने सीसीटीवी से उमंग को अगवा करने वाली हेमलता के चेहरे का मिलान किया। अंदेशा था कि कहीं वह बच्चा भी हेमलता ने ही तो अगवा नहीं किया। मगर चेहरा नहीं मिला।
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